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IIT खड़गपुर के बनाए गए बायोटॉयलेट से पैदा होगी बिजली और बन सकेगी जैविक खाद्य

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IIT Kharagpur Bio Toilet
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IIT Kharagpur Bio Toilet : इस बायो इलेक्ट्रिक शौचालय की एक नहीं कई हैं खूबियां 

IIT Kharagpur Bio Toilet : तकनीक लोगों का जीवन कैसे बदल सकती है ये हम लंबे समय से देखते आ रहे हैं, किस तरह यह हमारी जिंदगी आसान करने के साथ ही हमारे जीवन के स्तर में भी बदलाव लाती है.

यही वजह है कि आए दिन वैज्ञानिक अपनी नई खोजों से समाज को औऱ ज्यादा सशक्त बनाने के लिए अपना योग्यदान निरंतर करते रहते हैं.
हाल ही में आईआईटी खड़गपुर के बच्चों ने गांव के पिछड़े वर्ग के लिए ऐसा टॉयलेट इजात किया है जो उनकी खुले में शौच ना जाने में मदद तो करेगा ही इसके अलावा उनके और कई कामों में भी आ सकेगा.
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इस्तेमाल हुए पानी को करेगा रिसाइकल
आमतौर पर सामान्य शौचालयों में प्रति फ्लश पर ताज़े पानी की जरूरत होती है लेकिन इस बायो टॉयलेट को ताज़े पानी की आपूर्ति की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. क्यूंकि इसमें लगे माइक्रोबायल फ्यूल सेल(एमएफसी) पानी को रिसाइकल कर उसको दोबारा उपयोग में लेने योग्य बना देते है.
इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर सह मुख्य शोधकर्ता एमएम गांगरेकर ने टीओआई से कहा कि भारत सरकार के विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा वित्तीय मदद से इस परियोजना के तहत हमने 1500 लीटर की क्षमता वाला मॉडल बायो-इलेक्ट्रिक टॉयलेट संस्थान परिसर में स्थापित किया है, जिसके तहत प्रतिदिन पांच लोग इसका उपयोग कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि अपशिष्ट जल का दोबारा प्रयोग करने व बिजली पैदा करने की खासियत के चलते यह परियोजना प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक होगी. इसके जरिये हम लोगों को स्वच्छ शौचालयों तक पहुंचाने का प्रयास भी कर सकते हैं.
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मानव मल से पैदा होगी बिजली
बता दें कि इस बायो इलेक्ट्रिक शौचालय की एक नहीं कई खूबियां हैं. यह मानव से बिजली बनाने में तो सक्षम होगा ही, बल्कि मल को जैविक खाद में भी ऑटोमेटिक तब्दील कर देगा.
शौचालय के सेप्टिक टैंक में एलेक्ट्रोजेनिक बेक्टीरिया है जो मानव अपशिष्ट पर काम कर बिजली उत्पन्न करते है जिससे  दिन के समय बिजली का उपयोग फ़ोन चार्ज करने में लिया जा सकता है.
गौरतलब है कि इस बायोटॉयलट बनाने वाली टीम को प्रधानमंत्री की तरफ से स्वच्छ भारत का अवार्ड भी मिल चुका है.
आने वाले समय में यह शौचालय गाँव के लिए एक आदर्श साबित हो सकते हैं जहा लोगों को खुले में शौच करने जाना पड़ता है.