नार्थ नहीं बल्की अब दक्षिण के राज्यों में बाल लिंगानुपात में हो रही गिरावट – रिपोर्ट

Child Sex Ratio In Southern States
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Child Sex Ratio In Southern States :आंध्र-कर्नाटक में स्थिति चिंताजनक

Child Sex Ratio In Southern States : 2011 की जनगणना में जो लिंगानुपात के आकड़े सामने आए थे उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था.

लड़कों के मुकाबले लड़कियों की घटती संख्या ने पहली बार देश के नागिरक और सरकारों का ध्यान इस और खींचने का काम किया था.
उस समय जो आकड़े सामने आए थे उसमे देश के उत्तरी राज्यों में लिंगानुपात का ज्यादा अंतर पाया गया था.
हरियाणा तो पूरे देश में इस मामले में अव्वल राज्य था.लेकिन अब ये स्थित दक्षिण भारत के राज्यों में बनती दिख रही है.
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने एसआरबी से जुड़े आकड़ों पर एक रिपोर्ट तैयार करी है जिसमें ये बातें सामने निकल कर आई है.
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क्या है मौजूदा स्थिति
सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) के आंकड़ों के अनुसार 2016 में आंध्र प्रदेश और राजस्थान में बाल लिंग अनुपात (SRB या सेक्स रेशियो एट बर्थ) सबसे खराब रहा है.
डेटा के मुताबिक 2016 में इन दोनों राज्यों में लिंग अनुपात प्रति 1,000 बालकों की तुलना में 806 बच्चियों का हो गया है.
वहीं अगर अन्य दक्षिण राज्य तमिलनाडु की बात करें तो 2007 में वहां एसआरबी 935 था जो अब 840 हो गया जबकि पूरे भारत का एसआरबी 877 रहा.
कर्नाटक की स्थिति तो और भी गंभीर है 2007 में वहां का लिंग अनुपात 1,004 था जो 2016 में 896 तक चला गया.
इसके अलावा तेलंगाना के 2013 में गठन के दौरान लिंग अनुपात 954 था लेकिन सिर्फ 3 ही साल में यानी की 2013 तक ये 881 हो गया है.
Child Sex Ratio In Southern States
2006 से पहले स्थिति थी बेहतर
पुराने आकड़ों की मानें तो 2006 से पहले दक्षिण राज्यों के यहां एसआरबी 900 से अधिक था लेकिन 2016 तक लिंग अनुपात देश के औसत लिंग अनुपात से नीचे चला गया.
उदाहरण के तौर पर 2006 में तमिलनाडु में प्रति 1,000 बालकों पर 939 बच्चियां थीं, लेकिन 2015 आते-आते यह संख्या 818 हो गई.
अब तो आलम ये हो गया है की दक्षिण के कुछ राज्यों की स्थिति मौजूदा समय में हरियाणा से भी पीछे हो गई है.
दक्षिण राज्यों में बर्थ रजिस्ट्रेशन की दर लगभग 100 फीसदी है, ऐसे में कम होती बच्चियों की संख्या को लड़िकयों का बर्थ रजिस्ट्रेशन ना होना नहीं मान सकते.
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अन्य राज्यों का क्या है हाल
अगर इस मामले में हाल में आए हुए अन्य राज्यों के आकड़ों को देखें तो पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश,महाराष्ट्र ,दिल्ली और असम के लिंगानुपात में सुधार हुआ है.
दिल्ली की बात करें तो 2007 में यहां एसआरबी 848 था, जो 2016 में 902 हो गया. वहीं, असम का एसआरबी 834 से 888 पहुंच गया और हरियाणा का 865 हो गया.
हालांकी अभी पश्चिम बंगाल, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर , गोवा,बिहार और उत्तर प्रदेश में सुधार देखने को नहीं मिला है, बल्की ये और नीचे ही होती जा रही है.
बात करें तो बिहार का एसआरबी 924 से गिर कर 837 हो गया. वहीं, उत्तर प्रदेश में प्रति 1,000 लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या 930 से 885 हो गई है.