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मुन्ना बजरंगी ! एक ऐसा हत्यारा जो अपनी ही मौत की पटकथा नहीं समझ सका

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Munna Bajrangi Murder
PC - HT

Munna Bajrangi Murder : 17 साल की उम्र में करी थी पहली

Munna Bajrangi Murder : कुख्यात बदमाश मुन्ना बजरंगी की हाल ही में गोली मारकर हत्या कर दी गई, यहां सवाल यह है कि आखिर ये मुन्ना बजरंगी कौन था और इसकी मौत के बाद भी पुलिस क्यों चैन से नहीं बैठ पा रही है ? 

कौन था मुन्ना बजरंगी ? 

 तो चलिए सबसे पहले जानते हैं कौन है मुन्ना बजरंगी और कैसे कम समय में ही वो जुर्म की दुनिया में बादशाह बन गया.
दरअसल जौनपुर में जन्म लेने वाला प्रेम प्रकाश बचपन से ही बदमाशी में माहिर था उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखा कर एक अच्छा इंसान बनाना चाहते थे लेकिन मुन्ना बजरंगी ( प्रेम प्रकाश )  तो मानो पहले ही कुछ और सोचे बैठा था.
प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना ने पांचवीं तक पढ़ाई की और फिर जुर्म का रास्ता अपना लिया, 1967 में जन्मा मुन्ना पहली बार चर्चा में तब आया जब उसने एक व्यापारी को मौत के घाट उतार दिया.
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उस वक्त मुन्ना की उम्र करीब 17 साल थी और इस हत्या के बाद मुन्ना के नाम से लोग खौफ खाने लगे थे. लेकिन, अभी मुन्ना के लिए ये काफी नहीं था और उसने न जाने ऐसे एक-एक करके कितने लोगों को मौत के घाट उतार दिया.

 जब बीजेपी विधायक को मुन्ना ने “भून दिया” 

पूर्वांचल में किसी समय पर मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह के नाम का खौफ हुआ करता था इस बीच मुन्ना के गांव जौनपुर के पास एक बीजेपी विधायक कृष्णकांत राय ने इन बदमाशों की कमर काफी हद तक तोड़ दी थी.
लेकिन, किस्मत को शायद कुछ और मंजूर था कृष्णकांत राय को मुन्ना ने एक या  दो  नहीं बल्कि सैकड़ों गोलियों से उसी के गांव के पास छलनी किया था. सूत्रों की माने तो मुन्ना बजरंगी ने यह काम मुख्तार अंसारी के कहने पर किया था.

 मुन्ना बजरंगी पुलिस से बचकर भाग तो गया लेकिन… 

अब लगभग भारत का हर व्यक्ति मुन्ना बजरंगी का नाम जान चुका था और मुन्ना जुर्म की दुनिया का बादशाह बन चुका था.
उसने करीब 40 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था जिसके बाद पुलिस ने  उसपर 7 लाख का इनाम रखा था.
साल 1996 में बीजेपी विधायक की हत्या करने के बाद फरार मुन्ना मुंबई में ऑटो चलाने लगा, मुन्ना को लगा था अब शायद वह बच गया है. लेकिन, साल 2009 में मुंबई के मलाड से पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और सलाखों के पीछे डाल दिया.
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 जेल में मुन्ना बजरंगी का इस “शख्स को मोटा” बोलना पड़ गया भारी 

 पुलिस ने  9 जुलाई को मुन्ना बजरंगी को बागपत की जेल में शिफ्ट किया था, जहां उसकी हत्या कर दी गई. हत्या के तुरंत बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन फानन में कई बड़े अफसरों पर सीएम योगी की गाज भी गिरी.
आपको बता दें यूपी का एक और कुख्यात बदमाश सुनील राठी बागपत के उसी जेल में बंद था जिसमें मुन्ना बजरंगी को शिफ्ट किया गया था.
सुनील राठी ने इस बात को कबूला है कि उसने ही मुन्ना बजरंगी की हत्या की है लेकिन, उसने इस हत्या के पीछे पुलिस को जो कहानी बताई है वह बेहद दिलचस्प है.
उसके अनुसार जब वह जेल के पार्क में टहल रहा था तो मुन्ना बजरंगी सामने से आया और उसे “मोटा कहने लगा” जिसके कारण गुस्से में आकर सुनील राठी ने अपनी पूरी बन्दूक की गोलियां उसके सर में खाली कर दीं.
सुनील उसे तब तक गोली मारता रहा जब तक उसे इस बात पर यकीन नहीं हो गया कि मुन्ना पूरी तरीके से मर चुका है.

 शक के घेरे में पुलिस प्रशंसन ! 

जेल प्रशासन ने सुनील राठी के खिलाफ FIR दर्ज करते हुए मामले की तहकीकात शुरू कर दी है. यहां सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर सुनील राठी के पास जेल में बंदूक कहां से आई इससे बड़ा सवाल यह है कि क्या सुनील को पहले से पता था मुन्ना बागपत जेल में आने वाला है ?
बता दें कि पुलिस ने जेल के गटर से उस बंदूक को बरामद कर लिया है जिससे मुन्ना बजरंगी की हत्या की गई है.