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आखिर कौन हैं ये लेनिन, जिनकी मूर्ति गिराना पेरियार, श्यामा प्रसाद और अंबेडकर को भी पड़ा भारी

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Lenin Statue Broken
Pic Courtsey - Ht

Lenin Statue Broken : देश भर में शुरू हुआ राजनेताओं की मूर्ति तोड़ने का सिलसिला

Lenin Statue Broken : नार्थ ईस्ट में कमल के उदय होने के तुरंत बाद से पुराने नेताओं या आदर्शों की मूर्ति क्षतिग्रस्त करने का सिलसिला अब पूरे देश में फैलता जा रहा है.

इन घटनाओं के पीछे की शुरूआत त्रिपुरा में 25 साल के बाद हुए सत्ता परिवर्तन को माना जा रहा है. क्योंकि त्रिपुरा में ही सबसे पहले मार्क्सवादी नेता लेनिन की मूर्ति के साथ कुछ अराजक तत्व द्वारा छेड़छाड़ की गई थी.
हालांकि बीजेपी समेत माकपा के कई नेताओं ने जनता से अपील इस हिंसा को शांत करने के लिए अपील भी की है. लेकिन शायद ऐसा करने वालों पर इसका कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है.
क्या है पूरा मामला
त्रिपुरा में पिछले 25 सालों से लेफ्ट की सरकार थी औऱ ये सभी जानते हैं कि लेफ्ट पार्टी लेनिन के विचारों को मानती है. या यूं कहें कि रूसी समाजवादी क्रांति के अगुवा लेनिन को लेफ्ट पार्टी किसी भगवान से कम नहीं समझते.
लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद मंगलवार को लेनिन के 11.5 फीट ऊंची फाइबर की मूर्ति को कथित बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर से गिरवा दिया और भारत माता की जय के नारे लगाने लगे. जिसके बाद से वहां दो दलों के बीच हिंसा भड़क गई.
गौरतलब है कि इस मूर्ति को अगरतला से 90 किलोमीटर दूर दक्षिण त्रिपुरा के जिला मुख्यालय बेलोनिया में एक वर्ष पहले लगाया गया था.
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जानें आखिरकार कौन है ये लेनिन
व्लादिमीर लेनिन मार्क्सवादी विचारधारा के जनक थे इन्होंने ही 1917 में रूस की क्रांति की बागडोर संभाली थी. लेनिन का जन्म 1870 में रूस में हुआ था 1889 में उन्होंने मार्क्सवादियों का संगठन बनाया और उसके नेता बने गए.
फिर उन्होंने वहां साम्यवादी शासन के लिए आंदोलन चलाया और उसी दौरान 54 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई
लेकिन मौत के बाद भी लेनिन का अंतिम संस्कार नहीं किया गया. उनके शव को रूस में संरक्षित किया गया ताकि आने वाली पीढ़ियों को उनसे प्रेरणा मिल सके.
लेनिन को कम्युनिस्टों का एक तबका अपना आदर्श मानता है. देश में जहां भी कम्युनिस्टों की सरकार रही वहां लेनिन के विचारों को प्रचारित और प्रसारित किया गया.
त्रिपुरा भी उन्में से एक ऐसा ही प्रदेश है जहां मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानि की लेफ्ट के सत्ता में रहने से वहां जगह जगह उनके विचारों और मूर्तियों को स्थापित किया गया.
हिंसा रूकने का नाम नहीं ले रही
त्रिपुरा में अब भी हिंसा रूकने का नाम नहीं ले रही है. जिला प्रशासन ने कई जिलों में निषेधात्मक आदेश दिए हैं और हिंसा को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 48 घंटों में माकपा के कार्यकर्ताओं द्वारा बीजेपी के कार्यकर्ताओं पर 49 हमले की घटनाएं सामने आई हुई हैं, जिसमें 17 कार्यकर्ता घायल हुए हैं.
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले की निंदा करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह से पूरी रिपोर्ट मांगी है.
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अन्य प्रदेशों में भी मूर्ति गिराने के मामले आए सामने
त्रिपुरा में लेनिन के मूर्ति गिराने के बाद तमिलनाडु में द्रविड़ चिंतक पेरियार की मुर्ति तोड़ने का मामला भी
सामने आया है. इसके साथ ही कोलकाता में जनसंध संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति भी तोड़ दी गई है.
वहीं एक और ताजा मामला यूपी से सामने आया है जहां मेरठ जिले के मवाना में डॉ भीमराव अंबेडकर की मूर्ति तोड़ी गई है. हालांकि अभी तक किसी भी जगह मूर्ति तोड़ने वालों का पता नहीं चल पाया है.
वहीं राजनीति जगत में अब मूर्ति को लेकर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है, खैर अब देखना यह होगा कि मूर्ति पर चल रही राजनीति किस ओर अपनी दिशा बनाएगी.