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आज ही के दिन भारत में चली थी पहली ट्रेन,165 सालों में जानिए कितना बदल गई भारतीय रेल

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India First Train History

India First Train History : भारतीय रेल एशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है

India First Train History : भारतीय रेल आज अपनी पहली यात्री ट्रेन की 165वीं वर्षगांठ मना रही है, आज ही के दिन यानि कि 16 अप्रैल 1853 को अंग्रेजों द्वारा पहली सवारी गाड़ी का सफल संचालन किया गया था.

यह पहली ट्रेन बोरी बंदर मंबई(वर्तमान में सीएसटी) से ठाणे के बीच चलाई गई थी जो 57 मिनट में कुल 34 किलोमीटर की दूरी तयकर अपने गंतव्य पर पहुंची थी. उस समय इस ट्रेन में सगभग 400 मुसाफिर सवार थे जो पहली बार इस कामयाबी के गवाह बने थे.
इंडिया टूडे की एक रिपोर्ट के अनुसार इस पहली पैसेंजर गाड़ी को खीचने के लिए उस समय तीन स्टीम रेल इंजन लगाए गए थे जिनके नाम साहिब, सिंध और सुल्तान रखा गया था.
वहीं इस ट्रेन के सफल संचालन के बाद देश में दो नई रेल कंपनियां ग्रेट इंडियन प्रायद्वीप रेलवे (जीआईपीआर) और ईस्ट इंडियन रेलवे (ईआईआर) का गठन हुआ था जिसने बाद से रेल निर्माण की शुरूआत करी थी.
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वर्तमान में भारतीय रेल का नेटवर्क
बेशक भारत में रेलवे की शुरूआत करने वाले अंग्रेज थो मगर आज इसे एक विशाल नेटवर्क बनाया है हम भारतीयों ने.
आपको बता दें कि वर्तमान में भारतीय रेल एशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क तथा सरकारी स्वामित्व वाला अकेला विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है.
आज इसका क्षेत्रफल 115,000 कि॰मी॰ तक फैला है जिसके अंदर 7,172 रेलवे स्‍टेशन आते हैं. यही नहीं हर साल सालना 8.2 अरब यात्री देश के विभिन्न हिस्सों से हमारी ट्रेनों से सफर करते हैं.
इसके अलावा रोजगार के मामले में भी भारतीय रेल सरकार का सबसे बड़ा संगठन है जहां 13 लाख कर्मचारी रेल सेवा में कार्यरत हैं.
जरूरत है और सुधार की
गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में रेलवे में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिला है, जिसमें ट्रेनों की गति बढ़ाने, रेलट्रैक का रखरखाव, यात्री सुविधा जैसे कई विकासशील मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है.
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मगर इन सबके बावजूद आज भी रेलवे कुछ मामलों में विदेशों के मुकाबले बहुत पीछे चल रही है जिसमें सबसे बड़ा मुद्दे है ट्रेनों के बढ़ते हादसे और उनकी लेटलतिफी.
165 सालों के बाद भी हमारी रेलवे अपने यात्रियों को सुरक्षित यात्रा की गारंटी नहीं दे सकी है.यही नहीं यात्रियों को तो यह तक नहीं पता रहता है कि वो कितने समय तक अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगे क्योंकी हमारी भारतीय रेल लेट ही इतना होती है.
मगर इन सब के बीच भी सफर करने वालो की पहली पसंद रेल ही रहती है इसका मुख्य कारण है यात्रियों से वसूला जाने वाला कम किराया जो हर वर्ग को ध्यान में रखकर वसूला जाता है.