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चीन का बेकाबू स्पेस स्टेशन पृथ्वी में शामिल होते ही हुआ क्रैश, टला बडा हादसा

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China Spacecrafts Tianjong-1 Crash : क्रैश होकर दक्षिण प्रशांत महासागर में गिरा

China Spacecrafts Tianjong-1 Crash : चीन का जो स्पेस स्काईलैब  तियांगोंग-1 आज धरती पर गिरने वाला था वो देर रात वायुमंडल में पहुंचते ही क्रैश हो गया.

बता दें की चीन का ये स्पेसक्राफ्ट पिछले 2 साल से अंतरिक्ष में बेकाबू होकर घूम रहा था, जिसकी आज पृथ्वी पर गिरने की आशंका जताई जा रही थी.
लेकिन राहत की बात है कि रविवार देर रात ये तियांगोंग-1 हमारे वायूमंडल में शामिल होते ही क्रैश हो गया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा बताया जा रहा है कि इस स्पेस स्टेशन का मलबा दक्षिण प्रशांत महासागर में गिरा है.
भारतीय समय के मुताबिक रविवार देर रात करीब 1.45 पर धरती के वायुमंडल में पहुंचा और वहां पहुंचते ही क्रैश हो गया.
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यह थी जानकारी
एक यूरोपियन न्यूज एजेंसी ने यह जानकारी दी थी कि भारतीय समय के अनुसार चीन का स्पेस स्टेशन सोमवार की सुबह करीब 7:26 बजे से दिन के 3:26 बजे तक के बीच वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है.
यह भी कहा जा रहा था कि इस स्पेस स्टेशन के अवशेष वायुमंडल में प्रवेश करते ही जल जाएंगे, यानि कह सकते हैं कि मलबे का एक बड़ा टुकड़ा धरती तक पहुंच ही नहीं पाएगा.
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कोई उपग्रह या अंतरिक्ष यान धरती पर गिर रहा है, इससे पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं.
दक्षिण कोरिया के स्पेस डिपार्टमेंट के मुताबिक 23 मार्च 2001 में सोवियत संघ की अंतरिक्ष में लंबी छलांग वाला मीर स्टेशन न्यूजीलैंड और चिली के बीच प्रशांत महासागर में भी इसी तरह टूटकर गिरा था.
वहीं 7 फरवरी 1991 में सोवियत यूनियन के अंतरिक्ष कार्यक्रम का अंतिम यान था जो 40 टन का था कुछ तकनीकी खराबी से अर्जेंटीना में क्षतिग्रस्त होकर गिर पड़ा था.
11 जुलाई 1979 को स्काईलैब अमेरिका का 80 टन पहला अंतरिक्ष स्टेशन भी ऑस्ट्रेलिया में क्रैश हुआ, जिसे नासा ने 1973 में लांच किया था. और साथ ही कोलंबिया का स्पेस शटल हादसा भी इसी तरह की घटना थी जो यान टेक्सास और लुइसियाना में 1 फरवरी 2003 में हुई थी.
क्यों गिरा  तियांगोंग?
दरअसल तियांगोंग-1 को चीन ने 2011 में केवल दो साल की टाइम लिमिट तक काम करने की लिया बनाया था, जो समय समाप्ति के बाद अपने आप अंतरिक्ष में खत्म हो जाता.
हालांकि, मई 2011 से मार्च 2016 तक करीब 5 साल काम करने के बाद ये चीनी स्पेस एजेंसी के नियंत्रण से बाहर हो गया था, लेकिन धरती के गुरुत्वाकर्षण बल ने इसे फिर से पृथ्वी के अंदर खींच लिया.