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Kadvi Hawa : पर्यावरण की कड़वाहट को असल जिंदगी में महसूस कराती है फिल्म ‘कड़वी हवा’

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kadvi hawa
फोटो साभार - रेडिफ

Kadvi Hawa : जानिए, क्यों देखनी चाहिए ये फिल्म

Kadvi Hawa : अक्सर फिल्मों को बनाते समय निर्देशक द्वारा हमारे मनोरंजन का विशेष ख्याल रखा जाता है, लेकिन उनमें से ही कुछ फिल्में ऐसी बन जाती हैं जो हमें समाज की उस सच्चाई से वाकिफ कराती हैं जिसे शायद हमने नजर अंदाज कर रखा होता है.

ऐसी ही एक फिल्म है ‘कड़वी हवा’ जो बीते शुक्रवार को रिलीज हुई है. इस फिल्म में आपको कोई खान,कपूर या बच्चन नहीं दिखाई देगा और शायद इसी वजह से आप अब तक इसे नजरअंदाज भी कर चुके हों.
क्यों देखनी चाहिए ये फिल्म
हम आपको बताना चाहेंगे कि देश के हर उस नागरिक को ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए जो दिनों दिन पर्यावरण में बढ़ते प्रदुषण को लेकर चिंतिंत है.
इंसानी फितरत के चलते जिस तरह हम प्रकृति का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे आखिर हमारी पृथ्वी पर और वातावरण पर कितना भयानक असर हो रहा है इसे महसूस करना अत्यंत आवश्यक है.
बात चाहे सूखे की हो या ग्लोबल वार्मिंग की, एक बात तो साफ है कि इसके लिये कहीं ना कहीं हम सब जिम्मेदार हैं.
डायरेक्टर नीला माधब पांडा की ये नई फिल्म कड़वी हवा सच में एक ऐसी कड़वी सच्चाई है जिससे हम सब मुंह फेरने की कोशिश कर रहे हैं.

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हर किरदार का है दमदार रोल
फिल्म की कहानी बीहड़ के महुआ गांव की है जहां कर्ज में डूबा किसान आत्महत्या करने को मजबूर है.
फिल्म में संजय मिश्रा एक किसान के पिता का किरदार निभा रहे हैं जिसे हर वक्त ये डर सताता रहता है कि आत्महत्या करने वाला अगला किसान कहीं उनका बेटा ना हो.
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रणवीर शौरी बैंक की तरफ से वसूली कर रहे कर्मचारी के किरदार में हैं, जिसकी अपनी मजबूरियां हैं. गांव वालों के बीच वो यमदूत के नाम से जाने जाते हैं.
गांव वालों का मानना था कि ये यमदूत जिस गांव में जाता है वहां के दो चार किसान भगवान को प्यारे हो ही जाते हैं.
बेटे को खो देने के डर से निपटने के लिए बाप संजय मिश्रा तरकीब निकालते हैं. वो यमदूत से सेटिंग कर लेते हैं.
इनके अलावा फिल्म में तिलोतमा शोम हैं जो संजय मिश्रा की बहू का किरदार निभा रही हैं.
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फोटो साभार – कोडक
रील तरीके से दिखाई गई है रियेलटी
इस फिल्म की एक और खास बात यह है कि इसमें जबरदस्ती का मनोरंजन या नाच गाना डालने की कोशिश नहीं की गई है. शुरू से अंत तक विषय पर गंभीरता बनी हुई है.
ये एक आर्टिस्टिक फिल्म है जिसमे आपको मनोरंजन के मसाले नहीं मिलेंगे. लेकिन फिर भी इसे आपको जरूर देखनी चाहिए क्योंकि ये फिल्म आपको बताती है कि पर्यावरण को हमारी जरूरत है और इसे बचाने कि जिम्मेदारी भी हमारी है.
इस फिल्म में कोई स्टार या मसाला नहीं है मगर मौजूदा हालात में ऐसी फिल्म की बहुत सख्त जरूरत है.
है.
अगर आप रिऐलिटी को और करीब से देखना चाहते है तो क्लाइमेट चेंज पर पूरी ईमानदारी के साथ बनी इस फिल्म को अपने एंटरटेनमेंट की परवाह को दरकिनार कर देखना पड़ेगा.

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