तो इस वजह से JNU में ABVP को सपोर्ट करने वाली छात्राओं ने भी नहीं दिया उन्हें वोट !

JNU Union Election 2018 Update :

JNU Union Election 2018 Update : जेएनयू में महिलाओं ने हासिल की दो बड़ी सीट

JNU Union Election 2018 Update : एक बार फिर जेएनयू में एबीवीपी यानी कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(ABVP) को हार का मुंह देखना पड़ा है.

इसके लिए कौन जिम्मेदार है यह तो तय कर पाना मुश्किल है लेकिन इस बार के इलेक्शन ने यह साफ कर दिया है कि जेएनयू में लेफ्ट की पकड़ अभी भी काफी मजबूत है. 

जेनएयू  को लेकर हमेशा से उठते रहे हैं सवाल  

जहां एक तरफ जेएनयू को देश विरोधी माना जाता है तो वहीं कुछ लोग इसके नाम बदलने की मांग उठाते रहते. यहां तक की विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षकों को मार्कस्वाद या आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला बताया जाता है.
बात समलैंगिक रिश्तों की हो या लड़का-लड़की के बीच के प्रेम प्रसंग हर मुद्दों पर जेएनयू के छात्र हमेशा लोगों के साथ खड़े रहते हैं.
सिर्फ यही नहीं पढ़ाई लिखाई के बारे में भी जेएनयू का स्थान टॉप पर रहता है. भारत में उच्च संस्थानों का आकलन और प्रत्यायन का कार्य करने वाले संस्थान NAAC ने 2017 में जेएनयू को A+ रैंकिंग दी थी.
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बीजेपी के आने के बाद और बिगड़ा जेएनयू का माहौल ? 

देश में जब से BJP की सरकार आई है जेएनयू के खिलाफ एक ऐसा माहौल तैयार कर दिया गया है कि गली गली में लोग इसको बंद कराने की मांग उठाने लगे.
कुछ समय पहले तो इसकी छवि ऐसी बना दी गई थी कि मानो जैसे एक तरफ पाकिस्तान और जेएनयू हैं और दूसरी तरफ पूरा भारत.
हद तो तब हो गई जब एक केंद्रीय मंत्री ने जेएनयू का सीधा कनेक्शन सीमा पार के आतंकियों से निकाला और तो और कुछ नहीं तो इसे नक्सलियों का गढ़ तक कह दिया.  यह तो गनीमत रही कि इसको मिटाने के लिए सेना या बल का प्रयोग नहीं किया गया.,
लेकिन लोगों के मन में यह धारणा जरूर बना दी गई कि आप ही की कमाई पर जेएनयू में देशद्रोही पल रहे हैं.

जेएनयू में महिलाओं ने हासिल की दो बड़ी सीट

इस चुनाव में दो छात्राएं सारिका चौधरी ने उपाध्यक्ष के पद पर और अमुथा ने ज्वॉइंट सेक्रेटरी के पद पर भारी अंतर से जीत हासिल की है.
इस बार छात्राओं की जीत को काफी खास माना जा रहा है क्योंकि कुछ समय पहले जेएनयू से उस कमेटी को हटा दिया गया था जो महिलाओं के राइट्स का देखभाल करती थी.
जी हां हम बात कर रहे हैं जीएसकैश कमेटी की जो साल 1999 से जेएनयू में छात्राओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर आवाज उठा रही थी .
आपको बता दें जब इसको इस साल बंद किया गया तो इसका विरोध सिर्फ स्टूडेंट ही नहीं बल्कि जेएनयू के सभी टीचर्स ने भी किया था.
लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला अब जब महिलाओं को जेएनयू में जीत हुई तो उम्मीद की जा रही है कि इसको वापस शुरू किया जाएगा.
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JNU Union Election 2018 Update

 

तो इस कारण ABVP के खिलाफ थीं JNU की छात्राएं 

दरअसल बीते साल जेएनयू की छात्राओं ने प्रोफेसर अतुल जोहरी और प्रोफेसर महेंद्र पी लामा के ख़िलाफ़ यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे.
हालांकी इंटरनल कंपलेंट कमेटी ने इन मामलों की जांच करके महेंद्र पी लामा को क्लीन चिट दे दी. लेकिन छात्राओं के अंदर इन्हें लेकर गुस्सा कम नहीं हुआ.
बीबीसी से बातचीत में जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष गीता कुमारी कहती हैं कि जिन छात्राओं ने इन दोनों प्रोफेसर खिलाफ शाकायत दर्ज कराई थी वो ABVP को सपोर्ट करती थी.
लेकिन इसके बावजूद एबीवीपी ने जौहरी का समर्थन किया और छात्राओं के खिलाफ़ अफवाहें उड़वाई गईं.
इस वजह से महिलाओं में एबीवीपी के प्रति गुस्से का माहौल था और उन्होंने बढ़-चढ़कर इस यूनियन के खिलाफ  वोट किया
 यही नहीं चुनाव से कुछ दिन पहले JNU की दीवारों पर पोस्टर लगाए गए थे जिन पर लिखा था कि “यदि ABVP जीतती है तो कैंपस में लड़कियों को छोटे कपड़े नहीं पहनने दिया जाएगा  जिससे यौन शोषण के मामलों में गिरावट आएगी”
हालांकि,  इसको लेकर ABVP के कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह लेफ्ट के दुष्प्रचार है.
लेकिन इस सफाई के आने तक काफी देर हो चुकी थी और अधिकांश छात्राएं लेफ्ट में जा चुकी थी. जिसका फायदा सीधे तौर पर लेफ्ट को मिला है.
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ये है जेएनयू के इस बार का चुनाव रिजल्ट !  
अध्यक्ष
एन साई बालाजी(लेफ्ट)– 2161
ललित पांडेय(abvp)- 982
उपाध्यक्ष
सारिका चौधरी( लेफ्ट) – 2692
गीताश्री बरुआ (abvp)– 1012
महासचिव
एजाज़ अहमद(लेफ्ट)– 2423
गणेश गुजर (abvp) – 1123
सह सचिव
अमूथा जयदीप(लेफ्ट)– 2047
वैंकट चौबे (abvp)– 1290
फिलहाल जहां देश की मीडिया ने जेएनयू संस्था के चुनाव को किसी विधानसभा चुनाव जितना रोमांचक बना दिया.
वहीं यह देखना भी काफी रोमांचक होगा कि आने वाले समय में  ABVP जेएनयू में पकड़ बनाने के लिए क्या हथकंडे अपनाती है.