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ऑनलाइन पोर्टल की मदद से रिटायर के बाद खाली बैठे बुजुर्गों को मिल रहा रोजगार

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Online Portal Helps Retired Person
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Online Portal Helps Retired Person : 76 साल के बुजुर्ग का है पूरा आइडिया

Online Portal Helps Retired Person : नौकरी पेशा लोगों की जिंदगी में रिटायरमेंट का समय आराम के साथ साथ कई तरह की परेशानी भी लेकर आता है, जिसमें सबसे बड़ी चिंता रहती है खुद का अकेलापन और घर चलाने का खर्च.

सरकारी कर्माचारियों को तो पेंशन मिल जाती है मगर जो प्राइवेट कर्मचारी रहते हैं उनके लिए नौकरी से रिटायरमेंट होना मानो पहाड़ टूटने के बराबर हो.
दरअसल प्राइवेट और सरकारी कर्मचारी हर किसी को अपना रिटायरमेंट बहुत खलता है खासकर तब जब वह काम करने के लिए पूरी तरह फिट हों.
ऐसे में कई बार ये लोग अपनी जरूरत और कबिलियत के हिसाब से नई नौकरी ढूंढने की कोशिश करते हैं लेकिन बढ़ती उम्र के आगे वो बेबस से पड़ जाते हैं.
ऐसा इसलिए क्योंकी 60-65 की उम्र में आप हर जगह नौकरी के लिए भाग दौड़ नहीं कर सकते, ऐसे में इन लोगों के लिए नई उम्मीद बन कर आई है हम कम्यूनिटी.
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कहां से हुई हम की शुरूआत
पिछले साल अपने 76 वें जन्मदिन पर रमेश कुमार विज ने अन्य वरिष्ठ नागरिकों को एक अनोखा उपहार देने का फैसला किया. उन्होंने कृतार्थ मल्होत्रा ​​के साथ एक ऑनलाइन वेब पोर्टल के माध्यम से HUM कम्यूनिटी की शुरुआत करी जिसका काम बुजुर्ग लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर तलाशना है.
टीओआई से बातचीत में विज कहते हैं कि एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के तौर पर उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में काम किया था. लेकिन जब सन 2000 में वो सेवानिवृत्त हो गए तब उनके हाथ बिल्कुल बेकार से होते जा रहे थे और दिमाग में भी गलत विचार आने लगे थे.
उन्होंने कहा कि तब मुझे एहसास हुआ कि मेरे जैसे कई वरिष्ठ लोग होंगे जो शारीरिक रूप से फिट हैं और एक दशक या उससे ज्यादा समय तक वो अभी काम कर सकते हैं, मगर सेवानिवृत्ति के बाद उनके पास कुछ करने को नहीं है.
विज बताते हैं कि पिछले एक साल में शुरूआत के बाद से हमने अपने इस सामाजिक कामों का विस्तार अन्य शहरों तक बढ़ा दिया है जिसमें दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगर शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि हमारे इस पोर्टल के हेल्पलाइन नंबर पर नौकरी के लिए कोई भी इच्छुक सीनियर सिटीजन संपर्क कर अपनी प्रोफाइल भेज सकता हैं.
जिसके आधार पर हम उनके लिए नौकरी ढूंढने का काम करते हैं. साथी ही हम उन्हें हर जगह एचएएम के राजदूतों के साथ भी परिचय देते हैं, जो उन्हें स्थानीय व्हाट्सएप समूह में जोड़ते हैं.
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चेन्नई में, 56 वर्षीय श्रीनिवास मोमोरी एलआईसी के साथ 23 साल की सेवा के बाद 2012 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं. वहां वो गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में सीनियर मैनेजर के रूप में काम करते थे लेकिन अपने वेतन से खुश नहीं थे. मगर जब वो एनएचएम के संपर्क में आए तो उनकी नौकरी एक प्रतिष्ठित समूह में अच्छी पोस्ट पर लग गई.
इस तरह की शुरुआत ना सिर्फ बुजुर्ग लोगों को एक बार फिर उनकी जरूरत से जोड़ने का काम कर रही है, बल्कि ना जाने कितने लोगों के चेहरे पर वो मुस्कान लौटा रही है जो उनके रिटायरमेंट के बाद से कहीं गुम सी हो गई थी.