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Sammaan Foundation : एक बिहारी के आइडिया ने संवारा कई रिक्शा चालकों का जीवन

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Sammaan Foundation : 5 लाख रिक्शाचालकों की कर रहें मदद

Sammaan Foundation : यह बात सच है कि देश के असली हीरो सीमा पर तैनात हमारे सैनिक हैं , लेकिन देश के अंदर रहकर समाज के निम्न और पिछ़डे स्तर के लोगों को सशक्त बनाने वाला व्यक्ति भी किसी हीरो से कम नहीं होता.

बिहार राज्य के रहने वाले इरफान ने जब श्रमिक वर्ग के लिए कुछ अच्छा करना चाहा तो उनके मन में सबसे पहला नाम रिक्शा चालकों का आया.
गर्मी, सर्दी और बरसात हर मौसम में लोगों को अपने रिक्शे पर बैठाकर सड़कों पर खींचते इन लोगों की हालात देखकर इरफान इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इन लोगों के जीवन सुधारने की ठान ली.
उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया कि पूरे भारत में 60 प्रतिशत रिक्शा चलाने वाले लोग बिहार से होते हैं. लेकिन इनमें से 95 प्रतिशत लोगों के पास खुद के रिक्शे तक नहीं होते.
इसी अंतर को खत्म करने के लिए उन्होंने अपनी सी शुरूआत पटना शहर से की.
और आज उनकी मेहनत का ही नतीजा है की वहां के रिक्शा चालकों की जिंदगी में पिछले कुछ समय से बहुत बदलाव आया है.
कौन है इरफान ?
बिहार के बेगुसराय में जन्मे इरफान पांडिचेरी से एमबीए कर चुके हैं और साथ ही उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से मैनेजमेंट डेवलमेंट का प्रोग्राम भी किया हुआ है.
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जिंदगी में कुछ हट कर करने की सोच रखने वाले इरफान ने दिल्ली स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर और आईआईटी कानपुर के छात्रों के सहयोग से एक मॉडर्न साइकिल रिक्शा की खोज की है.
आज आप दिल्ली की सड़कों पर जो हल्के रिक्शे देखते हैं, वो इन्हीं के कंसेप्ट की देन है.

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कैसी बदली रिक्शा चालकों की जिंदगी
इरफान के भीतर हमेशा से ही गरीबों और बेसहारों लोगों के लिए कुछ काम करने का जुनून था. इसी के बल पर उन्होंने 2007 में 300 रिक्शा के साथ ‘सम्मान‘ फाउंडेशन की नींव रखी.
इस संगठन का मुख्य लक्ष्य रिक्शा चालकों व उनके परिवार वालों की जिंदगी में सुधार लाने के क्षेत्र में काम करना है.
आपको बता दें कि संगठन की स्थापना करने के बाद सबसे पहले इरफान ने पुराने रिक्शे को मॉडिफाई कर उसे ऐसा रिक्शा बनाया, जिसे चलाना और उसमें सवारी करना काफी कम्फर्टेबल था.
रिक्शा में सीट बेल्ट, म्यूजिक सिस्टम और फर्स्ट एड रखने की उनकी पहल  धीरे-धीरे लोगों को आकर्षित करने लगी.
 2007 में जब सम्मान फाउंडेशन की इरफान ने नीव रखी तो उस समय रिक्शा की संख्या 300 थी. मगर आज उनके संगठन के तहत पूरे देश में लगभग 500,000 रिक्शा रजिस्टर्ड हैं.
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रिक्शा को बनाना चाहते हैं मल्टियूटिलिटी व्हीकल
इरफान का कंसेप्ट रिक्शा को मल्टियूटिलिटी व्हीकल बनाने का है. उसमें सीट बेल्ट, म्यूजिक, फर्स्ट एड वगैरह की व्यवस्था के साथ रिक्शा एक अनोखा लुक देना चाहते हैं.
इस नए रूप के जरिए रिक्शे वाले कम पूंजी लगा कर इस व्हीकल के सहारे रिचार्ज कूपन, मिनरल वॉटर, सॉफ्ट ड्रिंक, न्यूजपेपर वगैरह भी बेच सकें.
इरफान का यह प्रोजेक्ट बिहार के अलावा दिल्ली-एनसीआर में भी खासा सफल रहा है.
गौरतलब है कि 2010 तक इरफान को कोई नहीं जानता था, लेकिन जब उन्हें अपने इस अद्भुत काम के लिए तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरफ से ‘एंटरप्रेन्योरशिप समिट‘ में आने का निमंत्रण मिला तो पूरे देश को उनके बारे में पता चल गया.
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इरफान की इस कोशिस के लिए उन्हें अब तक कई सारे अवॉर्ड मिल चुके हैं.
जिसमें 2014 में यूएन कर्मवीर अवॉर्ड, 2013 मैसोन फेलो अवॉर्ड, 2011 में फोर्ड इंटरनेशनल फेलो, 2009 TED फेलो, 2008 में बिजनेस बाजीगर और विश्व बैंक से इनोवेशन अवॉर्ड शामिल हैं.
रिक्शा चालकों को दिलाएंगे सस्ता घर 
अब इरफान अपने अगले प्रोजेक्ट के तहत रिक्शा चलाने वालों के लिए सस्ते घर उपलब्ध करवाने के बारे में विचार कर रहे हैं.
उन्होंने इन रिक्शा चलाने वालों के न केवल बैंक में खाते खुलवाए हैं बल्कि 1 लाख तक का दुर्घटना बीमा भी करवाया है.
इरफान ने बिना किसी धर्म , जाति का बेदभाव रखते हुए अपने बिजनेस और समाज सेवा का जो यह तरीका निकाला है यह बहुत सी जिंदगियां बदल रहा है.

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