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ISRO ने IRNSS-1I नैविगेशन सैटेलाइट को किया सफलतापूर्वक लांच, जानें क्या है इसके फायदे

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ISRO IRNSS-1I Satellite Launch

ISRO IRNSS-1I Satellite Launch : सुबह 4.04 मिनट पर श्रीहरिकोटा से हुआ लांच

ISRO IRNSS-1I Satellite Launch : इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन(ISRO) ने आज अपना एक और नेविगेशन सैटेलाइट (IRNSS-II) सफलतापूर्वक लांच कर दिया है.

इस सैटेलाइट को भारतीय समयानुसार सुबह तड़के 4.04 बजे आंध्र प्रदेश के स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी41 माध्यम से लांच किया गया .
बता दें कि ये नेविगेशन उपग्रह भारत का पहला स्वदेश निर्मित जीपीएस सिस्टम है जो अंतरिक्ष में जाकर आईआरएनएसएस-1आई और आईआरएनएसएस-1ए की जगह लेगा जो तीन रुबिडियम परमाणु घड़ियों के विफल हो जाने के बाद निष्प्रभावी हो चुके हैं.
जानिए INRSS-1I की खासियत
इस सैटेलाइट की सबसे खास बात यह है कि इससे आने वाले समय में मैप तैयार करने, समय का सटीक पता लगाने ,नेविगेशन की जानकारी और समुद्री नैविगेशन का पता लगाने में मदद मिलेगी.
IRNSS-II सैटेलाइट का वजन 1425 किलोग्राम है, इसकी लंबाई 1.58 मीटर, ऊंचाई 1.5 मीटर और चौड़ाई 1.5 मीटर है और इसे 1420 करोड़ रुपए में तैयार किया गया.
इसमें L5 और S-band नैविगेशन पेलोड के साथ रुबेडियम अटॉमिक क्लॉक्स होंगी और यह इसरो की आईआरएनएसएस परियोजना की 9वीं सैटलाइट होगी.
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GSAT 6A का नहीं चला पता
गौरतलब है कि 29 मार्च को इसरो ने उपग्रह जीसैट-6ए को लांच किया था लेकिन लांचिग के 48 घंटों के बाद ही इससे संपर्क टूटने के कारण यह मिशन असफल हो गया .
GSAT 6A उपग्रह के प्रक्षेपण से सैटेलाइट आधारित मोबाइल कम्युनिकेशन उपकरणों के संचालन में काफी मदद मिलेगी जिसका सबसे ज्यादा फायदा हमारी सेनाओं को मिलता.
खैर जो बीत गया सो बीत गया अब इसरो के वैज्ञानिकों ने अपनी पुरानी नाकामी को भुलाते हुए आज INRSS-II की सफत लांचिंग करी है.