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ऐसे कैसे यूपी और बिहार मे मुरझा गया कमल, जानिए उपचुनाव के नतीजों का पूरा राजनीतिक विश्लेषण

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By Poll Election Results 2018

By Poll Election Results 2018 : अमित शाह करेंगे हार का विश्लेषण

By Poll Election Results 2018 : यूपी-बिहार उपचुनाव के नतीजों ने बीजेपी के विजय यात्रा में रूकावट ला दी है. इस चुनाव में बुआ भतीजे की जोड़ी और लालू के लाल की राजनीतिक तिगड़ी ने मोदी लहर को एक बड़ी चुनौती देने का काम किया है.

वहीं दूसरी तरफ इस नतीजों ने तमाम अन्य विपक्षी दलों का हौसला बढ़ाने का काम भी किया है जिसका सीधा असर 2019 के चुनाव पर पड़ सकता है.
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अति-आत्मविश्वास को माना हार की वजह
गोरखपूर को सीएम योगी का गढ़ कहा जाता है पिछले 29 सालों से यह सीट बीजेपी के पास रही है ऐसे में यह हार पार्टी के लिए एक बड़े झटके के सामान है.
बता दें कि गोरखपुर में फाइनल रिजल्ट आने के पहले ही सीएम योगी ने हार स्वीकार कर ली थी. उन्होंने इस हार की वजह अति-आत्मविश्वास को बताया है.
हालांकि पार्टी की हार पर सीएम योगी और डिप्टी सीएम यह कहते हुए सामने आए कि हमारे वोटर घर से नहीं निकले क्योंकि उन्हें लगा कि बीजेपी जीत ही जाएगी.
बता दें कि 11 मार्च को गोरखपुर सीट पर 54.65 प्रतिशत और फूलपूर में 50.16 फीसदी मतदान हुए थे. इसके अलावा बिहार में भी इस बार संसदीय और विधानसभा सीटों पर कम वोटिंग हुई.
मगर सच तो यह है कि बसपा-सपा का साथ बीजेपी के लिए एक बड़ा खतरा बनकर सामने आया है.
अमित शाह हार का करेंगे विश्लेषण
यूपी उपचुनाव में हार के बाद अभी तक बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं मिली है. ऐसा लगता है राजनीति के चाणक्य कहे जाने पार्टी के हार के विश्लेषण में लगे हैं.
एक तरफ जहां नार्थ इस्ट के परफॉर्मेंस ने पार्टी का मनोबल बढ़ाया था, वहीं यूपी-बिहार के उपचुनाव ने उस मनोबल को तोड़ दिया है. वहीं अब देखना है कि अमित शाह का अगला दांव क्या होगा.
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सिर्फ मोदी-योगी से नहीं मिलेगी 2019 की जीत
यूपी-बिहार के उपचुनाव से ये बात सामने आ गई है कि 2019 की जीत सिर्फ मोदी-योगी के बलबुते नहीं मिलने वाली है क्षेत्रिय पार्टियां भी चुनाव में अहम रोल निभा सकती हैं.
बीजेपी के प्रति मतदाताओं की उदासीनता पार्टी के रणनीतिकारों के लिए चिंता की वजह तो होगी, लेकिन खुले तौर पर वे इसे कबूल करने की बजाय अपनी हार की वजह सपा-बसपा का गठबंधन और सौदेबाजी को बता रहे हैं.
इसमें कोई शक नहीं कि सपा-बसपा के साथ आने से गैर बीजेपी वोटों का एक मजबूत ध्रुव बन गया, लेकिन सपा के लिए इस जीत की धुरी वोटिंग कम होने की वजह को भी माना जा सकता है.
खैर अब देखना यह है कि सपा-बसपा का गठबंधन अनौपचारिक से औपचारिक कब होता है.