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चीन के वन बेल्ट बन रोड प्रोजेक्ट में नेपाल का शामिल होना आखिर क्यों भारत को नहीं है रास

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Nepal One Belt One Road

Nepal One Belt One Road : पढ़िए क्या है चीन का वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट

Nepal One Belt One Road : भारत और नेपाल के रिश्ते शुरू से ही सिर्फ एक पड़ोसी राज्य की तरह सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि दोनों ने एक भरोसेमंद दोस्त की तरह सालों से एक दूसरे का साथ दिया है.

इन दोनों मुल्क के बीच रिश्ते इतने मजबूत हैं कि आम नागरिकों को एक दूसरे के देश जाने में कभी कोई पाबंदी या पासपोर्ट की झंझट नहीं रखा गया है, कोई कभी भी बिना किसी रोकटोक को एक दूसरे के देश में जा सकता है.
यही नहीं जब भी नेपाल पर कोई मसीबत आन पड़ी है तो सबसे पहले भारत ने ही एक बड़े भाई की तरह उसके हर दुख को अपना मानते हुए जल्द से जल्द समाधान करने की कोशिश करी है.
इन्हीं रिश्ते को और मजबूत बनाने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री शुक्रवार को भारत के 3 दिवसीय दौरे पर आए हुए हैं.
लेकिन प्रधानमंत्री का ये दौरे पहले के मुकाबले काफी गर्म माना जा रहा है जिसकी मुख्य वजह नेपाल का चीन के वन बेल्ट वन रोड में शामिल होने है क्योंकी इस पर भारत हमेशा से आपत्ति जताता रहा है.
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क्या है चीन का वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट
चीन व्यापार को बढ़ाने के लिए कई देशों के बीच एक नया रोड रूट तैयार कर रहा है जिसे सिल्क रूट या फिर वन बेल्ट वन रोड कहा जाता है.
बता दें कि इस सिल्क रूट का पहले से ही अपना इतिहास रहा है ऐसा माना जाता है कि कई साल पहले सदियों तक इस ऐतिहासिक रास्ते से व्यापार हुआ है.
पूर्व में यह रोड एशिया के तमाम देशों से गुज़रता हुआ पूर्वी एशियाई देशों कोरिया और जापान को यूरोप के भूमध्य सागर के आसपास के इलाकों को जोड़ने काम करता था.
इस वजह से यह रास्ता हमेशा से ही चीन की आर्थिक खुशहाली का ज़रिया बना रहा और अब इसे फिर से ठीक करने की कोशिश की जा रही है.
इसके लिए चीन ने पिछले साल कई देशों से वार्ता भी करी है जिसपर अभी तक कुल 65 देश प्रोजेक्ट में शामिल होने के लिए सहमत हो चुके हैं.
नेपाल भी है इस प्रोजेक्ट का हिस्सा
गौरतलब है कि भारत और चीन के संबंध में हमेशा से ही खटास रही है जो जगजाहिर भी है. नेपाल जो भारत का दोस्त है इसके बावजूद वो चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट में भागीदार बना है इस बात को लेकर भारत ने नेपाल के सामने आपनी आपत्ति जताई है.
इन सब मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए ही प्रधानमंत्री ओली भारत दौरे पर आए हैं. यहां उन्होंने आते ही अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि नेपाल भारत के खिलाफ किसी भी देश के साथ शामिल नहीं होगा, लेकिन चीन के बेल्ट ऐंड रोड प्रॉजेक्ट में उसकी भागीदारी अपने राष्ट्रहित को लेकर एक सोची-समझी रणनीति के तहत है जिसे लेकर वो पीछे नहीं हटेगा.
इसके अलावा भारत के नोटबंदी के कारण नेपाल में काफी भारतीय करेंसी जमा हो गई हैं जिसे नेपाल वापस करना चाहता है पीएम ओली के भारत आने का यह भी बड़ा मकसद है.
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चीन की सिल्क रोड पर भारत क्यों है चिंतित
चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट से भारत काफी परेशान है इसकी मुख्य वजह भारत के पड़ोसी देशों में चीन की बढ़ती ताकत को माना जा रहा है.
दरअसल चीन-पाकिस्तान के बीच बन रहे इस इकनॉमिक कॉरिडोर का रास्ता पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर के इलाके गिलगित बाल्टिस्तान से भी गुजरेगा जिसपर भारत हमेशा से अपना हक जताता रहा है.
इस विषय में भारत इस पूरे प्रॉजेक्ट पर अपनी चिंता कई बार साफ कर चुका है लेकिन दोनों ही मुल्क पर हमारी इन बातों का कोई असर नहीं दिख रहा, और अब तो नेपाल ने भी चीन के इस प्रोजेक्ट में हामी भर दी है जिससे भारत के लिए चुनौतियां और भी कड़ी हो गई हैं.

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