आखिर क्या है एससी/एसटी एक्ट और क्यों इस पर देश में मचा हुआ है बवाल, जानिए

Dalit Protest SC/ST Act
PC - indian express

 Dalit Protest SC/ST Act : देश भर में हो रहे हिंसक प्रदर्शन में अब तक 8 लोगों की मौत

Dalit Protest SC/ST Act : नए वित्तीय वर्ष की शुरूआत पूरे भारत में बवाल के साथ शुरू हुआ ,इसका कारण एससी/एसटी एक्ट को लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला है.

कोर्ट के इस फैसले के बाद से ही देश के दलितों में काफी क्रोध पनपने लगा था, जिसने आज एक हिंसक रूप ले लिया है.
इस के मद्देनजर मोदी सरकार ने दलितों के हक में सोमवार (2 अप्रैल) को कोर्ट के सामने इस फैसले को लेकर पुर्नविचार याचिका दायर कर दी है.
क्या है एसटी/एससी एक्ट विवाद
भारत में दलित उत्पीडन का मुद्दा हमेशा से ही काफी नाजुक रहा है. ऊंची जातियों द्वारा दलितो को किसी प्रकार के शोषण से बचाने के लिए देश में 1995 में एसटी/एससी एक्ट लागू हुआ.
मगर हालिया रिपोर्ट के अनुसार हर साल देश भर में लाखों दलित उत्पीड़न से जुड़े केस सामने आते हैं जिनमें से सैकड़ों फर्जी होते हैं.
इसी फर्जीपने को रोकने के लिए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट 1989 में सीधे गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला किया है.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की जगह पहले शुरुआती जांच होगी.
केस दर्ज करने से पहले डीएसपी स्तर का अधिकारी पूरे मामले की प्रारंभिक जांच करेगा और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि कुछ मामलों में आरोपी को अग्रिम ज़मानत भी मिल सकती है.
यह फैसला एसटी/एससी संगठनों को रास नहीं आया इसलिए उन्होंने इसके विरोध में 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया था.
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भारत बंद में राजनेताओं का भी है समर्थन
सियासत के ये नेता किसी भी मुद्दे को हाथ से नहीं जाने देते यही वजह है कि अनुसूचित जाति-जनजाति संघर्ष मोर्चा द्वारा बुलाए भारत बंद में भी कई राजनेताओं ने अपना समर्थन दिया है. जिसमें बिहार की राजद, सपा, कांग्रेस और शरद यादव जैसे बड़ी पार्टियां शामिल हैं
यही नहीं केन्द्र की मोदी सरकार ने दलितों का हमदर्द बनने के लिए एससी एसटी एक्ट में तत्काल एफआइआर और तुरंत गिरफ़्तारी पर रोक के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है.  सरकार ने कोर्ट से याचिका पर खुली अदालत में बहस और तत्काल सुनवाई की मांग की है.
बता दें कि करीब 150 समूहों से मिलकर बने एससी/एसटी संगठनों के अखिल भारतीय संघ के हिंसक भारत बंद के बाद बिना किसी दबाव के कोर्ट ने पुनर्विचार की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है.
देश भर में हो रहे हैं हिंसक प्रदर्शन
अनुसूचित जाति-जनजाति संघर्ष मोर्चा द्वारा बुलाए भारत बंद ने पूरे देश में हिंसक रूप ले लिया है. कई जगह तोड़फोड़ व अगजनी की घटनाएं सामने आई है. वहीं मध्‍यप्रदेश के ग्‍वालियर और मुरैना में विरोध प्रदर्शन के दौरान 4 लोगों की मौत हो गई है.
ताजा अपडेट के मुताबिक अब तक इस हिंसक प्रदर्शन में 8 लोगों की मौत की खबर सामने आई है. बंद के कारण जगह-जगह रेल व सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.
बिहार में पंजाब जाने वाली ट्रेन को रोक दिया गया है इसके अलावा बंद समर्थकों ने पटना व हाजीपुर के बीच उत्तर व दक्षिण बिहार की लाइफलाइन ‘महात्मा गांधी सेतु’ को जाम कर दिया है.
यूपी के आजमगढ़ में एक बस पर हमला कर दिया और उसमें आग लगा दी गई. मेरठ तथा आगरा व मैनपुरी में दलित संगठन से जुड़े लोग सड़क पर उतर आए हैं.
राजस्थान में तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ ही झड़प कर ली जिसमें 25 लोग बुरी तरह घायल हुए है.
पंजाब के जालंधर, अमृतसर, लुधियाना, बरनाला, पटियाला सहित अन्य जिलों में भी दलित संगठनों के लोग सक्रिय हैं. इसके साथ ही झारखंड के रांची में आदिवासी हॉस्टल के बाहर उपद्रवियों ने जमकर प्रदर्शन किया.