कॉलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की कैंपस प्लेसमेंट 60 % से भी कम – रिपोर्ट

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Campus Placement Report In Colleges :केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने लोकसभा में दी ये जानकारी

Campus Placement Report In Colleges : हम जब भी किसी कॉलेज में दाखिला लेने जाते हैं तो सबसे पहले हमारा यही सवाल रहता है कॉलेज की प्लेसमेंट कैसी है?

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोर्स इंजीनियरिंग का हो मैनेजमेंट का हो या मेडिकल हमारीा एडमिशन तो कॉलेज की प्लेसमेंटों की संख्या देख कर ही होती है.
और ये बात को खुद कॉलेज प्रशासन भी अच्छे जानते हैं तभी तो उनके हर विज्ञापन में स्टूडेंट्स की प्लेसमेंटों का जिक्र जरूर रहता है .
लेकिन हाल ही में कॉलेजों की कैंपस प्लेसमेंट को लेकर जो रिपोर्ट सामने लायी है वो बताती है कि देश में बेरोजरगारी बढ़ने की वजह इन शिक्षण संस्थानो में किए जा रहे झूटे वादे भी है.
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ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) के प्लेसमेंट डेटा के अनुसार मैनेजमेंट, टेक्निकल और इंजीनियरिंग संस्थानों से ग्रेजुएट होने वले स्टूडेंट्स का औसत कैंपस प्लेसमेंट्स 60 प्रतिशत से भी कम है.
खास बात है कि ये रिपोर्ट किसी गैर सरकारी संस्था द्वारा नहीं जारी की गई है बल्कि खुद केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने लोकसभा में लिखित सवाल के जवाब में इस बारे में देश को अवगत कराया
सिंह ने अपने जवाब में कहा है  AICTE के प्लेसमेंट डेटा के अनुसार मैनेजमेंट, टेक्निकल और इंजीनियरिंग संस्थानों से ग्रेजुएट विद्यार्थियों का औसत कैंपस प्लेसमेंट 60 फीसदी तक भी नहीं पहुंचा है.’
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसे सुधारने के लिए अब HRD डीपार्टमेंट AICTE के साथ मिलकर काम करने वाला है.
इसके अलावा ग्रेजुएट्स को 100 फीसदी प्लेसमेंट देने के लिए एआईसीटीई ने इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट प्रोग्राम में यूजी और पीजी लेवल कोर्स के लिए इंडस्ट्री आधारित नए पाठ्यक्रम तैयार किए है.
साथ ही छात्रों के इंटर्नशिप और रोजगार के लिए संस्थान ज्यादा जवाबदेह बनाए जा रहे हैं
गौरतलब है कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि सभी संस्थानों का यही हाल है.आईआईटी की इस साल की कैंपस प्लेसमेंट प्रक्रिया में माइक्रोसॉफ्ट ने 1.5 करोड़ रुपये का सबसे ज्यादा सैलरी पैकेज दिया था.
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वहीं उबर ने भी आईआईटी स्टूडेंट को 1 करोड़ से ज्यादा का पैकेज ऑफर किया था, लेकिन निराश करने वाली बात ये है कि यह सिर्फ सीमित जगह तक ही है.
दरअसल लगातार खुलते जा रहे इंजीनियरिंग,मैनेजमेंट और मेडिकल की पढ़ाई कराने वाले कॉलेजों की वजह से ये ग्राफ नीचा होता जा रहा है.
आज हर कोई चाहे वो पढ़ाई में कितना भी कमजोर क्यों ना हो लेकिन अपने मनमुताबिक वो किसी ना किसी प्राइवेट कॉलेज से कोर्स जरूर करना शुरू कर दे रहा.