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सपा के नरेश और राजस्थान में किरोड़ी लाल को पार्टी का गमछा ओढ़ाने वाली बीजेपी के जानिए क्या है राजनीतिक समीकरण

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Naresh Agarwal, Kirodi Meena Join Bjp

Naresh Agarwal, Kirodi Meena Join Bjp : बीजेपी ने चुनावी समीकरण साधते हुए एक नया दांव खेल डाला.

Naresh Agarwal, Kirodi Meena Join Bjp : 2019 के आम चुनाव में अपने अच्छे प्रदर्शन को लेकर सभी पार्टियां कमर कस चुकी है. बीजेपी भी 2014 में मिली जीत को बरकरार रखने के लिए हर मोर्चे पर आगे रहना चाहती है.

पार्टी में अमित शाह के कुशल नेतृत्व और और प्नधामंत्री मोदी की लोकप्रियता के परिणामस्वरुप लगभग पूरे भारत में बीजेपी का भगवा झंडा लहरा रहा है.
एक बार फिर से राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने चुनावी समीकरण साधते हुए एक नया दांव खेला है.
दरअसल भारत के दो महत्वपूर्ण राज्य राजस्थान और यूपी के विरोधी पार्टियों के दो दिग्गज नेता हाल ही में बीजेपी का गमछा ओढ़ लिया है. ये नेता राजस्थान में राजपा के किरोड़ी मीणा और यूपी में सपा के मौजूदा राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल हैं.
नरेश अग्रवाल ने आखिर क्यूं छोड़ा सपा का साथ
यह बात हर कोई जानता है कि नरेश अग्रवाल की गिनती सपा के बड़े नेताओं में होती थी फिर ऐसी क्या मजबूरी हुई कि उन्हें भाजपा का दामन थामना पड़ा.
हालांकि काफी समय से ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि नरेश अग्रवाल बीजेपी में शामिल हो सकते हैं जिसपर आखिरकार 12 मार्च को मुहर लग ही गई.
हुआ यूं कि सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नरेश अग्रवाल की जगह जया बच्चन को राज्यसभा टिकट दे दिया जो नरेश अग्रवाल को नगवार गुजरा इसलिए उन्होंने बीजेपी का हाथ थाम लिया.
इस वजह से राज्यसभा की दसवीं सीट के लिए मुकाबला रोचक हो गया है और अब बसपा के उम्मीदवार
भीमराव अंबेडकर की जीत मुश्किल होती दिख रही है.
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सपा के मुखर आवाज थे नरेश
नरेश अग्रवाल राज्यसभा में शुरूआत से ही एक मुखर नेता के तौर पर पार्टी को संबोधित करते आए थे. इसके बाद भी पार्टी ने उनको राज्यसभा का टिकट नहीं दिया.
अब देखना यह होगा कि क्या उनके बेटे नितिन अग्रवाल जो वर्तमान में हरदोई से सपा के विधायक हैं उनका रुख किस तरफ होता है.
बता दें कि अग्रवाल जी यूपी के हरदोई जिले के रहने वाले हैं जो पहली बार 1980 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे. बाद में वह कई अन्य दलों से होते हुए सपा में पहुंचे थे.
गौरतलब है कि वर्ष 1997 में जब यूपी में कल्याण सिंह की सरकार को विश्वास मत हासिल करना था, तो नरेश अग्रवाल की पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस ने उन्हें समर्थन दिया था .
और आज भी नरेश अग्रवाल की उनकी जाति और हरदोई के आसपास के क्षेत्रों में मजबूत पकड़ मानी जाती है यहीं नहीं एक अच्छे वक्ता के रुप में वो अपने विरोधियों को भी हर मुद्दे पर आड़े हाथ लेने के लिए जाने जाते हैं.
विवादस्पाद बयानों से है गहरा नाता
पुरानी बातों को भुलाना अगर किसी को सीखना है तो वो हमारे देश के राजनेताओं से सीख सकता है.
जो नरेश अग्रवाल कुछ समय पहले तक बीजेपी सरकार की नीतियों और उनके नेताओं को संसद और बाहर दोनों जगह घेरने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ते थे आज वही उनके हमसाथी बन गए हैं. यहीं नहीं बीजेपी ने भी अपने मुख्य ऐजेंडे को किनारे रखकर उन्हें गले लगा लिया.
हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकी कुछ महीनों पहले नरेश अग्रवाल हिंदूओं की आस्था को लेकर निंदनीय बयान दे चुके हैं.
2017 में जून के महीने में गौरक्षा से जुड़ी हिंसा की घटनाओं पर संसद में बोलते हुए नरेश अपना आपा खो बैठे और उन्होंने तंज किया कि ‘गाय हमारी माता है तो फिर बैल क्या हुआ? बछड़ा हमारा क्या हुआ?’इसके बाद नरेश अग्रवाल बोलते-बोलते व्हिस्की से ठर्रे की बोतल तक पहुंच गए.
यहीं नहीं इससे पहले भी वो पाक अधिकृत कश्मीर यानी पीओके को आजाद कश्मीर वाले अपने बयान बयान पर देशभर की आलोचना का शिकार हो चुके हैं.

Naresh Agarwal, Kirodi Meena Join Bjp

राजस्थान में किरोड़ी लाल भी हुए बीजेपी के
राजनीति में कोई अपना या पराया नहीं होता ये बात आज किरोड़ी मीणा पर सटीक बैठती है. राजपा के
किरोड़ी मीणा जो अभी कुछ समय पहले तक मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के घोर विरोधी थे उन्होंने उनकी ही मौजूदगी में बीजेपी का हाथ थाम लिया है.
हालांकि इनका इतिहास बीजेपी से जुड़ा रहा है किरोड़ी जी पिछली वसुंधरा सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री का पदभार संभाल चुके थे. लेकिन सरकार जाते ही वो 2008 में आई गहलोत सरकार में सीधे तो नहीं लेकिन अपनी पत्नी गोलमा के जरिए कांग्रेस में शामिल हो गए थे.
इसके बाद से ही भाजपा और किरोड़ी के संबंधों में खटास आ गई थी.
गौरतलब है कि प्रदेश में 200 विधानसभा सीटों में से एनपीपी जिसके अध्यक्ष किरोड़ी लाल जी हैं के चार विधायक हैं. इसमें किरोड़ी लाल लालसोट से, उनकी पत्नी गोलमा देवी राजगढ़ लक्ष्मणगढ़ से, गीता वर्मा सिकराय से और आमेर से नवीन पिलानिया हैं.
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भाजपा को किरोड़ी मीणा से सीधा होगा फायदा
ये कहा जाता है कि किरोड़ी मीणा के रिश्ते भाजपा के बड़े नेताओं से काफी अच्छे रहे हैं. अब तो बीजेपी
उन्हें प्रदेश से राज्यसभा भेजने को भी राजी हो गई है.
राजनीतिक समीकरण को अगर देखे तो किरोड़ी लाल जी के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी को विशेष फायेदा होगा क्योंकि राजस्थान में करीब 6 जिलों की 28 सीटों पर इनकी पार्टी एनपीपी की सीधी पकड़ है.