पुलवामा आतंकी हमला: आखिर भारत पाकिस्तान से सिंधु-जल संधि क्यों नहीं तोड़ रहा है?

Pulwama Terror Attack Action
demo pic

Pulwama Terror Attack Action : 1960 से बरकरार है ये संधि,चाहे हालात कैसे भी हो

Pulwama Terror Attack Action : पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए देश के प्रधानमंत्री ने कई ऐसे दावे और वादे किये हैं जिन्हें सुनकर लगता है कि पाकिस्तान से दोस्ती के अंत का आगाज़ हो चुका है.

देश की सुरक्षा में अपनी जान न्यौछावर कर चुके इन वीर जवानों की शहादत पर पीएम मोदी ने कड़े शब्दों में पाकिस्तान की आलोचना की और कहा है कि,
“मैं आतंकी संगठनों को और उनके सरपरस्तों को कहना चाहता हूं कि वो बहुत बड़ी गलती कर गए हैं. मैं देश को भरोसा देता हूं कि हमले के पीछे जो ताकतेे हैं, इस हमले के जो भी गुनहगार हैं, उन्हें उनके किए की सज़ा अवश्य मिलेगी”
पीएम मोदी के इस संबोधन के बाद देशवासियों में इस बात से थोड़ा आश्वासन तो ज़रूर आया है कि अब पाकिस्तान को उसकी इस कायराना हरकत का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा.
लेकिन यहाँ एक बात जो रह-रहकर हम सभी के ज़हन में उठती है वो ये कि पाकिस्तान को सबक सिखाना ही है तो इसकी शुरुआत सिन्धु-जल संधि को ख़त्म कर के ही क्यों नहीं कर दी जाती है?
पढ़ें – पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को सरकारी दस्तावेजों में नहीं कहा जायेगा ‘शहीद’, जानिए वजह
आखिर जब पाकिस्तान हमारे दोस्ती के बढ़ाये हाथ को काटता जा रहा है तो हम क्यों नहीं कुछ कड़े कदम उठा रहे हैं?
Pulwama CRPF Terrorist Attack News
सिन्धु-जल संधि करार खत्म करने के मुद्दे पर बीबीसी ने जब अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में विदेश सचिव रहे कंवल सिब्बल से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि, “मुझको ऐसा लगता है कि पाकिस्तान को लेकर भारत को जो सख़्त क़दम उठाने चाहिए हम वो नहीं कर पा रहा है.”
कंवल सिब्बल मानते हैं कि, “पाकिस्तान को उसकी औकात दिखने के लिए भारत के पास एक बहुत ही असरदार विकल्प है और वो है सिंधु जल संधि को तोड़ना, लेकिन लोगों की समझ में ये नहीं आ रहा है कि आखिर सरकार क्यों पाकिस्तान से इस करार को नहीं तोड़ रही है? यूँ तो इस संधि को तत्काल ही ख़त्म कर देना चाहिए. यकीन मानिये अगर ऐसा हो जाता है तो पाकिस्तान सीधा हो जाएगा.”
कंवल सिब्बल कहते हैं कि, “जैसे कहा जाता है ना कि पाकिस्तानी आतंकवाद का भारत के पास कोई जवाब नहीं है वैसे ही पाकिस्तान के पास सिंधु जल संधि तोड़ने का कोई जवाब नहीं है.”
अमेरिका से लेनी चाहिए सीख
यहाँ भारत को ये समझने की ज़रूरत है कि कैसे सत्ता में आने के बाद अमेरिका ने भी ऐसी कई संधियाँ तोड़ी हैं.
सिर्फ इतना ही नहीं अमेरिका ने ये संधियाँ अपने कुछ ख़ास दोस्त देशों से तोड़ी है जैसे कनाडा और जापान. 
अमेरिका जलवायु संधि से निकल गया, ईरान से परमाणु समझौते को रद्द कर दिया. हमें तो फिर भी पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश से संधि तोड़नी है.
कंवल सिब्बल कहते हैं, “मौजूदा हालात देखते हुए तो ऐसा ही लगता है कि भारत के लिए डिप्लोमैटिक विकल्प ही काफ़ी साबित नहीं होंगे. हाँ लेकिन हमें इसका भी सहारा लेना ज़रूर चाहिए.
गौरतलब है की दोनो देशों के बीच दो युद्धों और एक सीमित युद्ध कारगिल और हज़ारों दिक्क़तों के बावजूद सिंधु जल समझौता आजतक बरकार है.
हालाँकि इससे पहले भी कई बार विरोध हुआ तो सिन्धु करार तोड़ने की बातें तो उठीं लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं.
अब एक बार फिर पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देश के 44 जवानों के शहीद होने के बाद कयास लग रहे हैं कि भारत सिंधु जल समझौता तोड़ सकता है.
Pulwama Terror Attack Revenge
जान लीजिये क्या है सिन्धु-जल संधि 
1960 के सितंबर महीने में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. पंडित जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के सैनिक शासक फील्ड मार्शल अयूब खान के बीच यह जल संधि हुई थी.
इस करार के अनुसार, भारत को जम्मू कश्मीर में बहने वाले तीन नदियों- सिंध, झेलम और चिनाब के पानी को रोकने का अधिकार नहीं है.
यानी कि यहाँ ये कहना गलत नहीं होगा कि इस संधि के बाद भारत ने राज्य के लोगों के भविष्य को पाकिस्तान के पास गिरवी रख दिया था.
इस करार के बाद इन तीनों नदियों का पानी अधिक मात्रा में राज्य के लोग ही इस्तेमाल नहीं कर सकते.
सिर्फ इतना ही नहीं इन तीनों नदियों पर बनाए जाने वाले बांधों के लिए पहले पाकिस्तान की अनुमति लेनी पड़ती है.
असल में जनता का ही नहीं, बल्कि अब तो नेताओं का भी मानना है कि इस जलसंधि ने जम्मू कश्मीर के लोगों को परेशानियों के सिवाय कुछ नहीं दिया है.
ऐसे में इस संधि को अगर भारत खत्म कर देता है तो ये पाकिस्तान पर एक ‘परमाणु बम‘ गिराने के समान होगा.
क्योंकि लाज़मी है जल संधि तोड़ दी जाती है तो भारत से बहने वाली नदियों के पानी को पाकिस्तान की ओर जाने से रोका जा सकता है.
शायद तब पाकिस्तान को अक्ल आये कि आतंकवाद से अपने नापाक मंसूबे बेशक पूरे किये जा सकते हैं लेकिन भूख-प्यास नहीं मिटाई जा सकती.
पढ़ेंभारत ने पाकिस्तान से वापस लिया ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा, जानें इसका क्या पड़ेगा असर
वापस लिया मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा
सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने ये फैसला लिया है की अब से पाकिस्तान से ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) का दर्ज छीन लिया जाएगा.
बता दें की इसका दर्जा विश्‍व व्‍यापार संगठन और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों के आधार पर दिया जाता है.
मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा मिल जाने पर दर्जा प्राप्त देश को इस बात का आश्वासन रहता है कि उसे कारोबार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा.