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उत्तराखंड सरकार ने बंद की बेरोजगार भत्ता योजना, लेकिन फिर भी खुश है हर युवा..जानिए क्यों?

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बेरोजगार
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उत्तराखंड सरकार ने राज्य के बेरोजगार युवकों के लिए एक ऐसा साहसिक फैसला किया है, जिसका रोजगार चाहने वाले युवा खुलकर समर्थन कर रह रहे हैं. हालांकि यह भी सच है कि कुछ बेरोजगार युवा इस फैसले से भड़के भी उठें हैं
दरअसल, उत्तराखंड सरकार ने यह घोषणा की है कि अब वो प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के हाथों में बेरोजगारी भत्ता नहीं पकड़ाएगी, बल्कि उन्हें खुद के पैरों पर खड़ा करना के लिए प्रेरित करेगी. क्योंकि सरकार ने उत्तराखंड में युवाओं को मिलने वाले बेरोजगारी भत्ता योजना को बंद करने का फैसला किया है.
लेकिन सरकार ने यह भी कहा है कि अब राज्य के युवाओं को हाथ में बेरोजगारी भत्ते के बजाय कौशल (हुनर) पकड़ाया जाएगा, ताकि वह खुद किसी पर निर्भर न रहे और अपना सिर ऊंचा करके खुद का जीवन यापन कर सके.

17 साल में 210 करोड़ रूपये बर्बाद

देहरादून में एक भरी सभा को संबोधित करते हुए श्रम एवं सेवायोजन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने बताया कि प्रदेश में हर साल बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने में करीब 14 करोड़ रुपये बर्बाद होते हैं. उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में उत्तराखंड के नए राज्य बनने के बाद से , अभी तक बेरोजगार भत्ता में करीब 210 करोड़ रूपये बर्बाद किया जा चुका है. लेकिन इससे बेरोजगारों को कोई लाभ नहीं हुआ.
डॉ. रावत ने कहा कि बेरोजगारी भत्ता देना बेरोजगारों के साथ बहुत बड़ा मजाक है. सच तो यह है कि 1500 रूपये मासिक बेरोजगार भत्ते से युवा 15 दिन भी गुजारा नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि क्यों न बेरोजगारों को इस लायक बनाया जाए कि वह अपना जीवन यापन करने के लिए दूसरों की बजाए खुद पर सक्षम हों.

बेरोजगारों को देंगे कौशल विकास का प्रशिक्षण

इसके एवज में प्रदेश सरकार बेरोजगारों को कौशल विकास का प्रशिक्षण प्रदान करने की योजना बनाएगी. जिसमें युवाओं की रूचि के अनुसार उन्हें उसी व्यवसाय से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि जब बेरोजगारों के हाथ में हुनर आ जाएगा, इसके बाद सरकार उन्हें सरकारी योजनाओं के जरिए बेहद सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराएगी, ताकि वह लघु उद्यम विकसित कर सके. इस ऋण योजना में शुरू के 2 साल ऋण की कोई वसूली नहीं की जाएगी.