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Mahasweta Devi Birthday : मशहूर साहित्यकार महाश्वेता जी के जन्मदिन पर समर्पित है गूगल का आज का डूडल

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Mahasweta Devi Birthday
Mahasweta Devi

Mahasweta Devi Birthday : विरासत में मिला था साहित्य

Mahasweta Devi Birthday : देश के नामचिन लोगों को उनके जन्मदिन पर याद करने की कड़ी में आज गूगल ने अपना डूडल बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी को समर्पित किया है.

गूगल ने Mahasweta Devi’s 92nd Birthday शीर्षक से डूडल बनाया है, जिसमें उसने महाश्वेता देवी को हाथ में एक कॉपि में कुछ लिखता हुआ दिखाया है जबकि उनके पीछे कई तरह के पात्र चित्रित किए गए हैं.
साहित्य तो जैसे विरासत में मिला
महाश्वेता देवी का जन्म 1926 में ढाका में हुआ था. उनके पिता मनीष घटक बेहद लोकप्रिय कवि और उपन्यासकार थे और उनकी मां धरित्री देवी भी समाज सेविका एवं कवियित्री थीं.
महाश्वेता देवी ने अपनी शुरूआती पढ़ाई छाका में ही कि मगर देश विभाजन के बाद उनका परिवार पश्चिम बंगाल आकर बस गया .
साहित्यकार महाश्वेता देवी एक बांग्ला भाषा की लेखिका थीं, मगर इसके बावजूद भी वह हर भाषा, हर समाज में एक सम्मानित नाम हैं. उनकी पहचान भारत की प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका के रूप में आज भी होती है.
उन्होंने अपना पहला उपन्यास झांसी की रानी पर लिखना शुरू किया था जो 1956 में ‘झांसीर रानी’ नाम से छपा.
इसके बाद उन्होंने अरण्य का अधिकार, शालगिरह की पुकार पर, टेरोडेक्टिल, चोट्टिमुंडा और उसका तीर, अग्निगर्भ, हजार चौरासी की मां, मास्टर साब, श्री श्री गणेश महिमा, तारार आंधार, आंधार माणिक, नील छवि आदि अनेक उपन्यास लिखें.
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मशहूर रचनाओं बर बनी फिल्में
बता दें कि साहित्यकार महाश्वेता जी का जितना नाम साहित्य के क्षेत्र में है, उतना ही फिल्मी दुनिया में भी है क्योंकि उनकी कई कहानियों पर बॉलीवुड में फिल्में बन चुकी हैं.
अभिनेता दिलीप कुमार और वैजयंती माला की जबरदस्त कामयाब फिल्म संघर्ष (1968) महाश्वेता देवी की कहानी ‘लायली असमानेर आयना’ पर आधारित है.
डिंपल कपाड़िया की रूदाली (1993) फिल्म को उनके उपन्यास रूदाली से प्रभावित बताया जाता है.इस फिल्म में डिंपल कपाड़िया ने राजस्थान की महिलाओं की पीड़ा को बयान किया था. इसी फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए डिंपल को नेशनल फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया था.
हजार चौरासी की मां (1998) की ये फिल्म भी महाश्वेता देवी के इसी नाम से उपन्यास से ली गई है. फिल्म की कहानी 1970 के नक्सली आंदोलन पर आधारित थी.
1979 में महाश्वेता को बिरसा मुंडा पर आधारित उनके उपन्यास ‘अरण्येर अधिकार’ के लिए महाश्वेता देवी जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया.
1986 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया. इसके अलावा उन्हें 1996 में ज्ञानपीठ पुरस्कार और रमन मैगसेसे पुरस्कार प्रदान किए गए. साथ ही उन्हें 2006 में पद्म विभूषण की उपाधि से भी सम्मानित किया गया. महाश्वेता की करीब 100 उपन्यास लिखे थे और तकरीबन 20 छोटी कहानियां संग्रहित है.
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मृत्यु के 2 महीने पहले से महाश्वेता देवी का कोलकाता के बेले व्यू क्लिनिक में इलाज चला रहा था . उन्होंने अपनी उम्र के चलते होने वाली बीमारी को स्वीकार कर लिया था.
डॉक्टरों के मुताबिक अंतिम समय में उनके रक्त में इंफेक्शन हो गया था और किडनी भी फेल हो चुकी थी, जिसके कारण उनकी स्थिति पहले से काफी बिगड़ गई थी.
जीवन भर किए गए अपने सृजन और सदकार्यों की महक को दुनिया में बिखेरकर, 90 सालों तक बांग्ला साहित्य की बगिया को पोषित करने वाली महाश्वेता देवी अंतत: 28 जुलाई 2016 को इस दुनिया को अलविदा कह गईं.

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