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69th Republic Day : इतिहास में एक 26 जनवरी ऐसी भी जिसनें मचाई थी भारत में तबाही

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69th Republic Day

69th Republic Day : इस बार की परेड में यह है खास

69th Republic Day : 26 जनवरी का दिन प्रत्येक भारतवासी के लिए गौरव का दिन होता है.

इस दिन हमारा देश पूरी दुनिया को अपनी सैन्य ताकत और नए अविष्कारों से वाकिफ कराता है और उन्हें बताता है कि वो कितनी तेजी से महाशक्ति बनने के पग पर चल रहा है.
बता दें कि भारत ने आजादी के बाद अपना पहला गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया था. उस समय दक्षिण पूर्व एशिया के दिग्गज नेता और इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो को गणतंत्र दिवस के पहले मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया था .
इत्तेफाक से  68 साल बाद भी भारत ने एक बार फिर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो को गणतंत्र दिवस की परेड के लिए आमंत्रित किया है.
इस बार की परेड में यह है खास
इस बार परेड की सबसे खास बात यह है कि भारत ने पहली बार एक साथ आसियान(एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस) के 10 राष्ट्राध्यक्षों को इस ऐतिहासिक पल के लिए आमंत्रित किया है जो गणतंत्र दिवस की परेड में भारत की सैन्य क्षमता और सांस्कृतिक विविधता के गवाह बनेंगे.
वहीं दूसरी मुख्य बात यह है कि इस बार की परेड में महिलाएं भी पुरूषों के साथ स्टंट करती दिखेंगी.
कल होने वाली परेड में सीमा सुरक्षा बल यानी कि बीएसएफ की 113 महिला बाइकर्स अपनी 350 सीसी की 26 रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिलों पर सवार होकर एरोबेटिक्स और दूसरी तरह की कलाबाजी में अपने कौशल और साहस का परिचय देती नजर आएंगी जो अपने आप में देश की सेना में महिलाओं के बढ़ते कद को दर्शाएगा.
26 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं गणतंत्र दिवस
वर्ष 1929 के दिसंबर महीने में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था जिसकी अध्यक्षता देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू कर रहे थे.
इस अधिवेशन में यह प्रस्ताव पास हुआ था कि अगर अंग्रेजी हुकूमत 26 जनवरी 1930 तक भारत को डोमिनियन का पद नहीं देता है तो भारत खुद को पूरी तरह से स्वतंत्र घोषित कर देगा.
इसके बाद इस तारीख का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्रा सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई.
हालांकि हमारा संविधान 26 नवंबर 1950 में ही बन गया था.
69TH REPUBLIC DAY
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राजपथ हमेशा से नहीं रहा है परेड स्थल
आपको शायद यह मालूम ना हो कि 1950 से 1954 के बीच गणतंत्र दिवस का समारोह कभी इर्विन स्टेडियम, किंग्सवे, लाल किला तो कभी रामलीला मैदान में हुआ करता था न कि राजपथ पर.
गणतंत्र दिवस को राजपथ पर मनाने का तरीका 1955 में शुरू हुआ. इसी साल पहली बार राजपथ पर 26 जनवरी की परेड हुई थी. राजपथ परेड के पहले मुख्य अतिथि पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद थे.
तीन दिन तक चलता है गणतंत्र दिवस उत्सव
गौरतलब है कि सभी महत्वपूर्ण सरकारी भवनों को 26 जनवरी से 29 जनवरी के बीच तीरंगे की रोशनी से सुंदरता पूर्वक सजाया जाता है.
हर वर्ष 29 जनवरी की शाम अर्थात् गणतंत्र दिवसे के तीसरे दिन बीटिंग द रिट्रीट का आयोजन किया जाता है. यह आयोजन तीन सेनाओं के एक साथ मिलकर सामूहिक बैंड वादन से आरंभ होता है जो उस दिन अपनी लोकप्रिय मार्चिंग की धुनें बजाते हैं.
इस गणतंत्र दिवस के आयोजनों का आधिकारिक रूप से समापन बीटिंग द रिट्रीट घोषित करता है. इस प्रक्रिया के तहत बैंड मास्टर राष्ट्रपति के समीप जाते हैं और बैंड वापिस ले जाने की अनुमति मांगते हैं. राष्ट्रपति की तरफ से अनुमति मिलने के बाद बैंड वापस लौट जाता है.
बैंड मार्च वापस जाते समय लोकप्रिय धुन सारे जहाँ से अच्छा बजाया जाता है और फिर ठीक शाम 6 बजे बगलर्स रिट्रीट की धुन बजाते हुए हमारे राष्ट्रीय ध्वाज को उतारा जाता है.
जिसके बाद सामूहिक राष्ट्र गान गाया जाता है और फिर गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन हो जाता हैं.
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2001 का गणतंत्र दिवस था तबाही का दिन
साल 2001 का गणतंत्र दिवस भारत के लिए एक तबाही वाला दिन के रूप में याद किया जाता है.
इस दिन गुजरात में आए भूकंप में कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी. अहमदाबाद के निकट भुज शहर इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ था. भारत के तत्कालिन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस घटना पर बेहद अफसोस जताया था.
बताया जाता है कि यह भूकंप सुबह आठ बजकर 50 मिनट पर आया था. इस भूकंप की तीव्रता 6.9 से 7.9 के बीच थी और इसका असर बांग्लादेश, नेपाल और दक्षिण भारत तक महसूस किया गया.
वहीं अस्पतालों के भी इस भूकंप में शिकार होने के कारण राहत कार्य में विशेष बाधा आई थी.

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