पार्षद से सांसद बने कांग्रेस के सज्जन कुमार,कैसे बन गए आरोपी ?

Congress Leader Sajjan Kumar

Congress Leader Sajjan Kumar : कोर्ट ने 31 तारीख तक आत्मसमर्पण करने को कहा है.

Congress Leader Sajjan Kumar : कांग्रेस अभी तीन राज्यों की जीत का जश्न मना ही रही थी कि इसी बीच उनके तीन दशकों पुराने एक खिलाड़ी को दिल्ली कोर्ट ने दोषी करार दिया.  

दरअसल, 1984 के सिख दंगों में शामिल काँग्रेसी नेता सज्जन कुमार को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है,कोर्ट ने सज्जन कुमार को उम्र कैद की सज़ा सुनते हुए उन्हें 31 तारीख तक आत्मसमर्पण करने को कहा है.
कोर्ट ने सज्जन कुमार को दिल्ली के कैंट इलाके में आपराधिक षडयंत्र रचने, हिंसा कराने और दंगा भड़काने का दोषी पाया गया है.
निचली अदालत ने किया था बरी 
ज्ञात हो सज्जन कुमार का नाम 1984 के सिख दंगों के मुख्य आरोपी में शामिल है, निचली अदालत में चश्मदीद ने कहा था कि सज्जन ने ही इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हिंसा को भड़काया था.
लेकिन इसके बाद भी अपनी राजनीतिक हैसियत के चलते सज्जन और कुछ बड़े नेताओं को कोर्ट ने बरी कर  दिया था. 
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इसके बाद साल 2012 में सीबीआई ने दिल्ली कोर्ट में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 5 सिख लोगों की हत्या का आरोपी बताया था जो 1984 के दंगों में मरे थे.
यही नहीं सीबीआई ने सज्जन के साथ 5 अन्य लोगों का भी नाम उजागर किया था.  
पार्षद से बने सांसद , सज्जन कुमार ने ऐसे की थी राजनीति में शुरुआत 
23 सितम्बर 1945 में जन्में सज्जन कुमार ने सबसे पहले 1970 में संजय गांधी से संपर्क साधा , इसके बाद वह दिल्ली  नगरनिगम का चुनाव लड़े और बतौर पार्षद 1977 में जीत गए.
इसके बाद राजनीति में उनका कद बढ़ता चला गया और मात्र 35 साल की उम्र में उन्हें दिल्ली का सांसद बनने का मौका मिला .
फिर तो उनका राजनीतिक करियर ऐसा चमक कि आज भी उनके नाम दो रिकॉर्ड हैं जिसे अब तक कोई नहीं तोड़ पाया. 
1 लोकसभा में सबसे अधिक मत पाने का रिकॉर्ड,उन्हें आठ लाख से अधिक मत मिले थे
2  दिल्ली में सबसे ज़्यादा वोटों के साथ जीत हासिल करने का रिकॉर्ड 
बता दें सज्जन कुमार पर दिल्ली में कई मामले दर्ज हैं और सीबीआई भी सज्जन पर केस दाखिल कर चुकी है.  
Congress Leader Sajjan Kumar
जानिए क्या था मामला 
इंदिरा गांधी की हत्या के ठीक बाद पूरे देश में दंगे फैल चुके थे, लोग सिखों को चुनचुनकर मार रहे थे.
इन दंगों में 3325 लोग मारे गए थे जिनमें से अकेले  2733 तो सिर्फ दिल्ली में मारे गए थे. जबकि बाकी हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मारे गए थे.
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इन दंगों के दौरान दिल्ली के कैंट एरिया में पांच सिखों की हत्या की गई, इस हमले में जगदीश सिंह बच गए क्योंकि उनके बाल कटे हुए थे. 
जगदीश की शिकायत पर ही 2005 में कोर्ट ने सज्जन समेत कुछ और आरोपियों पर मुक़दमा चलाया था  लेकिन इसमें सज्जन बच गए.
फिर सीबीआई ने 2013 में सज्जन के खिलाफ आरोपपत्र दिया जिसको लेकर अब फैसला आया है.
क्या कहा कोर्ट ने
सिख विरोधी दंगों को लेकर आरोपियों को फैसला सुनातेहुए कोर्ट ने कहा कि 1947 में बंटवारे के दौरान कई लोगों की हत्याएं हुई थी. 37 साल बाद दिल्ली ने एक बार फिर वैसी ही त्रासदी देखी थी.
कोर्ट ने कहा कि त्तकालिन प्रधानमंत्री की हत्या के परिणाम में हुआ ये नरसंहार पूरी तरह से अविश्वनिय था.