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International Women’s Day : केवल महिला दिवस के दिन ही महिलाओं को सम्मान ना दें, आपको भी इस खास दिन की शुभकामनाएं

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International Women's Day
Pic Courtesy - The Indian Express

International Women’s Day : दुनिया की हर नारी शक्ति को सलाम

International Women’s Day : हर तरफ सभी 8 मार्च के इस विशेष दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को लेकर उत्साह में हैं, सभी एक दूसरे से बधाईयां लेने-देने में व्यस्त हैं, बेशक दिन उल्लास का है क्योंकि ये खास दिन महिलाओं के नाम है.

वे महिलाएं जो हर एक की जिंदगी में किसी न किसी रुप में बेहद खास हैं. हमारी ओर से भी आप सभी को महिला दिवस की ढ़ेरों हार्दिक शुभकामनाए.
महिला दिवस जो सामान्य होकर भी महिलाओं के लिए बहुत खास है, लेकिन क्या कभी सोचा है कि ये दिन इतना खास क्यों है या किन-किन महिलाओं के लिए ये दिन खास है. उनके लिए जो संघर्ष से हर नए आयाम गढ़ रही हैं, या उनके लिए जो बहुत ही सहजता से समाज के लिए आने वाली पीढ़ियां जन रही हैं, स्वतंत्र महिलाओं के लिए, सजग महिलाओं के लिए, आत्मनिर्भरता से आगे बढ़ती और जीवन के हर जटिल पहाड़ को चीरती महिलाओं के लिए, या गुमनामी में अब भी कैद में रह रही महिलाओं के लिए.
आखिर वे कौनसी महिलाएं हैं जिनसे ये दिन खास बनता है और जिन्हें याद करके इस खास दिन को और भी खास कर दिया जाता है. गौर करें महिला दिवस के उपलक्ष्य में आज सोशल साइट्स और मैसेजेज पर हर कोई अपनी मां, बहिन, बेटी, भाभी, चाची, पत्नी, प्रेमिका और अपने जीवन में शामिल हर महिला के रुप को और उसके त्याग, प्रेम, बलिदान, व उनकी महानता के लिए कृतज्ञता दिखा रहा है. अपने मोह और प्रेम भावनाओँ में बहकर महिला के असितत्व को अह्म बता रहा है.
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कहीं फेसबुक वॉल पर मां को महिला दिवस की शुभकामनाएं देने वाले पोस्ट हैं, तो कोई अपनी पत्नी और प्रेमिका के होने पर गौरव का अनुभव कर रहा है. और कहीं ट्वीट कर देश की सशक्त बेटीयों और बहिनों के जज्बे को सराहा जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ प्रतिभाशाली महिलाओं को हर क्षेत्र में अग्रणी रहने पर ज़ोर शोर से सम्मानित भी किया जा रहा है.
जाहिर है, महिलाओं का हमारे जीवन में किसी भी रुप में होना यकीनन जरूरी है और उसके अस्तित्व का सम्मान उससे भी ज्यादा जरूरी है. आज लोगों में महिलाओं के प्रति जो समभाव और सम्मान है ये बेहद खुशी की बात है. लेकिन क्या सिर्फ समाज में सम्मान के भाव से रहने वाली महिलाएं ही महिला दिवस पर बधाईयों की हकदार हैं, महिलाओं का वो रुप जिसे वैश्या कहते हैं क्या उसकी अहमियत वेश्यावृत्ति के पेशे में होने पर कम हो जाती है, या वो महिला की श्रेणी में ही शामिल ही नहीं होती है. देखा जाए तो आमतौर पर वेश्या शब्द को बोलना ही हमारी तहजीब के खिलाफ माना जाता है, फिर ऐसे में समाज में उनकी अहमियत की बात को उठाना तो जैसे पाप है.
वहीं अगर बात करें सभ्य समाज की तो आज भी लोग महिलाओं को महिलाओं में ही बांट देते हैं, भेदभाव करते हैं. यही नहीं महिलाओं को भी जाति और धर्म की ही तरह कई रिवाजों और दलीलों में परिभाषित कर दिया गया है. कहना गलत न होगा कि ऊंचाईयों पर फतह हासिल कर चुकीं महिलाएं आज भी पहनावे और पेशे के अनुसार ही सम्मान की निगाह से देखी जाती हैं.
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हैरान करने वाली बात तो यह है कि इतने बदलाव के बाद भी समाज पुरुष प्रधान ही है. और यह महिलाओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का ढ़ोग सिर्फ और सिर्फ महिला दिवस के दिन ही उफान पर आता है. बाकी दिनों तो कपड़ों पर टिप्पणी, उठने-बैठने पर तंज, छेड़खानी, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा और ना जाने कितने असहनीय दर्द का कड़वा सम्मान महिलाओं के लिए खाली किया जाता है.
वहीं महिलाओं की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी बताने वाले लोग ही उनके लिए असुरक्षा और डर का कारण बन जाते हैं. इस एक दिन में अपने ही आसपास की महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराकर और उनके अस्तित्व को मान लेने से क्या सच में ये महिला दिवस खास बन जाता है. या फिर महिलाओं को खास होने का अनुभव कराया जा सकता है.
विचारों और निगाहों में दरिंदगी रखकर महिला दिवस के दिन ही बधाईंया देने से महिलाओं को सम्मान नहीं दिया जाता. समय के साथ सोच को बदलना बहुत जरूरी है, दिवस देखकर या पेशा देखकर नहीं सम्मान दिल से और भली सोच से करें. महिलाओं के सम्मान के लिए कोई विशेष दिन नहीं बल्कि हर दिन विशेष होता है.