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IMA : पिता थे मजदूर और मां करती थी दफ्तरों में सफाई, आज बेटा बन गया सेना में अधिकारी

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IMA : यूएस की नौकरी छोड ज्वॉइन की आर्मी

IMA : शनिवार को देहरादुन के भारतीय सैन्य अकादमी(आईएमए) में हुए पासिंग आउट परेड के बाद भारतीय सेना को 409 अधिकारी रैंक के नौजवान मिले.

देश के विभिन्न राज्यों से आए इन कैडेट्स ने अपनी 3 साल की कठिन ट्रेनिंग पूरी कर कल अकादमी में अपने अंतिम पग भरे. यहां से जाने के बाद इन अधिकारीयों को सेना के विभिन्न बटालियन में पोस्टिंग दे दी जाएगी जहां से उनकी आर्मी में सेवा की शुरूआत होगी.
इन सभी कैडेट्स में से बरनाना यडागिरी के एनडीए में शामिल होने की कहानी काफी सुर्खियों में रही.
बरनाना के पिता बरनाना गुन्नाया हैदराबाद की एक सिमेंट फैक्टरी में मजदूरी का काम करते हैं.
मजदूरी करके 100 रुपया प्रतिदिन पाने वाले जब उनके पिता को यह पता चला कि उनका बेटा सेना में एक अधिकारी बन गया है तो उनके आंखों से आंसू निकल आए.

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यूएस की नौकरी छोड ज्वॉइन की आर्मी
बरनाना यडागिरी हैदराबाद के इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इन्फर्मेशन टैक्नॉलजी से सॉफ्टवेयर इंजिनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं
आपको बता दें कि आर्मीं ज्वाइन करने से पहले यडागिरि एक अमेरिकी कंपनी यूनियन पसफिक रेल रोड में नौकरी किया करते थे.
यहीं नहीं उनका आईआईएम इंदौर में भी एमबीए पाठ्यक्रम में पढ़ने के लिए चयन हो गया था. मगर उन्होंने यह सब छोड़ते हुए आर्मी ज्वाइन करने का फैसला किया.
यडागिरि को आर्मी की इंजिनियरिंग यूनिट में शामिल किया गया है. गौरतलब है कि अकैडमी में टेक्निकल ग्रैजुएट कोर्स में पहला स्थान हासिल करने के लिए उन्हें सिल्वर मेडल से भी सम्मानित किया गया है.
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छत्रवृति की मदद से की पढ़ाई
TOI से बातचीत में यडागिरी ने अपने पुराने दिनों के बारे में बात करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई सरकारी छात्रवृत्तियों के तहत मिलने वाली राशि से किया.
उन्होंने बताया कि पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे और मां पोलियो ग्रस्त होने के बावजूद आफिसों में साफ सफाई का काम करती थी.
देश की सेवा से मिलेगी संतुष्टि
यडागिरी ने कहा कि वो चाहते तो कॉर्पोरेट ऑफिस में काम करके अच्छा पैसा कमा सकते थे मगर उनका मन इसमें कभी ना लगता.
उन्होंने कहा कि देश की सेवा करने से उनको जो खुशी मिलेगी उसकी पैसों से तुलना नहीं की जा सकती.
भविष्य में अपनी सेना में कार्य करने के बारे में बातचीत में उन्होंने बताया कि उनके खून में कड़ी मेहनत करने का गुण है और वो रक्षा अनुसंधान के विकास में अपना पूरा जी-जान लगाकर काम करेंगे.