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ढोंगी बाबाओं के खुलासे से संत समाज सकते में, अब से साधु-संत बनने के लिए पास करनी होगी परीक्षा- अखाड़ा परिषद

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संत समाज
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पिछले कुछ समय से देश में जिस तरह से एक के बाद एक ढोंगी बाबाओं के खुलासे हो रहे हैं, उससे संत समाज सकते में आ गया है.
गौर करने वाली बात यह है कि पहली बार संत समाज ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि कई पाखंडी लोग संतों का भेष धारण करके अपने काले कारनामों को अंजाम दे रहे हैं. जिनकी वजह से देश के तमाम साधू-संतों की छवि को नुकसान हो रहा है.
ऐसे लोगों को संत समाज में आने से रोकने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने बड़ा फैसला लिया है.
अखाड़ा परिषद ने साफ कहा है कि अब हर किसी को साधु संत बनने नहीं दिया जाएगा. परिषद ने कहा है कि अब से जो साधु संतो के मानकों पर खरा उतरेगा सिर्फ वही साधु संत कहलाएगा.
यहां तक कि साधु-संत बनने के लिए अब हर किसी को परीक्षा पास करनी होगी.

अखाड़ा परिषद की तरफ से जारी फर्जी बाबाओं की सूची

1.आसाराम बापू उर्फ आशुमल शिरमलानी
2. सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां
3. सच्चिदानंद गिरि उर्फ सचिन दत्ता
4. गुरमीत सिंह राम रहीम सच्चा डेरा सिरसा
5. ओम बाबा उर्फ विवेकानंद झा
6. निर्मल बाबा उर्फ निर्मलप्रीत सिंह
7. इच्छाधारी भीमानंद उर्फ शिवमूर्ति द्विवेदी
8. स्वामी असीमानंद
9. ओम नम: शिवाय बाबा
10. नारायण साईं
11. राम पाल

साधु-संत बनने के लिए देनी होगी परीक्षा

हरिद्वार के बाघंबरी मठ में हुई संत समाज की बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने कहा कि अब हर किसी को संत बनने की इजाजत नहीं दी जाएगी.
उन्होंने कहा कि इसके लिए कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं.
वहीं संतों के आचरण पर निगाह रखने की जिम्मेदारी विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन को सौंपी गई है.

पिछले इतिहास की होगी जांच

परिषद ने कहा कि यदि कोई साधु संत बनना चाहता है तो सबसे पहले उसके इतिहास की जांच की जाएगी. देखा जाएगा कि उसने भूतकाल में किसी तरह की असामाजिक एवं आपराधिक कामों को अंजाम तो नहीं दिया. क्योंकि ऐसा भी हो सकता है कि कहीं कोई व्यक्ति पुलिस से सुरक्षा के लिए तो संत नहीं बन रहा है.
जेब में न हो एक रूपया
 जो भी संत बनना चाहता है कि उसकी पहली शर्त यह है कि उसके पास पैसा नहीं होना चाहिए. अर्थात उसे पैसों का लोभ न हो.
इसके अलावा उसके नाम कोई भी संपत्ति न हो, यदि वह सामाजिक कार्य करता भी है तो वह संपत्ति न्यास के नाम से पंजीकृत हो.
साथ ही उससे अर्जित होने वाली आय का अधिकांश हिस्सा धर्मार्थ के काम में खर्च किया जाना चाहिए.

जो शर्तों को पूरा नहीं करेगा, उसका होगा बहिष्कार

अखाड़ा परिषद ने कहा कि ऐसा नहीं है कि जो नए संत आएंगे उन्हीं पर यह नियम लागू होंगे, जो पहले से भी हैं उन पर भी निगाह रखी जाएगी. परिषद ने कहा कि भले ही कोई कितना भी बड़ा संत क्यों न हो, जो इन शर्तों को पूरा नहीं करेगा, उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा.

अपराधियों और पैसे कमाने का जरिया बन गया है संत बनना

यह बात आम है कि साधु-संतों का भेष किसी भी असामाजिक तत्व के लिए सुरक्षा कवच से कम नहीं है. इतना ही नहीं धन, शोहरत कमाने के लिए भी धार्मिक गुरू सबसे बेहतर पेशा बनकर उभरा है.

कड़ा तप करने वाले साधु-संत हो रहे अपमानित

संत समाज में फर्जी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाना बहुत जरूरी हो गया है. क्योंकि आज जिस तरह ढोंगी बाबाओं के बलात्कार, हत्या, अपहरण, कालाधन जैसी गंभीर मामले उजागर हो रहे हैं, इससे आमजन में साधु-संतों की छवि को धक्का लगा है.
बुरी बात यह है कि इससे वर्षों से त्याग एवं तप करने वाले संत भी अपमानित हो रहे हैं.