Home विशेष Delhi Odd Even : एनजीटी ने दिल्ली में ऑड-इवेन फार्मूले को दी...

Delhi Odd Even : एनजीटी ने दिल्ली में ऑड-इवेन फार्मूले को दी मंजूरी, जानिए दुनिया में कितनी है कामगार

SHARE
delhi odd even
demo pic

Delhi Odd Even : इस तरीके का प्रचलन बहुत पुराना है

Delhi Odd Even : दिल्ली सरकार की तरफ से 13 से 17 नवंबर तक ऑड ईवन फ़ॉर्मूला लागू करने के लिए एनजीटी ने भी अपनी मंजूरी दे दी है.

एनजीटी ने आदेश दिया है कि इस बार ऑड-इवेन के दौरान दो पहिया वाहनों, सरकारी कर्मचारियों और महिलाओं को भी छूट नहीं मिलेगी.
गौरतलब है कि एनजीटी ने इससे पहले सरकार से यह सवाल पूछा था कि ऑड- इवेन लागू करने के बाद राज्य में प्रदुषण का स्तर कितना कम होगा. आज सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के जवाब से संतुष्ट होते हुए एनजीटी ने 5 दिनों के लिए ऑड इवेन लागू करने के लिए दिल्ली सरकार को अपनी हरी झंडी दिखा दी है
आपको बता दें कि पूरे विश्व में प्रदुषण को नियंत्रित करने के लिए ऑड इवेन का प्रयोग काफी पुराना है. हालांकि कहीं इससे प्रदुषण में गिरावट दिखाई दी तो कहीं मुश्किलें और बढ़ गईं .
दिसंबर 1952 में इस तरह के स्मॉग ने लंदन को भी अपनी चपेट में ले लिया था, जिसे ग्रेट स्मॉग ऑफ लंदन के नाम से जाना जाता है. जिसके बाद लंदन में भी ऑड इवेन लागू किया गया था मगर वो विफल रहा
बीजिंग
चीन की राजधानी बीजिंग में ऑड-ईवन फार्मूला पहली बार 2008 के ओलिंपिक खेलों के दौरान लागू किया गया था. बीजिंग दुनिया के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों में से है. ऐसे में वहां प्रदुषण का स्तर हमेशा ज्यादा ही रहता है.
इसके अलावा दो और समय पर इसे लागू किया जा चुका है. वहीं प्रदुषण को रोकने के लिए नई गाड़ियों की बिक्री पर भी बीजिंग में पाबंदी लगायी गयी है.
पिछले साल जब स्मॉग से पूरे बीजिंग में प्रदुषण का स्तर बहुत खतरनाक हो गया था तब वहां पूरे शहर को ही बंद कर दिया गया था. स्कूल- ऑफिस सब चीजें वहां पूरी तरह से बंद थे.
मेक्सिको 
ऑड-ईवन फार्मूला मेक्सिको की राजधानी में सब से पहले 1984 में लागू किया गया था जो दस साल तक चला. उस वक्त इसका पालन न करने वालों को दो हज़ार रुपये से लेकर चार हज़ार रुपये तक का जुर्माना देना पड़ा था.
योजना के लागू करने के तुरंत बाद प्रदूषण में 11 प्रतिशत की कमी देखी गई. लेकिन मुश्किलें तब बढ़ी जब लोगों ने ऑड और ईवन दोनों रजिस्ट्रेशन नंबर की कारें खरीदनी शुरू कर दीं. जिससे सड़कों पर कारों की संख्या और ज्यादा बढ़ गई.
प्रदूषण के स्तर में जो गिरावट 11 प्रतिशत थी वह बढ़कर 13 प्रतिशत हो गई.
वहां के हालात इतने बुरे हो गए कि संयुक्त राष्ट्र ने मैक्सिको सिटी को 1992 में दुनिया का सब से प्रदूषित शहर घोषित कर दिया. इसके बाद वहां गाड़ियों पर लागू होने वाले ऑड  इेवन फार्मुला हमेशा के लिए हटा दिया गया.
बोगोटा
बोगोटा में भी गाड़ियों के कारण होने वाले प्रदुषण को रोकने के लिए अलग तरीका निकाला गया था . दक्षिण अमरीकी देश कोलंबिया की राजधानी बोगोटा में व्यस्ततम समय में शहर के अंदर कारों के प्रवेश पर हफ्ते में दो दिन पूरी तरह से पाबंदी लगा दी जाती थी.
लेकिन यह योजना ज्यादा समय तक नहीं चल पाई क्योंकि वाहन चालकों ने व्यस्ततम समय (पीक समय) में लगी पाबंदी को देखते हुए उससे पहले ही गाड़ियों को शहर में लाना शुरू कर दिया था, जिसके कारण शहर की सड़कों पर ट्रैफिक जाम लगना शुरू हो गया था.
पेरिस
पेरिस में सबसे पहले ऑड-ईवन फार्मूला 1997 में लागू किया गया था. इसके बाद 2014 और 2017 में भी इस योजना को लागू किया गया.
योजना के उल्लंघन करने वालों को 22 यूरो का जुर्माना भी लगाया गया. और इसके इलावा अधिकारियों ने वाहनों की गति सीमा 20 किलोमीटर प्रति घंटे कर दी थी.
वहां के अधिकारियों ने इसके सफल परिणाम आने की बात कही उनका मानना था कि ऐसा करने से हर बार प्रदूषण का लेवल काफी नीचे आया.
ऑड इवन के अलावा भी बहुत से तरीके हैं जिससे प्रदुषण कम करने के लिए किया जा सकता है. लेकिन इसमें जरूरी है कि ऑड इवेन के साथ साथ पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधाओं पर भी काम किया जाया ताकि अगर लोग वाहन छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें तो उन्हें किसी प्रकार की मुश्किलों का सामना ना करना पड़े.
इसके अलावा  पेड़ लगाना इसका सबसे अहम तरीका है जिससे बढ़ते प्रदुषण को कम करने की कोशिश की जा सकती है.
यह एक ऐसी पहले है जिसके लिए सरकार के किसी फरमान की जरूरत नहीं है. हर नागरिक अपने स्तर पर इसे अपनाकर राजधानी को ही नहीं पूरे देश को प्रदुषण मुक्त कर सकता है.

बीबीसी के इनपुट से
For More Hindi Positive News and Positive News India Follow Us On FacebookTwitterInstagram, and Google Plus