क्या है PRC ? जिसके चलते हिंसा की आग में झुलस रहा है अरुणाचल प्रदेश

Arunachal Pradesh PRC Protest
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Arunachal Pradesh PRC Protest : लोगों के बढ़ते गुस्से को देखते हुए वापस लिया सरकार ने बिल

Arunachal Pradesh PRC Protest : देश का एक खूबसूरत हिस्सा अरुणाचल प्रदेश इस वक़्त हिंसा की आग में जल रहा है और इसकी वजह बना है स्थायी-निवासी प्रमाण पत्र (PRC).

जी हाँ अरुणाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों से आये लोगों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र देने की सिफ़ारिश का विरोध किया जा रहा है.
इसी सन्दर्भ में प्रदर्शनकारियों ने बंद का आह्वान किया था जिसके दौरान यहाँ हिंसा भड़क गयी थी.
लोगों का गुस्सा इस कदर भड़का की उसने अब हिंसा का रूप ले लिया है जिसमें अबतक दो लोगों की मौत , प्रॉपर्टी का नुकसान, और कुछ लोगों के घायल होने की खबर आ चुकी है.
सिर्फ इतना ही नहीं पता चला है की भीड़ ने राजधानी ईटानगर में उपमुख्यमंत्री चोवना मेन के घर समेत फ़िल्ममेकर और एक्टर सतीश कौशिक के पांच थिएटर भी जला दिए और तो और डिप्टी कमिश्नर का ऑफिस तक तोड़ दिया गया.
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जानिए क्या है स्थानीय- निवासी प्रमाण पत्र
स्थायी निवास प्रमाण-पत्र एक कानूनी दस्तावेज होता है जो उन भारतीय नागरिकों को दिया जाता है जो देश में रहने का कोई प्रमाण प्रस्तुत करते हैं.
कई सरकारी सुविधाओं को इस्तेमाल करने और दूसरे जरूरी कामों में इस प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ती है.
ऐसे में राज्य सरकार ने 6 गैर-अरुणाचल प्रदेश अनुसूचित जनजातियां (APST) समुदायों को स्थायी निवास प्रमाण-पत्र देने का प्रस्ताव रखा था.
ये छह समुदाय नामसाई और चांगलांग जिलों में रहते हैं इनमें देवरिस, सोनोवाल कछारी, मोरान, आदिवासी और मिशिंग शामिल हैं.
इनके अलावा विजयनगर में रहने वाले गोरखा भी इस प्रस्ताव में शामिल हैं इनमें से ज्यादातर समुदाय पड़ोसी राज्य असम में अनुसूचित जनजाति के रूप में दर्ज हैं.
क्यों उठा है इस मुद्दे पर बवाल?
सरकार के इस फैसले के बाद से ही अरुणाचल प्रदेश के कई समुदायों के संगठन इस फैसले के खिलाफ खड़े राजार आ रहे हैं.
इसका एक मुख्य कारण यह है कि स्थानीय लोगों को ऐसा लगता है कि अगर इन लोगों को स्थायी निवास प्रमाण-पत्र मिल जाता है तो इससे उनके अधिकारों और हितों के साथ समझौता होगा.
इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू का कहना है कि, “हमने इस मामले पर जांच के आदेश दे दिए हैं. स्थायी निवास प्रमाण-पत्र पर सरकार का रुख एकदम साफ़ है लेकिन फिर भी हिंसा की घटनाएं हो रही हैं.
आयुक्त स्तर की एक जांच समिती बनाई गयी है हमें ऐसा लगता है कि जनता के सामने सच आना बेहद जरूरी है.
उन्होंने कहा की हमें महसूस हो रहा है कि इन घटनाओं के पीछे किसी का हाथ है क्योंकि अरुणाचल प्रदेश एक शांतिपूर्व राज्य है.”
बता दें कि शनिवार को प्रशासन ने ईटानगर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू भी लागू कर दिया है. ऐसे में राज्य में हिंसा ना बढ़े इसके लिए सेना ने ईटानगर और नहरगांव में फ्लैग मार्च भी निकाला है.
केंद्र सरकार ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन की मदद करने के लिए राज्य में 1,000 अर्धसैनिक बलों को भी भेजा है.
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सरकार ने बिल लिया वापस
अभी मिली ताजा जानकारी के मुताबिक पीआरसी को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ये बिल वापस ले लिया है.
इसके अलावा उन्होंने ये भी साफ किया है की उनकी सरकार भविष्य में भी कभी इस मुद्दे को नहीं उठाएगी.
मुख्यमंत्री ने कहा की पीआरसी का मुद्दा बंद हो चुका है इसलिए वो लोगों से अपील करते हैं की वो धरना प्रदर्शनना करें.