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पाकिस्तान में श्रीकृष्ण मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए वहां की सरकार ने जारी किए 2 करोड़ रुपए

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Pakistan Financial Crises

Pakistan Krishna Temple Maintenance : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने हिंदुओं की आस्था का ख्याल रखते हुए लिया फैसला

Pakistan Krishna Temple Maintenance : अब तक जो भाईचारा हमें भारत में दिखाई देता था वैसे ही कुछ नजारा इस बार सरहद पार पाकिस्तान में देखने को मिला है.
मुस्लिम बहुसंख्या वाले इस देश की सरकार ने हिंदुओं की भावनाओं का कद्र करते हुए एक बेहद अहम अच्छा फैसला किया है.
 दरअसल पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने रावलपिंडी शहर में एक कृष्णा मंदिर के पुनर्निर्माण करने के लिए 20 मिलियन डॉलर यानी की 2 करोड़ रूपए देने का फैसला किया है.
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस आर्थिक मदद से स मंदिर को बड़ा बनाया जा रहा है ताकि त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर यहां अधिक हिंदू उपासकों एकत्र होने में कोई तकलीफ ना हो सके.
बता दें कि ये  श्रीकृष्ण मंदिर रावलपिंडी और इस्लामाबाद के जुड़वां शहरों में एकमात्र कार्यरत हिंदू मंदिर है. इस मंदिर में सुबह और शाम दो टाइम प्रार्थनाएं होती हैं जिसमें छः या सात लोग भाग लेते हैं.
वैक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) के उप प्रशासक मोहम्मद असिफ ने कहा कि सरकार ने प्रांतीय असेंबली के सदस्य के अनुरोध पर मंदिर का पुनर्निर्माण करने के लिए 2 करोड़ रूपये जारी किए हैं.
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 वहां के स्थानीय लोगों के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण 1897 में कांजी माल और उज्जर माल राम रचपाल ने आसपास के इलाकों में लोगों की श्रद्धा भाव  के लिए किया था.
यह मंदिर विभाजन के बाद रावलपिंडी के हिंदुओं के लिए पूजा का एकमात्र स्थान बन गया.
गौरतलब है कि सरकार के इस फैसले से पाकिस्तान में रह रहे हिंदु परिवारों को जरूर कुछ राहत औऱ सुखद एहसास की अनुभूति जरूर हुई होगी.
पाकिस्तान की संसद मे पहली हिंदू महिला का  प्रवेश
मुस्लिम बहुल्य देश में 39 वर्षीय कृष्णा कुमारी कोलही को पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) द्वारा सिंध विधानसभा के एक अल्पसंख्यक संसदीय सीट से नामित किया गया था.
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पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कृष्णा ने अपनी सीट पर विपक्ष में खड़े हुए तालिबानी मौलाना को बड़े अंतर से हराते हुए यह जीत दर्ज की है.
खास बात यह है कि पाकिस्तान की राजनीति में गैर मुस्लिम सीनेटर को नामित करने की शुरूआत सबसे पहले पीपीपी ने ही की है. इससे पहले पीपीपी ने 2009 में एक दलित डॉ. खाटूमल जीवन और 2015 में इंजीनियर ज्ञानीचंद को सीनेटर के लिए नामांकित कर चुकी है.