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Lunar Eclipse 2018 : शुरू हुआ चंद्रग्रहण… जानिए कहां क्या रहेगा इसका प्रभाव

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Lunar Eclipse 2018

Lunar Eclipse 2018 : 1866 के बाद पहली बार एक साथ होंगे ब्लू मून, सुपर मून और चंद्र ग्रहण

Lunar Eclipse 2018 : संवत 2074 माघशुक्ल पूर्णिमा के दिन लगने वाला साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण शुरू हो चुका है, इस ग्रहण को लेकर ऐसा माना जा रहा है कि ये 1866 के बाद से पहला ऐसा ग्रहण है जिसमें चंद्रमा अपने तीन रंगों में दिखाई देगा.

बता दें कि भारत के अलावा चंद्रमा का ऐसा नजारा पूरे उत्तर अमरीका, प्रशांत क्षेत्र, पूर्वी एशिया, रूस के पूर्वी भाग, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में भी दिखेगा.
हालांकि आपको इसे सीधे नंगी आंखो से देखने में कोई दिक्कत नहीं होगी लेकिन टेलीस्कोप से देखने पर चांद का आपको बढ़िया व्यू मिलेगा.
चंद्रगहण का समय
वैसे तो तमाम ज्योतिषाचार्या द्वारा चंद्रग्रहण का समय हर जगह अलग-अलग बताया जा रहा है. कुछ की राय में चंद्रगहण 3 घंटे 24 मिनट तक होगा वहीं कुछ इसकी अवधि 2.43 घंटे बता रहे हैं. लेकिन ज्यादातर इलाकों में इसके शाम 5 बजकर 17 मिनट पर शुरू होकर रात 7 बजकर 44 मिनट तक होना बताया जा रहा है.
ग्रहण काल में करें ये उपाय
चन्द्रग्रहण कर्क राशि में लग रहा है ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए चन्द्रमा के मंत्र- ‘ओम सोम सोमाय नमः’ का जप करना इस राशि वालों के लिए लाभकारी होगा.
इन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर
जल तत्व की राशि कर्क में पड़ने वाले ग्रहण के कारण असामान्य रूप से वर्षा होगी तथा हिन्दमहासागर में चक्रवात या बड़े समुद्री तूफान के आने की आशंका बनी रहेगी.
किसानों के लिए सामान्य रूप से यह ग्रहण शुभ होगा . वहीं इसके बाद होने वाली सामान्य वर्षा किसानों की आगामी फसल की बुआई के लिए सुखद रहेगी.
ग्रहण के समय चन्द्रमा की शुभ दृष्टि शुक्र और बुध पर पड़ने के कारण शेयर बाजार, सर्राफा (सोने-चांदी), आभूषण और कपड़े का काम करने वालों को लाभ देगा
साथ ही कुंडली में चन्द्रमा के बाहरवें भाव में होने से देश में विदेशी निवेश को आकर्षित करने की नई योजनाओं की भी संभावना दिख रही है.
चूंकि यह ग्रहण कर्क राशि में लग रहा है जिसके विषय में मेदिनी ज्योतिष के प्रसिद्ध ग्रन्थ बृहत्संहिता में कहा गया है कि इस ग्रहण से यादवों, वनवासियों, पहलवानो, मत्स्य (राजस्थान), कुरु (हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश), पांचाल (पंजाब) को पीड़ा होती है तथा क्षेत्र में अनाज महंगा होता है.
इसके अलावा माघ महीने में पड़ रहे इस ग्रहण को बंगाल और उड़ीसा के लिए अशुभ माना गया है
वैज्ञानिकों के लिए क्या लाभ
पूरी तरह से पृथ्वी से ढक जाने के कुछ घंटों के बाद एक बार फिर चांद सूरज की किरणों की जद में आ जाएगा. इसे ऐसे समझे कि कुछ ही घंटों में चांद पर ‘बहुत सर्दी’ से ‘बहुत गर्मी’ जैसा माहौल होगा.
ऐसे में वैज्ञानिकों को ये समझने का मौका मिलेगा कि चांद के जमीन को अगर अचानक से बिलकुल ठंडा कर दिया जाए तो क्या होगा? इससे चांद की मिट्टी और उसके जमीन के बारे में जानकारी जुटाई जा सकेगी.
समझा जा सकेगा कि कैसे सालों में चांद के आकार में बदलाव आ रहा है. ऐसी घटना से वैज्ञानिकों को चांद के मौसम को भी समझने का पूरा मौका मिल सकेगा.
क्या है सुपरमून, ब्लूमून और ब्लडमून
सुपर मून में चंद्रमा, धरती के सबसे करीब होता है और सामान्य आकार से ये 14 फीसदी अधिक बड़ा और 30 फीसद तक अधिक चमकीला नजर आता है.
वहीं नासा के मुताबिक ब्लूमून में चंद्रमा का नीचे का हिस्सा ऊपरी हिस्से की तुलना में ज्यादा चमकीला दिखाई देता है और नीली रोशनी फेंकता है ऐसा माना जा रहा है कि 31 जनवरी 2018 के बाद ये ब्लूमून 2028 और 2037 में देखने को मिलेगा
ब्लडमून में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा ऐसी स्थिति में होते हैं जब कुछ समय के लिए पूरा चांद धरती की छाया से छिप जाता है लेकिन इसकी रोशनी लाल (रक्त जैसी) हो जाती है इसलिए इसे रक्तिम चंद्र या लाल चांद और ब्लड मून भी कहते हैं. ऐ
सा तब ही होता है जब चांद पूरी तरह से पृथ्वी की रोशनी में ढक जाता है, लेकिन फिर सूरज की ‘लाल’ किरणें ‘स्कैटर’ होकर चांद तक पहुंचती है तो चांद का रंग खूनी लाल की तरह दिखने लगता है.
कब लगता है चंद्रग्रहण
वैसे तो चांद पर लगने वाले ग्रहण यानि कि चंद्रग्रहण के बारे में हम सब ने बचपन में साइंस की किताबों में पढ़ा होगा कि जब सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच में इस तरह आ जाती है कि चांद धरती की छाया से छिप जाता है तो उसे हम चंद्रग्रहण कहते हैं.

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