Home विज्ञान IIT मद्रास के छात्रों ने बनाई इंटेलीजेंट स्ट्रीट लाइट, जानें क्या है...

IIT मद्रास के छात्रों ने बनाई इंटेलीजेंट स्ट्रीट लाइट, जानें क्या है इसमें खास

SHARE
Intelligent Street Lights
demo pic

Intelligent Street Lights :  सड़कों पर जलने वाली स्ट्रीट लाइट में 30 प्रतिशत तक बिजली की खपत को कम करेगा ये सिस्टम

Intelligent Street Lights : हमारे देश में ना जाने कितनी स्ट्रीट लाइटें सूनसान सड़कों पर टिमटिमाती रहती हैं जिनसे भारी मात्रा में बिजली की खपत होती है जिसका सीधा असर देश के खजाने पर भी पड़ता है.

इसी समस्या से निपटने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT-M) में पढ़ने वाले कुछ छात्रों की एक टीम ने इंटेलीजेंट लाइटिंग सिस्टम का विकास किया है.
इस प्रणाली की मदद से सड़कों पर जलने वाली स्ट्रीट लाइट तभी काम करती है जब वाहनों की आवाजाही होती है. इसके इतर जब सड़कों पर लोगों का आवागमन कम हो जाता है तो इन लाइट्स की रोशनी 30 फीसदी तक कम हो जाती है.
यह अपने आप में पूरी तरह से ऑटोमेटिक लाइटिंग सिस्टम है जिसे हाल ही में नई सुविधाओं की पेशकश के लिए पेटेंट कराया गया था.
आपको बता दें कि अकेले चेन्नई नगर निगम अपनी सड़कों पर रोशनी के लिए 331.32 मेगावाट बिजली खर्च करती है. जिसपर प्रति वर्ष 52.08 करोड़ रुपए की लागत से खर्च आता है. जबकि खाली या कम आवाजाही वाली सड़कों पर अनुमानित 30 से 40 प्रतिशत तक का नुकसान भी नगर निगम को होता है.
इंटेलीजेंट लाइट सिस्टम बनाने वाली टीम के सदस्य सुशांत उत्तम वडवकर, जो दूसरे वर्ष के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र हैं बताते हैं कि यह भारत में विकसित की जाने वाली पहली प्रणाली है जिसकी सहायता से हम आसानी से 40% बिजली की ऊर्जा खपत को बचा सकते हैं.
यह भी पढ़ें – Kerala Sewer Robot : केरल में अब रोबोट करेंगे सीवर की सफाई, सदियों पुरानी प्रथा खत्म
उन्होंने समझाते हुए कहा कि जाहिर सी बात है कि रात के पूरे 12 घंटे लोग सड़कों का उपयोग नहीं करते हैं, इसलिए स्ट्रीट-लाइट की जरूरत हर समय नहीं पड़ती.
यही वजह है कि हमारे द्वारा किए गए इस अविष्कार का उपयोग सड़कों पर आवाजाही के दौरान ही रोशनी को प्रदान करना और उपयोग में ना आने वाली खाली सड़कों पर ऊर्जा की खपत और लागत को बचाने के लिए किया जा सकेगा.
कैसे करता है काम
इस आई-लाइटिंग को एकीकृत प्रणाली के तहत डिजाइन किया गया है जिसमें नियंत्रण मॉड्यूल, सेंसर मॉड्यूल और एलईडी ड्राइवर शामिल हैं. इसे कंट्रोल करने के लिए एक माइक्रोकंट्रोलर यूनिट (एमसीयू) लगा हुआ है, जो विभिन्न मॉड्यूल के बीच डेटा एक्सचेंज करने की अनुमति देता है.
वहीं पैदल चलने वालों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए सेंसर मॉड्यूल में पीआईआर (निष्क्रिय इन्फ्रारेड सेंसर) और अल्ट्रासोनिक सेंसर लगाए गए हैं. इसके अलावा LED ड्राइवर का इस्तेमाल LED पैनल में दी गई बिजली की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.
यह भी पढ़ें – Fuel From Plastic : हैदराबाद का ये इंजीनियर 500 किलो प्लास्टिक से तैयार करता है 400 लीटर ईंधन
आईआईटी बिल्डिंग में हो चुका है सफल परीक्षण
टीम के सदस्यों ने कहा कि IIT-M परिसर मे आईसीएसआर भवन के नजदीक तीन सड़कों पर इस सिस्टम को संचालित किया जा चुका है. इसके अलावा सभी छात्रों के हॉस्टल ,डीन ऑफिसेस और वर्कशॉप की इंटरनल लाइट्स पर भी प्रयास किया गया जिसका परिणाम संतोषजनक रहा है.
इंडियन एक्सप्रेस पर छपि खबर के मुताबिक इस सिस्टम के बाहरी क्रियान्वन में कुल लागत लगभग 2,000 से लेकर 2,200 तक पड़ सकती है, हालांकि इसे तीन साल में बिजली की कम होने वाली खपत से बचाकर वसूल की जा सकती है. जबकि इस उत्पाद का 15 वर्षों तक उपयोग में लाया जा सकता है.
फिलहाल इसे बनाने वाली टीम का कहना है कि उत्पाद के अगले चरण के लिए वे स्मार्ट सिटी को लेकर विचार कर रहे हैं और इसके लिए राज्य सरकार से संपर्क करने की योजना भी बना रहे हैं.
इस टीम में सुशांत के अलावा अभिषेक नायर और अरुणभ श्रीवास्तव भी मौजूद हैं. इसके अलावा परामर्श देने वाले आईआईटी मद्रास के दो प्रोफेसर एन अरुणाचलम और लक्ष्मणारसम्मा एन की तरफ से भी टीम का पूरा सपोर्ट हासिल है.