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Green Electricity : आईआईटी इंजीनियर प्याज के छिल्कों से पैदा कर रहे ईको- फ्रैंडली बिजली

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Green Electricity : दुर्गम इलाकों में पहुंच सकेगी बिजली

Green Electricity : भारत भले ही आज खुद को उभरता हुआ एक प्रगतिशील देश मानता हो लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी देश के दूर- दराज इलाकों और गांवो में बुनियादी सुविधाएं ना के बराबर है.

जिसमें सबसे बड़ी चुनौती है घरों में बिजली का ना होना, आज भी देश के कई घर बिजली की पहुंच से दूर हैं और अंधेरे में जी रहे हैं. ऐसे ही लोगों के बारे में सोचते हुए आईआईटी खडगपुर के इंजीनियरों ने एक खोज की है.
प्याज के छिलके से पैदा करी बिजली
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), खड़गपुर के इंजीनियरों ने प्याज के छिलकों का इस्तेमाल कर एक सस्ते उपकरण का निर्माण किया है जो शरीर की गति से इको फ्रेंडली बिजली का उत्पादन कर सकता है और पेसमेकर, स्मार्ट पिल और पहनने लायक बिजली उपकरण को चला सकता है.
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शोधकर्ताओं ने कहा कि यह गैर विषायुक्त, जैविक तरीके से सड़नशील प्याज के छिलके के अंदर पाए जाने वाले पीजियोइलेक्ट्रिक गुणों का इस्तेमाल करता है. आपको बता दें कि इन पीजियोइलेक्ट्रिक में हर दिन की यांत्रिक गति से ऊर्जा को बिजली में बदलने की क्षमता होती है.
पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित संस्थान के प्रोफेसर भानू भूषण खटुआ ने बताया कि हाथों से बनाया गया यह सस्ता उपकरण हरित तरीके से बिजली पैदा करने की नयी दिशा में मिली बड़ी सफलता है.
प्रोफेसर ने बताया कि इस उपकरण की मदद से आम लोग भी इस साधारण, नये एवं सस्ते विचार का इस्तेमाल कर किसी भी परिस्थिति में ऊर्जा का उत्पादन कर सकते हैं.
शोधकर्ताओं ने कहा कि पीजोइलेक्ट्रिक चीजों के इस्तेमाल से हमारे पर्यावरण में किसी भी प्रकार का प्रदूषण फैलाए बिना केवल शरीर की गति को हरित ऊर्जा में बदला जा सकता है.
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दुर्गम इलाकों में पहुंच सकेगी बिजली
शोधकर्ताओं की टीम में शामिल आईआईटी के सुमंता कुमार करण और संदीप मैती ने इस बात की उम्मीद जतायी कि यह तकनीक जल्द ही व्यवसायिक इस्तेमाल में लायी जाएगी .
हालांकि उन्होंने बताया कि अभी व्यवहारिक उपयोग से पहले इसमें थोड़ा और शोध करने की जरूरत है.
शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि इस उपकण की मदद से लोग वहां भी बिजली का उत्पादन कर पाएंगे जहां इसे पहुंचाना आसान नहीं है या संभव नहीं हो पा रहा है.

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