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टीडीपी की नाराजगी की वजह बीजेपी या भारत सरकार, जानिए क्या है इस अलग होने की पूरी राजनीतिक कहानी

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TDP Break NDA Alliance
File Photo - HT

TDP Break NDA Alliance : साल 2014 से शुरू हुआ था दोनों के बीच गठबंधन का सिलसिला

TDP Break NDA Alliance : भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में अपना एका अधिपत्य स्थापित करने की कोशिश में लगी है, जो काफी हद तक सफल होती भी दिख रही है. लेकिन बुधवार रात इस कोशिश में एक ग्रहण लग गया.

दरअसल आंध्र प्रदेश में एनडीए की सहयोगी सत्ताधारी तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) ने बुधवार को सरकार से अलग होने का फैसला ले लिया है. इस बात का ऐलान स्वंय पार्टी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ने किया.
अलग होने के पीछे की वजह
सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ने इतने बड़े फैसले की वजह सामने रखते हुए बताया की केंद्र ने हमसे वादाखिलाफी की है. उन्होंने बताया कि हमारे पार्टी को केंद्र सरकार में रहने का कोई फायदा नहीं हुआ.
गौरतलब है कि टीडीपी आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की लगातार कई समय से मांग कर रही थी. लेकिन केन्द्र उसकी ये मांग पूरा करने के पक्ष में नहीं था.
नायडू का कहना है कि हम आंध्र के फायदे के लिए केंद्र सरकार में शामिल हुए थे, लेकिन मोदी सरकार को उनकी कोई परवाह नहीं है.
उन्होंने आगे कहा कि हम इस मुद्दे को बजट के पहले दिन से ही उठा रहे हैं लेकिन हमें अब तक इसका कोई जवाब नहीं मिला. जिसके बाद आखिरकार हमने एनडीए से अलग होने का फैसला लिया है.
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टीडीपी के दो मंत्री केंद्र सरकार से देंगे इस्तीफा
बता दें कि इस समय टीडीपी के दो मंत्री केंद्र सरकार में हैं जिनको चंद्रबाबू नायडू ने इस्तीफा देने को कहा है.
मौजूदा सरकार में टीडीपी के अशोक गजपति राजू नागरिक उड्डयन मंत्री हैं जबकि वाइ एस चौधरी विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री का पदभार संभाले हुए हैं.
ऐसा बताया जा रहा है कि गुरुवार को दोनों मंत्री इस्तीफा दे सकते हैं. राजनीति में अचानक से आए इस बदलाव का केन्द्र सरकार पर क्या फर्क पड़ता है अब ये देखने की बात होगी.
टीडीपी मुद्दे पर अरुण जेटली आए सामने
एनडीए से नाराज चल रहे टीडीपी को शांत करने के लिए अरुण जेटली भी सामने आएं हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आंध्र को विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों के समान वित्तीय मदद देने को प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति करने से धन की मात्रा नहीं बढ़ सकती है.
जेटली ने कहा कि 4 साल पहले राज्य के विभाजन के समय जो भी वायदे किए गए थे उन सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया जाएगा.
उन्होंने जानकारी दी की 2014 में राज्य विभाजन के समय इस प्रकार की श्रेणी जरूर थी, लेकिन 14 वें वित्त आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन के बाद इस तरह के दर्जे को संवैधानिक रूप से केवल पूर्वोत्तर व तीन पहाड़ी राज्यों तक सीमित कर दिया गया है.
इस वजह से उक्त उल्लेखित राज्यों के अलावा किसी अन्य राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना संवैधानिक रूप से संभव नहीं है. हालांकि, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश को भी उतना ही धन उपलब्ध करवाएगी जितना विशेष दर्जे वाले राज्य को मिलता है.
गौरतलब है कि विशेष श्रेणी वाले राज्यों को केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए जरूरी धन का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार देती है.
वहीं सामान्य श्रेणी के राज्यों में केंद्र का हिस्सा केवल 60 प्रतिशत होता है, बाकी का धन राज्य सरकारें खुद वहन करती हैं.
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जानें टीडीपी और एनडीए का रिश्ता
तेलुगू देशम पार्टी और एनडीए का रिश्ता पूरी तरह से राजनैतिक है. दरअसल साल 2014 में आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव हुए थे. जिसमें बीजेपी और टीडीपी ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 175 सीटों में 106 सीटों पर जीत दर्ज की थी.
इनमें से 102 सीटें टीडीपी को मिली, जबकि 4 सीटें बीजेपी के झोली में गए. तब टीडीपी ने एनडीए के साथ मिलकर आन्ध्र प्रदेश में गठबंधन की सरकार बनाई.
राहुल गांधी मौके पर चौके की तलाश में
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मौके को पूरी तरह भुनाते हुए सत्ता में आने पर आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा पहले से ही कर रखा है.
इस बारे में जेटली ने अपनी मजबूरी गिनाते हुए कहा कि मुझे 14 वें वित्त आयोग की संवैधानिक व्यवस्थाओं का पालन करना है और विशेष दर्जे वाले राज्य के समकक्ष आंध प्रदेश को जो धन मिल सकता था वह हम उसे देने को प्रतिबद्ध भी हैं.