महात्मा गांधी के सिद्धांतो का अनुसरण आज भी देश, दुनिया के लोग करते हैं, आखिर क्या है वजह

Mahatma Gandhi Death Anniversary

Mahatma Gandhi Death Anniversary : अहिंसा के पथ पर सिखाया सभी को चलना

Mahatma Gandhi Death Anniversary : 30 जनवरी का दिन हमारे भारतीय इतिहास का वो काला दिन है जिसे याद करते ही सभी देशवासियों की आंखे नम हो जाती हैं. और हो भी क्यों ना…. यह वही दिन तो है जब हमें आजादी दिलाने वाले महात्मा गांधी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी.

आज देश बापू की 70वीं पुण्यतिथि मना रहा है साथ ही हर साल की तरह आज के दिन हम उन शहीदों को भी याद करेंगे जिन्होंने देश को आजाद कराने में अपनी जान गंवाई है.
इस दिन देश के कई हिस्सों में 2 मिनट का मौन उन सभी महापुरूषों के लिए रखा जाता है जिनकी वजह से आज हमें एक आजाद देश में जीने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है.
अहिंसा के पथ पर सिखाया चलना
महात्मा गांधी ने हर परिस्थिति में अहिंसा और सत्य का पालन किया और लोगों से भी इनका पालन करने के लिए कहा करते थे. यही नहीं उन्होंने अपना पूरा जीवन सदाचार और लोगों के न्याय के लिए समर्पित कर रखा था.
शायद यही वजह है कि बापू का दिया हुआ हर सिद्धांत का अनुसरण देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लोग आज भी करते हैं.
बापू के मौत के पीछे यह थी वजह

बता दें कि महात्मा गांधी की हत्या खुद को हिंदू कट्टरवाद की विचारधारा से प्रेरित मानने वाले नाथूराम गोड़से ने की थी.

ऐसा करने के पीछे उसकी सोच थी की भारत के विभाजन और उस समय हुई साम्प्रदायिक हिंसा में लाखों हिन्दुओं की हत्या के लिये महात्मा गांधी ही उत्तरदायी है.
हालांकि इस हत्या के पीछे कुछ राजनीतिक दलों के होने की भी बात कही गई थी, लेकिन बहुत छानबीन करने के बाद भी इस हत्या में किसी भी दल के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला.
बता दें कि नाथूराम गोडसे इस दिन से पहले भी कई बार महात्मा गाँधी की हत्या करने का प्रयास कर चुका था मगर वो सफल नहीं हो पा रहा था.
फिर आखिर में उसे मौका मिल ही गया और उसने 30 जनवरी को, बापू की प्रार्थना सभा में शामिल होने से पहले ही उनकी हत्या कर दी.
हत्या के बाद गोडसे को गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया जिसमें 8 नवंबर 1949 को उनका परीक्षण पंजाब उच्च न्यायालय, शिमला में किया गया था. और फिर 15 नवंबर 1949 को नाथूराम गोडसे को अंबाला जेल में फांसी दे दी गई थी.
इस तरह मनाया जाता है शहीद दिवस
गौरतलब है कि 30 जनवरी यानि की शहीद दिवस के दिन देश के राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और तीनों सेना के प्रमुख राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधि पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.
वहीं इसके अलावा विशेष तौर पर सभी धर्म के लोग देश के हर कोने में प्रार्थना का भी आयोजन कराते हैं.

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