पेड़-पौधे लगाने में दुनिया में सबसे आगे हैं भारत और चीन – NASA

NASA Tree Plantation Study
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NASA Tree Plantation Study : 20 साल पहले की तुलना में दुनिया अब और अधिक हरी भरी हो गई .

NASA Tree Plantation Study : ये बात सच है की बढ़ते इंफ्रास्ट्रकचर की वजह से दुनिया में पेड़ पौधों की संख्या कम होती जा रही है.

लेकिन भारत जैसा देश इस परिस्थिति मे भी भूमंडल को हरा-भरा बनाने में अपना योगदान बखूबी निभा रहा है.
ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकी हाल में हुए नासा (NASA)के अध्ययन में ये पाया गया है की पूरी दुनिया में भारत और पड़ोसी मुल्क चीन पेड़ लगाने के मामले में सबसे आगे हैं.
यही नहीं इस अध्ययन में ये भी सामने आया है की 20 साल पहले की तुलना में दुनिया अब और अधिक हरी भरी हो गई .

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बता दें की ये अध्ययन नासा के उपग्रह से मिले आंकड़ों एवं विश्लेषण के आधार पर पूरा किया गया है.
बोस्टन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और इस अध्यन के लेखक ची चेन ने कहा दुनिया को हरा भरा करने में भारत और चीन का योगदान एक तिहाई रहा जबकी धरती पर इन दोनों देशों के पास केवल 9% ही वन भूमि है.
NASA Tree Plantation Study
चीन और भारत में कितना हुआ पौधारोपण
रिपोर्ट के मुताबिक पेड़ पौधों से ढके क्षेत्र में वैश्विक बढोतरी में 25 प्रतिशत योगदान केवल चीन का है और भारत का भी लगभग इतना ही है .
नासा के अध्ययन में कहा गया है कि चीन वनों (42 प्रतिशत) और कृषिभूमि (32 प्रतिशत) के कारण हरा भरा बना है जबकि भारत में कृषिभूमि (82 प्रतिशत) के कारण ऐसा हुआ है,इसमें वनों का केवल 4.4 प्रतिशत ही हिस्सा है.
इसका सबसे बड़ा कारण है चीन भूक्षरण, वायु प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए वनों को बढ़ाने और उन्हें संरक्षित रखने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रहा है.
हालांकी भारत भी अब इसकी गंभीरता को समझते हुए पौधा-रोपण को लेकर काफी जागरूक हुआ है.
साल 2017 में हमारे देश ने केवल 12 घंटों में 6.6 करोड़ पौधे लगाकर अपना ही विश्व रिकार्ड तोड़ था.
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अगर बात खाद्य उत्पादन की करे तो भारत और चीन में 2000 के बाद से इसमें 35 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी हुई है.
नासा के अमेस अनुसंधान केंद्र में एक अनुसंधान वैज्ञानिक एवं अध्ययन की सह लेखक रमा नेमानी बताती हैं की भारत और चीन में 1970 और 1980 के दशक में पेड़-पौधों के संबंध में स्थिति सही नहीं थी.
उन्होंने कहा की 1990 के दशक में लोगों को इसका एहसास हुआ और आज इन चीजों में काफी सुधार देखने को मिल रहा है.