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Mumbai Mosque Langar : मुंबई की मस्जिद ने शुरू की लंगर सेवा, हर रोज 100 भूखे लोगों का भरते हैं पेट

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Mumbai Mosque Langar
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Mumbai Mosque Langar : लंगर में परोसा जाता है शाकाहारी व्यंजन 

Mumbai Mosque Langar : भूखों को खाना खिलाना हिंदु ही नहीं बल्कि हर धर्म में बहुत पुण्य का काम माना जाता है. लेकिन अक्सर हमने इस तरह का काम सिखों को ही करते ज्यादा देखा है.

हालांकि ऐसा नहीं है कि और धर्म के लोगों की राय इनसे भिन्न है मगर लंगर कराने का प्रचलन सबसे ज्यादा सिख धार्मिक स्थलों पर ही होता है.
आपने अक्सर गुरुद्वारे में लोगों को लंगर खिलाते देखा होगा. लेकिन हम आज आपको जिस लंगर के बारे में बता रहे हैं इस लंगर को चलाने वाले लोग गुरुद्वारे के नहीं बल्कि एक मस्जिद के ट्रस्टी हैं.
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दिन की अंतिम नमाज के बाद शुरू होता है लंगर
मुंबई के ग्रांट रोड (ईस्ट) स्थित सुन्नी मुस्लिम मस्जिद में इस सराहनीय पहल की शुरुआत की गई है. यहां रात की नमाज से पहले ही गरीबों का जमावड़ लगने लगता है और उनकी भूख को शांत करने के लिए हर रोज एक तरह का खास लंगर का आयोजन किया जा रहा है.
आध्यात्मिक नेता सैयद मोइन अशरफ कादरी (मोईन मियां) के नेतृत्व में, सुन्नी मुस्लिम छोटा कब्रस्तान ट्रस्ट की तरफ से बिलाल मस्जिद और ईदगाह मैदान दोनों में इस लंगर की शुरूआत की गई है.
बता दें कि अब तक शायद आपने इस तरह के लंगर केवल गुरुद्वारे में ही देखें होंगे जहां सिख सेवादार भोजन पकाते हैं और हजारों-हजार लोग रोज लंगर खाते हैं. लेकिन किसी मस्जिद या मुस्लिम ट्रस्ट में यह अपने आप में पहली और नायाब पहल है.
गौरतलब है कि यह खास तरह का लंगर अब इस मस्जिद की पहचान बन चुका है. इसी महीने शुरू हुई इस पहल का नाम लंगर-ए-रसूल है.
इससे पहले मस्जिदों में सिर्फ नमाज और कुरान पढ़ाई जाती थी, लेकिन अब इस शुरुआत में गरीबों को शाकाहारी खाना खिलाना भी इसका एक हिस्सा बन गया है.
कुरान और सूफी संत से मिली प्रेरणा
ट्रस्टी मोईन मियां बताते हैं कि पाक कुरान में भी गरीबों को खाना खिलाने की बात कही गई है और सूफी संत भी ऐसा करने को कहते रहे हैं.
उन्होंने बताया कि हम चाहते हैं कि बिना किसी धार्मिक भेदभाव के हर गरीब का पेट हमारे इस लंगर से भर सकें.
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि लोगों को परोसा जाने वाला खाना हमेशा शाकाहारी रहता है. मोइन मिंया ने जानकारी दी कि हम अभी करीब 100 लोगों को रोज खाना खिला रहे हैं और 400 लोगों का खाना किचन में बन सकता है.
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भाइचारे को मिल रही मजबूती
रात की नमाज शुरू होने से पहले ही खाना मस्जिद में पहुंचा दिया जाता है और इसके बाद कोई भी जरूरतमंद अपना पेट भर सकता है. मस्जिद में हुई इस शुरुआत की हर कोई तारीफ कर रहा है.
लोगों का मानना है कि यह पहल लोगों को नई सीख दे रही है, लोगों को भाईचारे की अहमियत बता रही है. परेशानी में मदद करने वाले का धर्म नहीं दिल देखा जाना चाहिए.

साभार – टीओई 
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