दिल्ली- जरूरतमंदो के पहचान पत्र बनवाने में सफल रहा इन दो लड़कियों का अभियान

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हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही नागरिकों के लिए तमाम तरह के पहचान पत्र,आधार कार्ड को सभी सरकारी योजनाओं में जोड़ने के लिए अनिवार्य कर दिया है. लेकिन हकीकत यह है कि देश में अभी भी कई लोग ऐसे हैं जिन्हें यह तक नहीं पता की यह पहचान पत्र होता क्या है और बनता कैसे है.
राजधानी दिल्ली के वसंत विहार इलाके के पास कुसुमपुर पहाड़ी मे रह रहे यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल से आए गरीब लोगों का सालों से बसेरा है. ये सभी अपने गृह राज्यों को छोड़कर रोजगार की तलाश में दिल्ली आए थे, और अब कई सालों से यही बसे हुए हैं.
इस बस्ती में रहने वाले लोगों के कुछ समय पहले तक यह नहीं पता था पहचान पत्र होता क्या है और यह क्यों जरुरी है.
अगस्त 2013 में एक स्कूल खोलने की पहल के लिए आई दो लड़कियां सिआ मल्होत्रा ​​और नूर ताकर ने कुसमपुर पहाड़ी में रहने वाले झुग्गी के बच्चों के लिए साप्ताहिक अंग्रेजी कक्षाएं लगानी शुरू की.
मगर धीरे-धीरे बच्चों की स्थिति और मोहल्ले के लोगों से बाते करने के बाद इन दोनों को इस बात का एहसास हो गया कि बच्चों के माता-पिता के पास कोई भी खुद का पहचान पत्र नहीं था. जिसकी वजह से वह अपने ही देश में डरे डरे से रहते हैं .
फिर ऐसे में इन दोनों लड़कियों ने मामले को समझते हुए यहां रहने वाले लोगों को समझाना शुरू किया की पहचान पत्र हमारे लिए कितना जरूरी है, और इससे लाभ क्या हैं.
उसके बाद इन दोनों ने इसी बस्ती से एक स्वंयसेवक एनजीओ की मदद से 12 से ज्यादा पुरूषों और महिलाओं के लिए पहचान पत्र बनवाने में मदद की.
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी गांव से आया रिबेश कामी दक्षिण दिल्ली में फिजियोथेरेपी क्लिनिक में कई सालों से काम कर रहा है. उसने बताया की इतने सालों में कभी भी उसने मतदाता पहचान पत्र बनवाने की कोशिश नहीं की. उसको तो यह भी नहीं पता कि मतदाता पहचान पत्र होता क्या है.
मगर मेरी वोट मैक्स वॉइस (एमएमवीवी) पंजीकरण अभियान के तहत उसने पहली बार अपना कार्ड बनवाकर अपने पसंद के नगर निगम उम्मीदवार को वोट दिया.
एमएमवीवी के संस्थापक सदस्य सिआ मल्होत्रा ने कहा कि पहचान पत्र को बनवाना शुरूआत में इन बस्ती वालों को क्रोध दिलाने जैसा था . लेकिन जब हमने उन्हें अपने अभियान के माध्यम से इसकी उपयोगिता समझाई तो उन्होंने भी इसे गंभीरता से लिया.
उन्होंने कहा कि सरकार ने मतदाता कार्ड या आधार जैसे पहचान करने वाले दस्तावेजों के साथ सभी नीतिगत हस्तक्षेपों को जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया है. लेकिन सरकार कई नागरिकों को यह समझाने में असफल रही कि इसे बनाने की प्रक्रिया क्या है.
उन्होंने कहा कि हमें जब एहसास हुआ कि यहां के लोगों के अंदर अपने पहचान पत्र को बनवाने में कई तरह का संदेह है. तो हमने उन्हें समझाने की कोशिश की उन्हें बताया कि कोई भी सरकारी पहचान पत्र बनवाने की प्रक्रिया जटिल नहीं है.
उन्होंने बताया कि इन बस्ती के लोगों ने अपने मतदान के अधिकार को त्याग दिया था इसलिए यहां कोई भी राजनेताओं ने भी कभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.
वहीं इस अभियान से जुड़ी नूर ताकर ने बताया कि दिल्ली में पिछले 8 सालों से रहने वाले सुंदर यादव को लगता था कि आईडी कार्ड बनवाने में लगने वाले दस्तावेज उसके पास ना होने के कारण उसका बैंक एकाउंट कभी नहीं खुल सकता.
मगर एमएमवीवी पंजीकरण अभियान की मदद से उसका कार्ड बना. और अब वह खुश होकर कहता है कि मेरा भी अब बैंक में खाता होगा और मैं भी एक आधिकारिक नागरिक के रूप में अब अपनी पहचान के साथ रह सकता हूं.

साभार- टाइम्स ऑफ इंडिया