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सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व में फेक न्यूज को लेकर मचा हुआ है बवाल, जानिए आखिर क्या है पूरा मसला

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Fake News Impact

Fake News Impact : फेक न्युज से लोगों को खुद होगा बचना

Fake News Impact : फेक न्यूज का मामला सिर्फ भारत का ही नहीं है बल्कि इसने पूरे विश्व को ही अपने कब्जे में ले रखा है.

आज के समय में टेक्नोलॉजी की मदद से एक जगह के मसले दूसरी जगह तक आसानी से तुरंत पहुंच जाते हैं, यही वजह है कि लोगों तक किसी जानकारी के पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगता.
चलिए हम आपको बताते हैं आखिर क्या है फेक न्यूज और क्यों इसे लेकर दुनियाभर में मचा हुआ है बवाल
 क्या है फेक न्यूज ? 
फेक न्यूज मीडिया जगत में इस्तेमाल होने वाला एक शब्द है जिसे हम मीडिया स्टूडेंट येलो जर्नलिज्म के तहत पढ़ते हैं.
सरल भाषा में समझे तो फेक न्यूज ऐसी झुठी खबरें होती है जिसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति या संस्था के छवि को नुकसान या फायदा पहुंचाने के लिए किया जाता है.
बता दें कि फेक न्यूज का मकसद पाठकों का मनोरंजन करना या सुचना देना नहीं होता बल्कि इसका मकसद पाठकों को बरगलाने का होता है.
इसका मुख्य काम सनसनीखेज और झूठी खबरों को बनावटी हेडलाइन और झुठी तस्वीरों के साथ रीडर के सामने परोसना होता है.
खबरों की रीडरशिप और ऑनलाइन शेयरिंग बढ़ाकर क्लिक रेवेन्यू बढ़ाना भी फेक न्यूज की ही श्रेणी में आता है.
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देश ही नहीं पूरा विश्व है परेशान
फेक न्यूज से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व भी परेशान है. मीडिया के इस तरह की खबरों के कारण लोग सच्चाई पहचान नहीं पाते हैं और झुठी खबरों को सच मान कर जनता किसी व्यक्ति के बारे में अपना परसेप्शन बना लेती है.
पिछले कुछ सालों में फेक न्यूज को लेकर दुनियाभर में बवाल मचा हुआ है. खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार फेक न्यूज शब्द का इस्तेमाल करते हैं. यही नहीं चुनाव के समय में इस फेक न्यूजों का काफी बड़ा रोल हो जाता है जिससे सभी राजनेता खौफ खाते हैं.
केन्द्र सरकार ने फेक न्यूज पर रोक लगाने की करी कोशिश
दरअसल, फेक न्यूज पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (आईबी मिनिस्ट्री) ने सोमवार शाम पत्रकारों के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए.
इन दिशानिर्देशों के तहत फेक न्यूज का प्रकाशन करने पर पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी. आईबी के प्रेस रिलीज में कहा गया था कि प्रिंट व टेलीविजन मीडिया के लिए दो रेगुलेटरी संस्‍थाएं हैं- प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और न्‍यूज ब्रॉडकास्‍टर्स एसोसिएशन (NBA) अब से यही तय करेंगी कि खबर फेक है या नहीं.
एक बार शिकायत दर्ज कर लिए जाने के बाद आरोपी पत्रकार की मान्यता जांच के दौरान भी निलंबित रहेगी.
वहीं दोनों एजेंसियों द्वारा फेक न्‍यूज की पुष्‍टि किए जाने के बाद पहली गलती पर छह माह के लिए मान्‍यता रद की जाएगी जबकि दूसरी बार में एक साल के लिए मान्‍यता रद हो जाएगी और तीसरी बार में स्‍थायी रूप से पत्रकार की मान्‍यता रद हो सकती है.
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 पीएम ने दिशा-निर्देश लिए वापस

आईबी द्वारा लिए फेक न्यूज पर लिए दिशा-निर्देश को पीएम मोदी ने वापस ले लिया है. आपको बता कि मंत्रालय की ओर से जारी इन दिशा-निर्देशों के खिलाफ मीडिया में माहौल बिगड़ने से पहले ही पीएम ने इसे वापस लेने की बात कह डाली .
उन्होंने मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह अपने दिशा-निर्देशों को वापस लें और इस मामले को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया पर ही छोड़ दें.
इस मसले में सबसे अहम बात यह है कि सबसे ज्यादा फेक न्यूज डिजिटल मीडिया से आते हैं उसके बारे में मंत्रालय ने कुछ भी नहीं कहा.
हालांकि इससे पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी कह चुकी हैं कि सरकार डिजिटल मीडिया के लिए भी जल्द ही दिशा-निर्देश जारी करेगी.
गौरतलब है कि आने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए मंत्रालय इस बार फेक न्यूज पर काफी सख्त रूख इख्तियार कर रहा है.
फेक न्युज से लोगों को खुद होगा बचना
मीडिया से जुड़े होने का बावजुद हम अपने रीडर्स से यह बात कहना चाहते हैं कि आज मीडिया जो भी दिखाती है वो पूरी तरह से सही नहीं होता.
मीडिया संस्थानों पर आर्थिक, सामजिक और राजनैतिक कई तरह से दबाव होते हैं. इसलिए ह्युमन जंक्शन की टीम आप सभी से दरख्वास्त करती है कि अपने विवेक का प्रयोग करते हुए ही किसी न्यूज को सही या गलत मानें.