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भारत के छोटे से गांव में एचआईवी को खत्म करने के लिए एक अनपढ़ महिला चला रही अभियान

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Women Helping End Aids/Hiv
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Women Helping End Aids/Hiv : ग्रामीण लोगों की इस बिमारी में सहारा हैं निर्मला

Women Helping End Aids/Hiv : हमारे समाज के लिए एचआईवी/एड्स एक बिमारी नहीं बल्कि एक ऐसा डर का नाम बन गया है जिसके साए में ना जाने देश और दुनिया के कितने लोग जी रहे हैं.

बात अगर सिर्फ भारत की करें तो एक अनुमान के मुताबिक लगभग 2.4 मिलियन पुरुष और महिलाएं इस समय एचआईवी की बिमारी से ग्रसित हैं.
वैसे इस बिमारी का पूर्ण रूप से इलाज तो अब तक नहीं खोजा जा सका है लेकिन पिछले काफी समय में लोगों के बीच इसे लेकर जागरूकता जरूरी बढ़ी है.
पिछले कुछ वर्षों से हम सब ने यह देखा है कि देश के समाजसेवी संगठन और सरकारों ने मिलकर आम लोगों के बीच से इसका खौफ खत्म करने का बीड़ा उठाया हुआ है.
इसका बेहतर उदाहरण है छत्तीसगढ़ सरकार की नई योजना, जिसमें वह इस बिमारी से लोगों को जागरूक करने के लिए गांवों में एचाईवी लीडर बना रहे हैं.
ऐसी ही एक एचआइवी लीडर है निर्मला देवी, यूं तो निर्मला एक अशिक्षित औरत हैं और दो बेटियों की मां है मगर साधारण होने क बावजूद भी वह खास है.
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निर्मला देवी ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे लोगों के साथ काम करती है जिन्हें एचआईवी होने का सबसे ज्यादा खतरा है. यही नहीं वो उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं के जोड़ने में मदद भी करती हैं ताकि उनको इस बीमारी का सही उपचार मिल सके.
बता दें कि यूटीपी संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की मदद से भारत में एक सरकारी योजना का संचालन किया जा रहा जो ऐसे लोगों के हालातों को बदलने की कोशिश कर रहा है.
निर्मला देवी (courtsey- gaystar)
लिंक वर्कर स्कीम के नाम से छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण इलाकों में लोगों को शामिल करती ये योजना एचआईवी के खतरे में लोगों की मदद के लिए प्रशिक्षण देती है.
निर्मला देवी भी एक ऐसी ही एचआईवी लीडर हैं जो मध्य भारतीय राज्य छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले के पऊवाड़ा गांव में काम कर रही है. एक महिला होने के नाते उनका ऐसे मुद्दे को लेकर काम करना जिसके बारे में लोग बात तक करना भी पसंद नहीं करते अपने आप में साहसिक है.
निर्मल बताती हैं कि वो एचआईवी से पीड़ित मरीजों की मदद करने के अलावा एक निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में एचआईवी / एड्स के आधार पर भेदभाव करने वाले किसी भी शख्स के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है.
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गौरतलब है कि एचआईवी के 2003 से शुरू हुए नियमित परीक्षण के बाद से इन केसों के मामलों में दस गुना वृद्धि हुई है. लेकिन यह भी देखने को मिला है कि पीड़ित व्यक्ति योजना के परिणामस्वरूप उचित स्वास्थ्य सेवाओं और बिमारी से जुड़ी सूचना से अधिक तेजी से जुड़ पाते हैं.
वहीं इस योजना की मदद से पीएलएचआईवी को सब्सिडी वाली कीमतों पर भोजन प्राप्त करने में भी मदद मिली है. और यह भी उम्मीद की जी सकती है कि ऐसे कदमों से जल्द ही लोगों के अंदर इस बिमारी को लेकर झिझक खत्म हो जाएगी.

साभार – गे स्टार