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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने में जुटा विपक्ष, जानें क्या है इसकी पूरी प्रक्रिया

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Impeachment Against CJI : पहले भी कई जजों के खिलाफ आ चुका महाभियोग

Impeachment Against CJI : संसद में विपक्ष की भूमिका निभा रही राजनीतिक पार्टियां एक बार फिर देश में नए मुद्दे को हवा देने में लग गई है.

दरअसल मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रश्ताव लाने के बाद अब विपक्ष में कांग्रेस पार्टी देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी में है. बता दें कि इस कार्रवाई में छोटे-छोटे विपक्षी दल भी एक जुट हो गए हैं.
महाभियोग के पीछे क्या है कांग्रेस की मंशा
दरअसल, कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जस्टिस जस्टिस जे चेलमेशवार, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ मीडिया के सामने आए थे.
इन चार जजों ने भारत के इतिहास में पहली बार मीडिया के सामने आकर देश की न्यायव्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कोर्ट को व्यक्ति विशेष द्वारा चलाने की बात कही थी.
असल में ये चारों सीजेआई दीपक मिश्रा की प्रशासनिक कार्यशैली से खफा थे जिसके बाद से कांग्रेस लगातार न्यायपालिका में संकट की बात कह रही है.
कांग्रेस का कहना है कि चारों जस्टिस के आरोप सही हैं इसलिए वो इनके खिलाफ महाभियोग की लाने की कोशिश में जुटी है. हालांकि कांग्रेस ने आधकारिक तौर पर इसका खंडन किया है.
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क्या है महाभियोग 
भारत के संविधान में कुछ अधिकारिक पदों को विशेष अधिकार मिलें हैं इन पदों पर बैठे अधिकारियों को आसानी से नहीं हटाया जा सकता. इसलिए उन्हें किसी कारण वश हटाने के लिए सदन में महाभियोग लाया जाता है.
दरअसल, महाभियोग एक न्यायिककल्प प्रक्रिया है जो संसद में कुछ विशेष पदों पर आसीन व्यक्तियों के खिलाफ संविधान के उल्लंघन का आरोप लगने पर चलाई जाती है. इन पदों में राष्ट्रपति, सुप्रीमकोर्ट व हाईकोर्ट के न्यायाधीश आदि शामिल रहते हैं.
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ भी महाभियोग लाने की कवायद की जा रही है. इसके लिए लोकसभा में 100 सांसदों के और राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी.
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद से मंगलवार को मुलाकात करके मुद्दे पर चर्चा की है. हालांकि आजाद के कार्यालय से इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी की ऐसी कोई बैठक वहां हुई थी या नहीं.
विपक्षी पार्टियों ने कर दिए हैं हस्ताक्षर
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को हटाने के लिए विपक्षी पार्टियां एकजुट हो गई हैं, यहां तक की महाभियोग की प्रक्रिया के ड्राफ्ट प्रपोजल पर कई विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं.
इस हारे नें एनसीपी महासचिव ने कहा कि एनसीपी, लेफ्ट पार्टी और मुझे लगता है कि टीएमसी व कांग्रेस ने भी इसपर साइन किया है.
वहीं ममता और प्रशांत भूषण के बीच महाभियोग की प्रक्रिया को भी लेकर बात हुई थी और अब देखना यह है कि इस मुद्दे पर सरकार कौन सा रूख इख्तियार करती है.
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पहले भी कई जजों पर चल चुका है महाभियोग
ये पहली बार नहीं है जब किसी जज पर महाभियोग लाया जा रहा है इससे पहले भी कई जजों पर ऐसी कार्रवाई हो चुकी है. साल 2011 में राज्यसभा ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सौमित्र सेन को एक न्यायाधीश के तौर पर वित्तीय गड़बड़ी करने और तथ्यों की गलत बयानी करने का दोषी पाया था. जिसके बाद उनपर महाभियोग लगाया गया.
इसी तरह सिक्किम उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पी डी दिनाकरण पर भी महाभियोग लगाया गया और उन्होंने भी पहले ही इस्तीफा दे दिया.