Home विशेष Cornelia Sorabji Birthday : महिलाओं के लिए लड़ने वाली पहली महिला वकील...

Cornelia Sorabji Birthday : महिलाओं के लिए लड़ने वाली पहली महिला वकील को ही भूला देश, गूगल ने किया सलाम तो आई याद

SHARE
cornelia sorabji birthday

Cornelia Sorabji Birthday : गूगल ने डूडल बनाकर किया याद

Cornelia Sorabji Birthday : गजब की बात है न दोस्तो, आज देश में हर कोई महिलाओं के हक की बात कर रहा है. मगर जिसने आजादी से पहले ही महिलाओं को कानूनी अधिकार दिलाने की नींव रखी, आज उसके मरणोपरांत कोई उसे याद तक नहीं करता.

कर्नेलिया सोराबजी देश की एक ऐसी ही गुमनाम महिला है, जिसे हमने तो भुला दिया, मगर दुनिया की सबसे बड़ी आईटी कंपनी गूगल ने आज उनके जज्बे को सलाम किया है.
15 नवंबर 2015 को उनके जन्मदिन पर गूगल ने अपना डूडल बनाकर कर्नेलिया को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं.

सती प्रथा की जड़ में फंसे भारत को बाहर निकाला

वो कर्नेलिया सोरबजी ही थी, जिसने सती प्रथा जैसी महिला विरोधी परंपराओं में फंसे भारत को बाहर निकालने का काम किया. आज देश में महिलाएं जो खुली हवा में चैन की सांस ले रही हैं, उसके पीछे कर्नेलिया का भी संघर्ष छिपा हुआ है.
यह भी पढ़ें – Super Woman Lily : करोड़ों कमाने वाली स्टार यूट्यूबर लिली, हर फरियादी की करती हैं मदद
cornelia sorabji birthday
कर्नेलिया सोराबजी
देश में महिलाओं को लॉ पढ़ने की दिलाई कानूनी मान्यता
कम ही लोगों को पता होगा कि 18वीं और 19वीं शताब्दी के शुरू तक देश में महिलाओं को लॉ की पढ़ाई का अधिकार नहीं था. सिर्फ पुरूष ही इस विषय में पढ़ाई कर सकते थे.
जबकि कई देशों में महिलाओं को लॉ की क्लास करने की अनुमति तो थी, मगर वहां भी इसकी डिग्री सिर्फ पुरूषों को ही दी जाती थी.
गौरतलब है कि जब दुनिया में महिला विरोधी माहौल बना था, तब कर्नेलिया ने भारत में महिलाओं को भी कानूनी शिक्षा देने की वकालत की थी.
इस बारे में कर्नेलिया का मानना था कि जब महिलाओं को कानून की शिक्षा ही नहीं मिलेगी तो उन्हें अपने अधिकारों का ज्ञान कैसे होगा.
संघर्ष भरा रहा कर्नेलिया का सफर
कार्नेलिया ने महिलाओं को कानूनी शिक्षा की मान्यता दिलाने के लिए सरकार के काफी विरोध का सामना करना पड़ा था.
1917 में कार्नेलिया ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा राज्य की अदालत में सहायक वकील पद पर महिलाओं की नियुक्ति की पैरवी की.
शुरूआत में कार्नेलिया की इस मांग पर प्रदेश सरकारों ने ऐतराज जताया. जिसके बाद कार्नेलिया ने इस लड़ाई को कोर्ट में लड़ने की ठानी और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार 1921 में हाई कोर्ट को भी इस पर हामी भरनी पड़ी.
हाई कोर्ट में महिलाओं को सहायक वकील के पद पर तो मंजूरी मिल गई थी, लेकिन कार्नेलिया ने तो महिलाओं को इससे भी ज्यादा दर्जा दिलाने की ठान रखी थी.
फिर हुआ यूं कि कार्नेलिया ने महिलाओं को मुख्य वकील बनाने की भी आवाज उठा डाली, और फिर इस पर भी उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट से हां करा दी थी.
यह भी पढ़ें – Vallari Chandrakar : इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ बेटी ने किसान बन संवारा अपना भविष्य
देश ही नहीं, दुनिया में भी पहली वकील बनने का रिकार्ड कर्नेलिया के ही नाम
15 नवंबर 1866 में महाराष्ट्र के नासिक में पैदा हुई कर्नेलिया सोराबजी भारत की पहली महिला वकील तो हैं हैं, साथ ही वो कर्नेलिया ब्रिटिश यूनिवर्सिटी और ऑक्सफोर्ड यनिवर्सिटी से पास होने वाली भी प्रथम महिला वकील भी हैं.
1954 में कार्नेलिया का 88 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने इंडिया कालिंग और इंडिया रिकॉल नाम की  दो आत्मकथाएं भी लिखी थी.

For More Hindi Positive News and Positive News India Follow Us On FacebookTwitterInstagram, and Google Plus