बच्चियों को हैवानियत से बचाने के लिए तेजी से बढ़ रहा है “ब्रेस्ट आइरोनिंग”, जानिए क्या है ये शर्मनाक प्रथा

Breast Ironing Of Daughters

Breast Ironing Of Daughters : यूके जैसे विकसित देश में दर्जनों की संख्या में अपनाई जा रही ये प्रथा

Breast Ironing Of Daughters : मानव किस हद तक गिर सकता है ? इसका जवाब ढूँढने चलेंगे तो शायद ज़िदंगी निकल जायेगी लेकिन सही जवाब नहीं मिलेगा, क्योंकि आज का इंसान हर तरह के नीचपन की हद पार कर चुका है।

इसमें सबसे ज्यादा महिलाओं से रेप उनके यौन शोषण और मारपीट के मामले तेज़ी स बढ़ रहे हैं.
सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में महिलाओं के साथ ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिससे वह असुरक्षित महसूस करने लगी हैं,कानून से लेकर सभी तरह की हेल्पिंग सोसाइटी इसको रोकने में विफल हैं.
बचने के लिए लड़कियां करा रही हैं ब्रेस्ट इरोनिंग
यहां दो सवाल हैं …
1. ब्रेस्ट इरोनिंग क्या है ?
2. इसके माध्मय से कैसे बचेंगी लड़कियां ?
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सबसे पहले जानिए क्या है ब्रेस्ट इरोनिंग
आसान भाषा में कहें ब्रेस्ट आयरनिंग में छोटी बच्चियों के ब्रेस्ट यानी छाती पर गर्म पत्थर रखा जाता है, ताकि उनके ब्रेस्ट के निर्माण को रोका जा सके.
ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि लड़कियों को पुरुषों की बुरी नजर, यौन शोषण और दुष्कर्म से बचाया जा सके.बता दें की यह बातें एक रिपोर्ट में कही गई है.
क्या यही है बचाव का तरीका ?
नहीं, बिल्कुल भी नहीं… यह ब्रेस्ट इरोनिंग सुनने में जितनी आसान है उतनी है नहीं. एक माँ के लिए अपनी वयस्क होती बच्ची के स्तनों पर गर्म पत्थर रखना कितना दर्दनाक होगा सोचकर ही रूह कांपती है लेकिन वो माँ भी क्या करे ?
पुरुषों की गिद्ध सी निगाहों से बचने के लिए इन्होंने अपनी बेटियों के साथ ऐसा करना पड़ता है और यह प्रथा के नाम पर होता है.
Breast Ironing Of Daughters
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यूएन ने ठहराया इसको गैरकानूनी
वही यूएन जहां खुद महिलाएं सुरक्षित नहीं है, उसने इस प्रथा को हिंसक की केटेगरी में रखा हुआ है यूएन अपनीं जगह ठीक है यह गलत भी है और इसको उस केटेगरी में रखा गया है जिसमें पुलिस को सूचित नहीं किया जाता.
ब्रेस्ट इरोनिंग को लेकर क्या कहती हैं समाजिक कार्यकर्ताएं
एक अखबार में छपी खबर के अनुसार एक कार्यकर्ता का कहना है कि वह ऐसे 15-20 फीसदी मामलों के बारे में जानती है, जो साउथ लंदन टाउन क्रोयडोन के हैं.
उसने बताया कि इसमें माताएं, आंटी या दादी एक पत्थर का इस्तेमाल करती हैं और ब्रेस्ट वाले हिस्से पर लगाती हैं.
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ऐसा वह कई बार करती हैं ताकि टिशू को तोड़ा जा सके, जिससे ब्रेस्ट की ग्रोथ कम हो जाए.
उसने कहा, “कभी-कभी वो इसे हफ्ते में एक बार करती हैं, और कई बार हफ्ते में दो बार भी, यह उनके खुद के निर्णय पर आधारित होता है” 
पहले यह प्रथा केवल अफ्रीका में थी लेकिन अब तेज़ी से ब्रिटेन में भी फैल रही है और सरकार इसको रोकने के लिए कागजी स्तर पर काफी काम कर रही है.