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Widow Mother Remarriage : राजस्थान की बेटी ने विधवा मां की दूसरी शादी रचाकर समाज को दिखाया नया आइना

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Widow Mother Remarriage

Widow Mother Remarriage : संहिता ने लोगों से भी मांगा सहयोग

Widow Mother Remarriage : अपनी पुरानी परंपराओं से ढके भारत में शादी के बाद किसी महिला का विधवा होना शायद उसके लिए जिंदगी का सबसे बड़ा अभिषाप बन जाता है.

कई तरह के ताने बानों से बुने इस समाज में किस महिला के विधवा होने के बाद उसके साथ इस तरह से व्यवहार किया जाता है जैसे मानों उसकी पति के मृत्यु के बाद उसका कोई वजूद ही नहीं बचा हो.
लेकिन इसी समाज के लिए राजस्थान की एक बेटी ने अद्भुत उदाहरण पेश किया है.
दरअसल राजस्थान के जयपुर जिले की रहने वाली संहिता अग्नवाल अपनी विधवा मां की दोबारा से दूसरी शादी कराकर रूढ़ीवादी समाज को एक नया आइना दिखाया है.
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क्या है पूरा मामला
वैसे तो संहिता की उम्र खुद की शादी की है मगर वो अपनी विधवा मां की शादी करा आज मीडिया की सूर्खियां बटोर रही हैं. संहिता अभी गुड़गांव में एक निजी कंपनी में नौकरी करती हैं.
गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में काम करने वाली सुनीता ने बताया कि उनके पिता की मौत मई 2016 में हार्ट अटैक से हो गई थी जिसके बाद उनकी मां विधवा हो गई.
उन्होंने कहा कि पिता की मौत के बाद उनकी मां गीता अग्रवाल (53) एकदम टूट सी गई थी और ज्यादातर समय वो तन्हा और उदास रहने लगी थीं.
जॉब लगने से पहले तक तो संगीता ने अपनी मां को हर पर संभाला मगर जब वो भी अपनी नौकरी के लिए गुरुग्राम आ गई तो उनकी मां घर पर पूरी तरह से अकेले रह गईं.
सुनीता ने बताया कि घर पर किसी के ना होने की वजह से उनकी मां रात को अकेले ही टीवी चलाकर सोया करती थी ताकि उन्हें उससे किसी के होने का एहसास हो.
मां की ऐसी हालत देखकर संहिता को रहा नहीं गया और उन्होंने बिना समाज की परवाह किए एक बड़ा फैसला लिया और अपनी मां की मैट्रिमोनियल साइट पर प्रोफाइल बना दी.
ना करने के बाद शादी के लिए मान गई गीता
प्रोफाइल बनने के कुछ दिनों के बाद से ही उनके पास उनकी मां के लिए रिश्ते आने शुरू हो गए थे. जिसमें से उन्होंने 55 साल के गोपाल गुप्ता को अपनी मां से शादी के लिए पसंद कर लिया. बता दें कि गोपाल गुप्ता एक रेवेन्यू अधिकारी हैं और उनकी पत्नी की मौत सात साल पहले कैंसर बिमारी से हो गई थी.
संहिता बताती हैं कि शुरूआत में जब उन्होंने अपनी मां से शादी की बात की तो उन्होंने साफ मना कर दिया. मगर अपनी बिमारी में गोपाल गुप्ता को खुद की सेवा करते हुए देख उन्होंने भी बाद में मन बना लिया. जिसके बाद दोनो की शादी चुनिंदा रिश्तेदारों की मौजूदगी में आर्यसमाज मंदिर में करा दी गई.
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संहिता ने लोगों से भी मांगा सहयोग
अपनी मां की शादी की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए संहिता भावनात्मक लहजे में लिखती हैं कि उनकी मां कहती थीं कि शादी करने की तेरी उम्र है, मेरी क्यों करवा रही है. तेरी शादी में दिक्कत आएगी बेटा.
अब वह देख सकती हैं कि यह समाज बदल चुका है. अब जो करना है वो यह कि इस चीज को नॉर्मल करना है.
एक पिता को अगर हमसफर की जरुरत है तो अब वक्त है कि वो खुलकर मन की बात बच्चों के सामने रख सके और वो मां जिसे हमने हमेशा शर्म के आंचल में बंधे देखा है वो कह सकें कि मुझे जीना है पहले की तरह
अपने इस पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि वो सिर्फ एक पहल कर रही हैं. अगर आप सब का सहयोग मिलेगा तो जल्द ही हमें इस देश में घर के बाहर बैठे माला फेरते ऐसे बुजुर्ग नहीं मिलेगें.
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए लिखा कि हम इस बेबसी को खत्म करना है जो उनके चेहरे पर किसी से बात करने को और खुद का हाल पूछने को दिखाती है.
बेशक संहिता का ये फैसला कुछ रूढ़ीवादी सोच रखने वाले लोगों को नहीं भाएगा मगर उनका ये कदम उन बच्चों के लिए जरूर प्रेरणादायक बनेगा जो अपने घर या आस पड़ोस इस तरह के लोगों को अकेलेपन का शिकार होते हुए देखते हैं.

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