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भारतीय मजदूरों को भी मिलेगा सम्मान,सरकार ने संसद में ‘मजदूर विधेयक’ किया पेश

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भारत सरकार ने अपनी महत्वकांक्षी मजदूर विधेयक को गुरूवार को लोकसभा में पेश कर दिया. केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय के द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में मजदूरों के हक में कई महत्वपूर्ण फैसले सरकार द्वारा लिए गए.
इस विधेयक के माध्यम से सरकार 40 करोड़ असंगठित श्रमिक वर्ग के लोगों के लिए न्यूनतम मजदूरी को खुद तय करेगी. जो विभिन्न राज्यों या क्षेत्रों पर भी मान्य रहेगी.
हर पांच साल में होगी समीक्षा
सरकार द्वारा तय विधेयक में श्रमिकों के लिए आवश्यक कौशल विकास,कार्य की कठिनता,कार्यस्थल के भौगोलिक स्थान जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर हर पांच साल में समीक्षा होगी. इस समीक्षा को करने के लिए सरकार एक पैनल का गठन करेगी. जिसमें नियोक्ता, श्रमिकों के प्रतिनिधियों के अलावा स्वतंत्र लोग भी शामिल रहेंगे.
काम के तय होंगे घंटे
मजदूर विधेयक 2017 के अनुसार सरकार अब से मजदूरों के काम करने के घंटे भी तय करेगी. हर श्रमिक को हफ्ते में एक दिन का रेस्ट दिया जाएगा. और किसी कारण वश अगर संस्था श्रमिक से उसके रेस्ट के दिन काम कराता है तो उसका भुगतान ओवरटाइम के दर से किया जाएगा.
तय मजदूरी से कम वेतन भुगतान आपराधिक जुर्म
इस विधेयक के अनुसार अगर संस्था ने किसी भी श्रमिक को उसकी तय मजदूरी से कम वेतन भुगतान किया तो उसे एक आपराधिक जुल्म माना जाएगा. जिसमें संस्था पर 50000 रूपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. यही नहीं अगर पांच साल के अंदर संस्था ने अपने इस जुल्म को दोहराया तो उसे 3 महीने की कारावास या 1 लाख रूपए तक का जुर्माना देने पड़ेगा.
इसके अलावा श्रमिकों को दिए जाने वाले बोनस का भुगतान भी महीने के वेतन का 8.3 % की दर से किया जाएगा.
इस विधेयक को पेश करने के दौरान श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने लोकसभा में कहा कि यह विधेयक से देश में रोजगार पैदा करने और उद्यमियों को आकर्षित करने में मदद दिलाएगा.
उन्होंने कहा कि इस विधेयक में 44 श्रम कानून हैं जिन्हें 4 कोडों में जोड़कर पेश किया गया है.
उन्होंने कहा कि यह श्रमिकों की मजदूरी में एक ऐतिहासिक बदलाव लाने वाला फैसला है. जिसे इस देश में पहली बार लागू किया जा रहा है.
श्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि इस विधेयक में नियोक्ताओं के लिए बस एक बड़ी राहत दी गई है. वह श्रमिक की मजदूरी तभी काट सकता है जब वह ड्यूटी से गैरहाजिर रहा हो या फिर उसकी वजह से कोई नुकसान हुआ हो. इसके अलावा घर व अन्य सहूलियतें देने की एवज में भी तनख्वाह काटने का अधिकार नियोक्ता को रहेगा.