क्या है सभी को न्यूनतम आय देने का वायदा,किसे मिलेगा फायदा

New Rules From 1st April 2019
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Universal Basic Income : कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही सरकारे कर रही यूबीआई लागू करने का वायदा

Universal Basic Income : जैसे जैसे लोकसभा के चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं वैसे वैसे हमारे नेताओं के मुंह से जनता को लुभाने वाले वायदे भी बाहर निकलकर आने लगे हैं.

ऐसा ही एक नया वायदा आपने सुना होगा UBI यानी की यूनीवर्सल बेसिक इनकम योजना का.
अभी हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया है की अगर 2019 में उनकी सरकार सत्ता में आई तो वो गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले सभी नागरिकों को एक एक न्यूनतम आय देंगे.
सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं बल्की ऐसी आशंका जताई जा रही है की इस बार के पेश होने वाले बजट में केंद्र की मोदी सरकार भी इस UBI योजना को लागू करना का प्रावधान ला सकती है.
बता दें की केन्द्र सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में पहली बार यूबीआई का जिक्र करते हुए कहा कि देश में गरीबी उन्मूलन की दिशा में यूबीआई अहम भूमिका अदा कर सकता है.
अब इससे ये बात तो साफ हो गई की दोनों ही राजनीतिक पार्टियां गरीबों को न्यूनतम आय देकर उनके वोटों को अपने पाले में करने की कोशिश में हैं.
खैर बात जो भी हो मगर आप सबके लिए ये जानना जरूरी हो की आखिर ये यूबीआई है क्या और क्या वाकई इसके लागू हो जाने के बाद गरीबों का कल्याण हो सकता है.

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क्या है UBI ?
दरअसल यूबीआई एक निश्चित तरह की आय है जो देश के सभी नागरिकों जिसमेंं गरीब, अमीर नौकरीपेशा,बेराजगार या बिजनेसमेन सभी को सरकार की तरफ से एक निश्चित आर्थिक मदद दी जाती है.
खास बात यह है की इस आय के लिए व्यक्ति को किसी तरह के कोई काम अथवा शारीरिक या शैक्षणिक पात्रता की जरूरत नहीं होती.
इस योजना के तहत सरकार ये सुनिश्चित करती है की समाज के प्रत्येक सदस्य को जीवन-यापन के लिए न्यूनतम आय का प्रावधान होना चाहिए.
क्यों जरूरी है यूबीआई
जैसा की आप सभी जानते हैं की दुनिया भर में अमीर गरीके के बीच गहरी होती खाई और युवाओं में बेरोजगारी कितनी तेजी से बढ़ रही है.
इससे निपटने के लिए कुछ जानकारों का मानना है की यदि ऐसी स्थिति में सरकार अर्थव्यवस्था को सहारा देनी के लिए यूबीआई जेसी स्कीमों को शुरू नहीं करती है तो आने वाले समय में ये देश के अंदर एक आर्तिक भूचाल खड़ा सकता है.
गौरतलब है की यूबीआई भारत या फिर अन्य देशों के लिए कोई नया शब्द नहीं है.
बीते कुछ वर्षों के दौरान पूरी दुनिया में आय के पुनर्वितरण के लिए इस योजना पर पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है.हालांकि बतौर योजना इसे अभी किसी देश ने लागू नहीं किया है.
भारत में चला पायलट प्रोजेक्ट हुआ कामयाब
NBT की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में यूबीआई को लेकर चला पायलट प्रोजेक्ट सफल हुआ है.
दरअसल मध्य प्रदेश की एक पंचायत में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर इसी तरह की स्कीम को लागू किया गया था जिसके बाद वहां सकारात्मक नतीजे सामने आई हैं.
बता दें की इंदौर के 8 गांवों की 6,000 की आबादी के बीच 2010 से 2016 के बीच इस स्कीम का प्रयोग किया गया.
इसमें पुरुषों और महिलाओं को 500 और बच्चों को हर महीने 150 रुपये दिए गए. फिर देखा गया की इन 5 सालों में इनमें अधिकतर ने इस स्कीम का लाभ मिलने के बाद अपनी आय बढ़ा ली .
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क्या है चुनौतिंयां
अगर सिर्फ गरीबों के लिए ही ये सोजना शुरू की जाती हो तो सुरेश तेंदुलकर फ़ॉर्मूले से 7,620 रुपये प्रति वर्ष दी जाने वाली आय सरकार को तय करना पड़ेगा.
वहीं एक सर्वे के मुताबिक अकेले इस दर पर यूबीआई देने से देश की जीडीपी का 4.9 फीसदी खर्च सरकारी खजाने पर पड़ेगा.
इस बारे में इंडिया रेटिंग्स के डी के पंत ने अपनी राय रखते हुए बताया की यह कॉन्सेप्ट अच्छा दिखता है, लेकिन वास्तविक लाभार्थी की पहचान करना किसी के लिए भी बड़ी चुनौती है.
आधार हर शख्स की पहचान को स्थापित करता है, लेकिन यह लोगों का वर्गीकरण नहीं करता. लिहाजा, अगर लाभार्थी की बेहतर तरीके से पहचान की जाती है तो यूबीआई आगे बढ़ने योग्य कदम है.