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Gujarat Election : सूरत में सरदार मनमोहन सिंह की असरदार बातों से भाजपा हुई चित

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Gujarat Election : नहीं चाहता ! मेरी गरीबी पर दूसरे तरस खाए

Gujarat Election : भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अर्थशास्त्र में माहिर हैं, ये तो सुना था. लेकिन राजनीतिशास्त्र में भी वो चाणक्य निकलेंगे इस बात का शायद किसी ने अंदाजा भी नहीं लगाया था.

शनिवार को पीएम मोदी के गढ़ सूरत (गुजरात) में सरदार मनमोहन ने जिस तरह व्यायपारियों की नब्ज टोटलते हुए सत्ता में बैठी सरकार पर कटाक्ष किया वो अपने आप में एक अस्मणीय लम्हा बन गया.
उन्होंने अपनी इस रैली में पूर्व राजनीतिक निर्णयों से लेकर मोदी की राजनीतिक लाभ लेने के हर तरीके पर बड़ी ही चालाकी से कई खतरनाक वार किए.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनमोहन सिंह के हमलों का असर गुजरात चुनाव परिणामों में पड़ना तय है. क्योंकि अक्सर कम बोलने वाले मनमोहन सिंह जब बोलते हैं तो देश की जनता के अलावा विरोधी भी उन्हें गंभीरता से सुनते हैं और उनका अनुसरण करने को मजबूर होते हैं.
चलिए आपको बताते हैं कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने अपनी इस रैली में क्या कहा और उनके बयान के क्या हैं राजनीतिक मायने.
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मेरी गरीबी पर दूसरे तरस ना खाए
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का पीएम मोदी पर यह बहुत बड़ा हमला माना जा रहा है. क्योंकि सबको मालूम है कि पीएम मोदी का लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत जीतने के पीछे मुख्य कारण मोदी की चाय बेचने वाले की छवि रही है.
पीएम मोदी बखूबी समझते हैं कि यह छवि उनको राजनीतिक लाभ दिलाने में सालों तक इस्तेमाल आती रहेगी, इसलिए वो हर भरी जनसभा में अपनी गरीब पृष्ठभूमि का जिक्र करके भावनात्मक रूप से राजनीतिक लाभ बटोरने की कोशिश जरूर करते हैं.
पीएम मोदी की इस राजनीतिक चाल को मनमोहन सिंह ने बखूबी समझते हुए कहा कि मैं नहीं चाहता कि लोग मेरी गरीबी को देखकर मुझपर तरस खाएं .
पूर्व पीएम के मोदी पर किए गए इस प्रहार का भाजपा को भी उम्मीद नहीं थी कि अर्थाशास्त्र में माहिर मनमोहन सिंह को राजनीति की इतनी बारिक समझ होगी.
खैर, इस बयान के जरिए मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी को एक नसीहत भी दे डाली है कि गरीबी का सहारा लेकर कब तक राजनीतिक लाभ बटोरा जा सकता है. अब बस भी करो पीएम मोदी जी..
जीएसटी और नोटबंदी देश के लोकतंत्र के लिए काला दिवस
विपक्ष इस समय सरकार को घेरने के लिए नोटबंदी और जीएसटी का मुद्दा खुब उठा रही है, ऐसे में अपने मजबूत आर्थिक नीति के लिए मशहूर अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह का इन बातों को हल्के में लेने का कोई औचित्य ही नहीं था.
अर्थशास्त्र में विद्वान मनमोहन सिंह ने साफ कहा कि नोटबंदी से देश की मुद्रा कमजोर हुई है, इतना ही नहीं बैंकों के बाहर कड़ी धूप में घंटों खड़े होकर गरीब जनता की भावनाओं से खिलवाड़ भी हुआ है.
उन्होंने अपने भाषण में नोटबंदी के दौरान मारे गए 100 लोंगो का जिक्र करते हुए उनके प्रति संवेदनाएं भी व्यक्त की
वहीं, उन्होंने जीएसटी के बारे में कहा कि इसमें मौजूद कई खामियों की वजह से देश की जीडीपी काफी कमजोर हुई है, गौरतलब है कि जीएसटी लागू होने के बाद से जीडीपी यानि सकल घरेलु उत्पाद दर में गिरावट दर्ज की गई थी.
 देश को हर समय आर्थिक मंदी से निकालने वाले मनमोहन सिंह ने अपने अनुभवों के आधार पर कहा कि जीएसटी के तहत आने वाली व्यवस्था देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली नही हैं.
उन्होंने कहा कि अकेले सूरत में ही 89000 लूम्स कबाड़ में चला गया और 31 हजार कारीगर बेरोजगार हो गए, कई फैक्टरियां बंद हो गई, और ऐसा ही हाल पूरे देश का है.
अपनी बातों के बीच में ही मनमोहन सिंह ने इशारों-इशारों में ही यह भी कह दिया कि मोदी सरकार जनविरोधी निर्णयों को अपनी उपलब्धि में गिनाती है, ये कैसा मजाक है .
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अमेरिका भी मानता है डॉ मनमोहन सिंह का एहसान
दूरदृष्टि सोच के लिए जाने जाने वाले मनमोहन सिंह अक्सर कम ही बोलते हैं, लेकिन वो जब भी बोलते हैं देश ही नहीं, दुनिया के राजनेता भी उसे बड़े गौर से सुनते हैं.
तभी तो दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने खुद अपने इंटरव्यूह में ये कहा है कि 2008-09 में आई वैश्विक आर्थिक मंदी में मनमोहन सिंह ने जिस तरह अपनी आर्थिक नीतिओं से भारत को इसके दुष्परिणाम से बचाए रखा वो अपने में काबिले तारीफ था.
बराक ओबामा ने यह भी कहा कि उन्होंने ना सिर्फ अपने देश बल्कि अमेरिका सहीत दुनिया के कई देशों को भी इससे अभरने का रास्ता सुझाया .
ओबामा ने अपने इंटरव्यूह में यह भी कहा कि मनमोहन सिंह जैसा दूरदृष्टि वाला नेता दोबारा नहीं मिल सकता.