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गांवों में शौचालय बनवाने का संदेश देने के लिए 15 साल की बेटी सड़कों पर कर रही स्ट्रीट प्ले

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Toilet Awareness Street Play
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Toilet Awareness Street Play : प्रत्यक्षा खुद एक अभिनेत्री हैं जो 6 साल की उम्र में अभिनय करना शुरू किया

Toilet Awareness Street Play : आज के वक्त में जब ज्यादातर युवा अपना समय फोन और सोशल मीडिया पर जाया करते हैं, 15 साल की प्रत्यक्षा लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरुक करने का काम कर रही है.

जी हां, महज 15 साल की उम्र में प्रत्यक्षा हमारे समाज को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए पसीना बहा रही है जो हम आमतौर पर हम इस उम्र के बच्चों से अपेक्षा नहीं करते .
अभिनेता से सामाजिक कार्यकर्ता बनी  प्रत्यक्षा अपनी गर्मी की छुट्टियों में गांवों में जाकर शौचालयों की आवश्यकता पर जागरूकता फैलाने के लिए काम कर रही हैं.
सोचने वाली बात है कि इन छुट्टीयों में तेज धूप के कारण जहां उनकी उम्र के दोस्त टेलीविज़न देखने में व्यस्त होते हैं या आराम से घर में कूलर या एसी में बैठे रहते हैं , वहीं प्रत्यक्षा सड़को पर नाटकों का प्रदर्शन कर ग्रामीण लोगों को खुले में शौच ना करने के लिए प्रेरित कर रही हैं.
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6 साल की उम्र में शुरू किया अभिनय
6 साल की उम्र में प्रत्यक्षा इत्फाक से थिएटर उद्योग में शामिल हो गई और उसके बाद उन्होंने उसमें रहकर अभिनय करना शुरू किया.
टीओआई से बातचीत में प्रत्यक्षा बताती हैं कि जब वो मंड्या के रास्ते में थी तब उन्हें एक प्रसिद्ध रंगमंच निदेशक ने फोन करके अपने नाटक गांधी बंध में एक भूमिका निभाने का मौका दिया.
यही नहीं प्रत्यक्षा को कन्नड़ फिल्म सांडस में भी काम करने का मौका मिला, जिसे अभी तक रिलीज़ नहीं किया गया है. यह फिल्म स्वच्छ भारत मिशन पर केंद्रित है.
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कहां से आया आइडिया
सांडस फिल्म की शूटिंग के दौरान, जब प्रत्यक्षा कोप्पल के एक गांव में रह रही थी तब एक दिन उन्होंने शौच के लिए जाना चाहा  मगर उस गांव में दूर दूर तक किसी भी घर में कोई शोचालय नहीं था .
इस बारे में जब प्रत्यक्षा ने वहां की महिलाओं से बात करी तो उन्होंने उन्हें भी खुले में शौच करने के लिए कहा जैसे वो करती थी.
गांव में महिलाओं की इन बातों ने प्रत्यक्षा के दिमाग पर गहरा असर डाला जिसके बाद उन्होंने गांवों में शौचालय रखने के महत्व पर जागरूकता पैदा करने का फैसला किया.
इस सोच के साथ उन्होंने शौचालय के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सड़कों पर नाटक करने का विचार किया जिसकी शुरूआत वो कर भी चुकी हैं.
वहीं बेटी के इस कदम से खुश होकर खुद परिवारवालों नें ही उन्हें नाटक की स्क्रिप्ट लिखने में मदद करी.प्रत्थक्ष के पिता बीजी रामकृष्ण बताते हैं कि वो अपनी बेटी के इस काम में उसका समर्थन करते है और उन्हें उस पर गर्व है.
बता दें कि प्रत्यक्षा अभी तक कोप्पल चिक्कामागलुरू में गणपुरा और रामानगर में हरोहल्ली के गांवों में क शौचालय के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 100 से अधिक नाटक कर चुकी है.