यौन शोषण से संयुक्त राष्ट्र भी नहीं अछूता, हर 3 में से 1 कर्मचारी पीड़ित

UN Employees Sexual Harassment Survey
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UN Employees Sexual Harassment Survey : यौन शोषण करने वालों में करीब 10 में से एक व्यक्ति वरिष्ठ नेता था

UN Employees Sexual Harassment Survey : आपको पता तो होगा ही की कैसे इस समय भारत समेत पूरी दुनिया में #MeToo मूवमेंट चल रहा है.

जी हां वही #MeToo जिसके तहत महिलाओं ने उन पुरुषों के खिलाफ आवाज़ उठायी जिन्होंने कभी न कभी उनका शोषण किया है.
बात अगर भारत की करें तो इस मूवमेंट के सामने आने के बाद सबसे ज़्यादा प्रभाव पड़ा तो बॉलीवुड के उन चेहरों पर जो अपने इन काले कारनामों के पीछे छिपकर बैठे थे.
लेकिन अब दुनियाभर के लिए #MeToo से जुडी एक ऐसी खबर आयी है जिसने सबके होश फाख्ता कर दिए हैं.
दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत संयुक्त राष्ट्र में भी MeToo
जी हाँ, इतना पढ़कर ही शायद आपको झटका लगा होगा लेकिन ये बात एकदम सच है, दरअसल संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक सर्वे किया गया जिसमें यह सामने आया कि यहां काम करने वाली एक तिहाही महिलाओं के साथ किसी न किसी रूप में शोषण हुआ है .

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सर्वे में कहा गया है कि यौन उत्पीड़न करने वाले हर तीन व्यक्तियों में दो पुरुष और हर चार में से एक निरीक्षक या प्रबंधक है.
UN Employees Sexual Harassment Survey
सर्वेक्षण के अनुसार, यौन शोषण करने वालों में करीब 10 में से एक व्यक्ति वरिष्ठ नेता था.  बता दें की पिछले दो सालों में तीन में से एक रिस्पॉन्डेंट या 33 प्रतिशत ने कम से कम 1 बार यौन शोषण होने की बात को स्वीकारा है.
इस मुद्दे को लेकर क्या बोले UN प्रेसिडेंट
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के पास जब यह सर्वे पहुंचा तो उन्होंने कहा कि अध्ययन में व्यथित करने वाले कुछ आंकड़े और तथ्य हैं जिन्हें बदलने की जरुरत है ताकि संयुक्त राष्ट्र में कार्यस्थल में सुधार किया जा सके.
सर्वेक्षण के नतीजों से पता चलता है कि विश्व निकाय में यौन शोषण के मामले अन्य संगठनों के मुकाबले कम हैं लेकिन समानता, गरिमा और मानवाधिकारों में चैम्पियन संयुक्त राष्ट्र को उच्च मानक तय करने चाहिए.
बता दें महिलाओं के अनुसार इस शोषण में यौन कहानियां या चुटकुले हैं जिनमें कपड़ों, शरीर या यौन गतिविधियों को लेकर अश्लील टिप्पणियां तक शामिल हैं.
तो क्या कहीं सुरक्षित नहीं महिलाऐं ?
अगर सही मायने में कहें तो हाँ, दुनियभर में करीब 35 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी तरह अपने जीवन में यौन शोषण का शिकार हुई हैं और यह आकड़ा लगातार बढ़ रहा है.
इतना ही नहीं सिर्फ महिलाएं ही नहीं बल्कि कम उम्र की लड़कियां और वृद्ध महिलाऐं भी इसमें शामिल हैं.
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क्यों बढ़ रहे हैं मामले ?
फिलहाल इसका सटीक जवाब तो किसी के पास भी नहीं है लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा की इसको रोकने के लिए भी सफल प्रयास नहीं हो रहे हैं.
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सबसे पहले इंसान की मानसिकता को समझना जरूरी है क्यूंकी इस शोषण का शिकार शॉर्ट्स पहनी लड़की से लेकर ना समझ बच्ची तक हो रही हैं, फिर चाहे वो किसी भी पद पर हो या फिर किसी भी जात से…
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दुनियाभर में चल रही इसके खिलाफ कई संस्थाएं
सरकारी या कहें कागजी संस्था के आलावा महिलाओं के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ दुनियाभर में कई प्राइवेट संस्था भी इसको रोकने के लिए तरह तरह के अभ्यान चला रहे हैं लेकिन सफलता ना मात्र है.
अब यह आने वाले वक़्त में तय होगा कि क्या समाज में एक बार फिर महिलों के लिए पर्दा प्रथा आएगी या पुरुष समाज के कुछ तबके की मानसिकता सुधरेगी