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आखिर कौन हैं चंदा कोचर और क्या है उनसे जुड़ा वीडियोकॉन लोन मामला, जानिए

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Chanda Kochhar Videocon Loan Case

Chanda Kochhar Videocon Loan Case : 6 सप्ताह पहले सीबीआई ने पीई दर्ज की

Chanda Kochhar Videocon Loan Case : आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर की मुश्किलें दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है.

दरअसल सीबीआई को वीडियोकॉन लोन मामले में चंदा कोचर और उनके परिवार पर शक है, जिस वजह से चंदा और उनके पति, देवर के खिलाफ जांच एजेंसियों ने लुक आइट नोटिस जारी कर दिया हैं.
यानि की अब इस केस से जुड़े किसी भी व्यक्ति को देश छोड़ने की इजाजत नहीं है और ऐसा करने पर उसे गिरफ्तार करने के आदेश दे दिए गए हैं
बता दें कि नीरव मोदी के पीएनबी बैंक घोटाला उजागर होने के बाद देश के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों के साथ-साथ सारी जांच एजेंसीयां भी चौकन्ना हो गई हैं.
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कौन हैं चंदा कोचर ?
चंदा कोचर इस समय देश के बड़े बैकों में से एक आईसीआईसी बैंक की प्रबंध निदेशक और सीईओ के पद पर कार्यरत हैं. उनके नेतृत्व में बैंक ने नई उंचाईओं को छुआ, उन्होंने ही सबसे पहले बैंक में रीटेल बिजनेस की शुरुआत करी थी.
बैंकिंग क्षेत्र में अपने सराहनीय योगदान के कारण चंदा को कई अवॉर्डों से नवाजा जा चुका है जिसमें भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा पुरस्कार पद्म विभूषण भी शामिल है.
यही नहीं उन्हें दुनिया की प्रसिद्ध मैगजीन फोर्ब्स ने सबसे शक्तिशाली महिलाओं की लिस्ट मे भी जगह दी है.

आखिर क्या है वीडियोकॉन लोन मामला

गौरतलब है कि इस घोटाले की शुरूआत 2008 से शुरू हुई जब वीडियोकॉन समूह के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत ने  चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और उनके दो रिश्तेदारों के साथ मिलकर पावर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (एनआरपीएल) नाम की एक कंपनी बनाई.
इसके बाद कंपनी को 64 करोड़ रुपए का लोन दिया गया और ये लोन देने वाली कंपनी वेणुगोपाल धूत की थी.
बाद में इस कंपनी का मालिकाना हक महज नौ लाख रुपए में उस ट्रस्ट को सौंप दिया गया जिसकी कमान चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के हाथों में थी.
दीपक कोचर को इस कंपनी का ट्रांसफर वेणुगोपाल द्वारा आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से 2012 में वीडियोकॉन समूह को 3,250 करोड़ रुपए का लोन मिलने के छह महीने के बाद किया गया.
इस लोन का करीब 86 फीसदी (2,810 करोड़ रुपए) चुकाया नहीं गया जिसके बाद 2017 में वीडियोकॉन समूह के लोन को बैंक ने एनपीए घोषित कर दिया.
अब जांच एजेंसी धूत-कोचर-आईसीआईसीआई के बीच लेनदेन की जांच कर रही है. बता दें कि वीडियोकॉन को आईसीआईसीआई बैंक का यह लोन कुल 40 हजार करोड़ रुपए के लोन का एक हिस्सा था जिसे वीडियोकॉन समूह ने स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले 20 बैंकों के कंसोर्टियम से लिया था.
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6 सप्ताह पहले सीबीआई ने पीई दर्ज की
इस मामले में सीबीआई ने 6 सप्ताह पहले पीई दर्ज की थी जिसमें चंदा कोचर को छोड़कर वीडियोकॉन ग्रुप के फाउंडर वेणुगोपाल धूत, दीपक कोचर और कुछ अज्ञात लोगों के नाम शामिल थे.
गौरतलब है कि सीबीआई किसी आपराधिक मामले की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करने से पहले पीई दायर करती है. धूत के न्यूपावर रीन्यूएबल कंपनी के साथ कथित लेनदेन को लेकर इस मामले की जांच करने के लिए सीबीआई ने पीई दर्ज करी है.
राजीव कोचर देश छोड़ने की कर रहे थे कोशिश
चंदा कोचर के देवर इस मामले से बचने के लिए देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे लेकिन गुरूवार को उनको एयरपोर्ट से पकड़ लिया गया और उनसे अब पूछताछ की जा रही.
इस मामले में सीबीआई का कहना है कि वे इस लेनदेन से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स की पड़ताल कर रहे हैं अगर किसी तरह की गड़बड़ी के सबूत मिलते हैं तो चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और अन्य लोगों को पूछताछ के लिए समन किया जा सकता है.
अब देखना है कि नीरव मोदी के बाद लोन के नाम पर बैंकों से हो रहे ठगी के और कितने मामले सामने आते हैं.

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