कौन है वो 5 कश्मीरी अलगाववादी नेता जिनकी सुरक्षा सरकार ने ली वापस, जानें

Kashmir Separatist Leaders Security
PC - India Today

Kashmir Separatist Leaders Security : रविवार शाम से हटा ली जाएगी सुरक्षा

Kashmir Separatist Leaders Security : पुलवामा में CRPF जवानों की शहादत का बदला लेने की कड़ी में सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रशासन ने कश्मीर के 5 बड़े अलगाववादी नेताओं को दी जाने वाली सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया है.
इन नामों में मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़, अब्दुल गनी बट, बिलाल लोन, हाशिम क़ुरैशी और शबीर शाह शामिल हैं.
गौरतलब है की जवानों पर हुए हमले के बाद गहमंत्री ने शक्रवार को अपनी श्रीनगर यात्रा के दौरान कहा थी की पाकिस्तान से धन प्राप्त करने वाले लोगों को दी गई सुरक्षा और आईएसआई की सहायता करने वाले लोगों की समीक्षा की जानी चाहिए.
उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फेंस में बताया था की जम्मू-कश्मीर में कुछ ऐसे तत्व हैं जिनके आईएसआई और आतंकवादी संगठनों के साथ संबंध हैं.
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इसी पर विचार करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को एक उच्चस्तरीय बैठक की थी जिसके बाद ये फैसला लिया गया.
बताया जा रहा है की रविवार शाम तक इन अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली जाएगी.
कौन है ये पांचों अलगागववादी नेता
अब्दुल ग़नी बट
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अब्दुल ग़नी बट
अब्दुल गनी जम्मू कश्मीर में एक फारसी का प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत था.
लेकिन फरवरी 1986 में उसके दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में अल्पसंख्यक कश्मीरी पंडितों के मंदिरों और घरों को जलाने के आरोप में दोषी पाए जाने के बाद जेल भेज दिया गया.
जिसके बाद उसे प्रोफेसर के पद से भी बर्खास्त कर दिया गया , 9 महीने जेल में रहने के बाद उसने मुस्लिम संयुक्त मोर्चा (MUF) नामक एक राजनीतिक संगठन की शुरू की थी.
उसके देश विरोधी मंसूबे का पता तब चला जब उसने साल 2000 में The Milli Gazzette को दिए इंटरव्यूह में बताया था कि वो वह व्यक्तिगत रूप से कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बनाना पसंद करेगा.
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हाशिम कुरैशी
श्रीनगर में जन्मे हाशिम एक संपन्न परिवार से आते हैं और उनकी पढ़ाई इस्लामिया स्कूल से हुई है.
हाशिम कुरैशी जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और फिलहाल जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक लिबरेशन पार्टी (JKDLP) के अध्यक्ष भी हैं.
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बता दें की JKDLP वो अलगाववादी संगठन है जो शांतिपूर्ण और राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से कश्मीर मुद्दे का हल निकालना चाहता है.
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मीरवाइज उमर फारूक
श्रीनगर के बर्न हॉल स्कूल से पढ़ाई करने वाले मीरवाइज पेशे से साफ्टवेयर इंजीनीयर बनना चाहते थे लेकिन बन गए एक अलगाववादी नेता.
अभी वो कश्मीर की ‘आजादी’ की मांग करने वाले सबसे बड़े संगठन ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़ी आवामी एक्शन कमिटी के चेयरमैन है.
बता दें की अक्टूबर 2014 में जॉर्डन के ‘रॉयल इस्लामिक स्ट्रेटेजिक स्टडीज सेंटर’ ने मीरवाइज को 500 सबसे प्रभावशाली मुसलमानों की लिस्ट में शामिल किया था.
मीरवाइज ने भारतीय अमेरिकन नागरिक शीबा मसूदी से शादी की है जो की पेशे से एक डॉक्टर भी हैं.
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बिलाल लोन
बिलाल लोन अलगाववादी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के एक मॉड्रेट धड़े के प्रमुख सदस्य हैं.
ये और इनके छोटे भाई सज्जाद जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के सीनियर असोसिएट थे.
इस संगठन की स्थापना अलगाववादी नेता अमानुल्लाह खान ने की थी,सज्जाद की पत्नी आसमा इसी की इकलौती बेटी हैं.
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शब्बीर शाह
शब्बीर शाह जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी (JKDFP) के संस्थापक और अध्यक्ष हैं.
ये संगठन जम्मू और कश्मीर के “आत्मनिर्णय के अधिकार” की मांग करने वाले मुख्य अलगाववादी राजनीतिक संगठनों में से एक है.
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शब्बीर शाह अपने जीवन के 31 साल जेल में बिता चुके हैं,यही वजह है की उसे कश्मीर का नेल्सन मंडेला कहा जाता है.
गौरतलब है की एक आरटीआई में मिले जवाब के मुताबिक इनकी सुरक्षा और सुविधा पर हर साल सरकार 10 करोड़ रुपए खर्च करती है.
ये महंगी महंगी गाड़ियों में घूमते है आलीशान घरों में रहते हैं, यही नहीं इनके बच्चे विदेशों के स्कूल कॉलेजों में पढ़ाई करते हैं.