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Kerala Sewer Robot : केरल में अब रोबोट करेंगे सीवर की सफाई, सदियों पुरानी प्रथा खत्म

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Kerala Sewer Robot
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Kerala Sewer Robot : मार्च से होगी शुरूआत

Kerala Sewer Robot : भारत में बरसों से कई ऐसी प्रथाएं चलती आ रही हैं जो आज के दौर में मानव समाज पर एक कलंक से ज्यादा कुछ नहीं है.

इन प्रथाओं के अनुपालन की वजह से आज भी हमारे आपके बीच के कुछ लोग सम्मान से भरा जीवन नहीं जी पाते. ऐसी ही एक प्रथा है मैनुअल स्केवेंगिंग जिसे खत्म करना बेहद जरूरी है.
मैनुअल स्केवेंगिंग का मतलब मल उठाना होता है जो एक खास जाति के कुछ लोगों द्वारा ही किया जाता है. लेकिन केरल में अब तकनीक की मदद से इसका समाधान निकाल लिया गया है.
दरअसल केरल ने अपने राज्य में अब लोगों की जगह रोबोट से मैनहोल और सीवर की सफाई कराने का फैसला किया है.
स्टार्टअप फर्म जेनरोबोटीक्स द्वारा बनाए गए इस  बैंडिकूट रोबोट को अब जल्द ही केरल में गंदे सीवर को साफ करने में पुरुषों की जगह लेगें, और इसके साथ ही राज्य में मैनुअल स्केवेंगिंग की पुरानी प्रथा को समाप्त करने की शुरूआत करेंगे.
केरल जल प्राधिकरण (केडब्ल्यूए) और केरल स्टार्टअप मिशन (केएसयूएम) ने गुरुवार को इस उद्देश्य के लिए रोबोटों के उपयोग सहित प्रौद्योगिकी और उत्पादों के कॉनट्रैक्ट के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए.
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इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री मैनेज टी थॉमस, आईटी सचिव एम शिवशंकर, केएसयूएम के सीईओ सजी गोपीनाथ, अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन, टॉम जोस, केडब्ल्यूए के अधिकारियों और जिक्रोवॉस्टिक के आठ प्रतिनिधि भी उपस्थित थे.
एक आधिकारिक बयान में ये बताया गया कि मार्च में तिरुवनंतपुरम में आने वाले प्रसिद्ध अत्तुकल पोंगल त्यौहार के दौरान शहर में सीवर छेद को साफ करके काम की शुरूआत की जाएगी.
आपको बता दें कि इन रोबोट के चार पार्ट हैं और इसके साथ एक बाल्टी प्रणाली भी अटैच है, जो स्पाइडर वेब के विस्तार से जुड़ी होती है. इसके अलावा इसमें वाई-फाई और ब्लूटूथ मॉड्यूल भी हैं.
केएसयूएम ने मैनुअल स्केवेंगिंग की समस्या से निपटने के लिए समाधान खोजने के लिए शहर में फील्ड स्टडी कराई थी. और इसी संस्था ने इन जेनरोबॉटिक्स के लिए धन भी मुहैया कराया है.
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वहीं जेनरोबॉटिक्स बनाने वाली कंपनी छह महीने के अंदर अपने इस उत्पाद को बाजार में लाने की योजना बना रही है.
गौरतलब है कि 2015 में स्थापित जेनरोबॉटिक्स, संचालित एक्सोस्केलेटन और मानव नियंत्रित रोबोट सिस्टम बनाने में माहिर हैं.
कंपनी ने बताया कि उसने रोबोट के अंदर भारी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल ना करके न्युमेटिक्स(गैस और हवा का दबाव) का इस्तेमाल किया गया है.
ऐसा करने के पीछे कंपनी का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज्यादा खतरनाक होते हैं और ये अंदर मैनहोल में मौजूद विस्फोटक गैसों से रियेक्ट कर सकते हैं.

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