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15 साल के इस लड़के का आधुनिक ड्रोन सैनिकों की जान बचाने में बनेगा मददगार

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Kid Scientist Built Drone

Kid Scientist Built Drone : जानिए कैसे काम करता है ड्रोन

Kid Scientist Built Drone : इस दुनिया को वैज्ञानिकों ने हर क्षेत्र में कई ऐसी खोज करके दी हैं जिसने आज लोगों के जीने और सोचने का अंदाज बदल दिया है.

हमारे देश के वैज्ञानिक भी समय समय पर कई ऐसे अविष्कार करते आए हैं जो हमे सशक्त बनाने के लिए उपयोगी साबित हुए है.
हर्षवर्धन जाला, भी उन्ही में से एक है जो इस समय भारत में अपने ड्रोन की वजह से जाने जा रहे हैं.
बचपन से ही इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीक में रुचि रखने वाले 15 साल के हर्षवर्धन अपने आप में एक अजूबा है. इतनी कम उम्र में उन्होंने भारतीय सेना की मदद के लिए नए तरह के ड्रोन की खोच की है जो सैनिकों की जान बचाने में काफी मददगार साबित होगा.
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कहां से मिली प्रेरणा

हर्षवर्धन ने यूट्यूब पर एक वीडियो देखी जिससे उन्हें इसे बनाने की प्रेरणा मिली. इस ड्रोन की सबसे खास बात यह है कि ये लैंडमाइन्स का पता लगाकर उसे डिफ्यूस करने में सैनिकों की मदद करेगा.
बता दें कि हर साल हमारे देश में कई सैनिक दुश्मन के बिछाए लैंडमाइन का शिकार होकर अपनी जान गंवा देते हैं. पिछले 2009 से 2013 के बीच भारत में इस कारण 752 जवान शहीद हुए हैं.
हर्षवर्धन ने बताया जब मैं टेलीविज़न पर न्यूज देख रहा था, तब मैंने जाना कि बड़ी संख्या में हमारे सैनिक लैंडमाइन विस्फोटों के कारण गंभीर रुप से घायल हो जाते हैं. इनसे अपने जवानों को बचाने के लिए हर्षवर्धन ने एंटी लैंडमाइन टिवाइस पर काम करना शुरू किया.
गौरतलब है कि हर्षवर्धन ने इस ड्रोन को बनाने में 5 लाख रुपये खर्च किया है. हालांकि, पहले दो प्रोटोटाइप के लिए उनके माता-पिता ने लगभग 2 लाख रूपये दिए वहीं तीसरे प्रोटोटाइप के लिए राज्य की ओर से उन्हें 3 लाख रुपये दिए गए थे.
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कैसे काम करता है ड्रोन
यह ड्रोन आरसीबी सेंसर, एक थर्मल मीटर और हाइ रिजाल्यूशन वाले 21 मेगापिक्सल कैमरे से लैस है.
यह ड्रोन जमीन के 8 वर्ग मीटर तक चारों तरफ के एरिया को कवर करता है. इसके अलावा ये 50 ग्राम तक का विस्फोटक अपने साथ लेकर 2 फीट की उंचाई तक उड़ने में भी सक्षम है.
जानकारी के लिए बता दें कि हर्षवर्धन के पिता प्राध्यामसिंह गुजरात के ज़िला नारोदा में एक प्लास्टिक कंपनी में अकाउंटेंट हैं जबकि उनकी मां निषाबा जाला एक गृहिणी है.
हरवर्धन की इच्छा है कि वो अपने बनाए उत्पाद गूगल के साथ साझा करें. उम्मीद है कि उनकी इस सोच और की गई खोज से आगे चलकर लोगों की और सेना की मदद हो सके.

साभार – TBI
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